प्राथमिक विद्यालय में प्राइवेट विद्यालयों की झलक

प्राथमिक विद्यालय में प्राइवेट विद्यालयों की झलकरायबरेली जिले में प्राइवेट स्कूल की तर्ज पर चल रहा बसावन खेड़ा गाँव का प्राथमिक विद्यालय

सौरभ कश्यप- कम्यूनिटी जर्नलिस्ट

खीरों (रायबरेली)। सरकार द्वारा संचालित ग्रामीण क्षेत्रों में बने प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ाई और संसाधनों के लचीलेपन से दिन-प्रतिदिन पढ़ाई का स्तर गिरता जा रहा है। लेकिन कई जगह शिक्षकों ने नई तस्वीर गढ़ी है। खीरों ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय, बसावन खेड़ा के शिक्षक स्कूल को एक अलग पहचान दिलवाने की कोशिश कर रहे हैं।

बसावन खेड़ा गाँव का प्राथमिक विद्यालय

रायबरेली जिला मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर दक्षिण दिशा में स्थित खीरों ब्लॉक के बसावन खेड़ा गाँव में बने प्राथमिक विद्यालय में 136 छात्र पंजीकृत हैं, यही नहीं उनमें से हर दिन 122 से 125 बच्चे उपस्थित भी रहते हैं।

लगभग दो वर्षों से हम इसी विद्यालय में है, जब हम यहां आए थे, तो यहां मात्र 41 बच्चे ही पंजीकृत थे, लेकिन हमने विद्यालय के शिक्षकों के साथ प्राइवेट विद्यालयों की तरह ही घर-घर जाकर लोगों से संपर्क करने के साथ स्कूल के बैनर व पोस्टर भी गाँवों में लगवाए। इससे यहां बच्चों की संख्या बढ़ गई।
आशा देवी, प्रधानाचार्य

स्कूल में लगे नल से खराब पानी निकलने की शिकायत जब विद्यालय प्रशासन ने ग्राम प्रधान और ब्लॉक अधिकारियों से की, लेकिन उसका कोई फायदा नहीं हुआ, तो विद्यालय के शिक्षकों ने खुद मिलकर अपने पैसों से स्कूल में समरसिबल लगवा दिया।

विद्यालय के शिक्षक नरेंद्र कुमार ने बताया कि बच्चों को जो कार्य घर के लिए दिया जाता था, तो वो भूल जाने की वजह से उसे नहीं कर पाते थे। इसको सुधारते हुए हमने प्राइवेट विद्यालयों की तरह यहां हर बच्चे के लिए एक गृहकार्य डायरी की व्यवस्था की, जिससे अब हर बच्चा हर दिन गृहकार्य करके भी लाने लगा है हमारे विद्यालय के सभी शिक्षकों का यही प्रयास रहता है कि, जिले के अन्य विद्यालयों की अपेक्षा हमारे विद्यालय की एक अलग पहचान बने।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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