औरैया में सर्वे के नाम पर सरकारी धन में सेंध

औरैया में सर्वे के नाम पर सरकारी धन में सेंधटीम के सदस्यों ने हर नलों पर सर्वे किया था और हर नल पर नम्बर भी डाला गया था।

कम्यूनिटी जर्नलिस्ट- ठाकुर किशन सिंह

बिधूना (औरेया)। सरकार चाहे लाख प्रयास करे लेकिन सरकारी महकमे के लोग सुधरने वाले नहीं हैं। सरकार की ओर से करीब चार महीने पहले दर्जनों गाँवों के नलों का पानी एक सर्वे के नाम पर कुछ लोग भर ले गये थे। ग्रामीणों के पूछने पर उन्होंने बताया था कि सरकार आपके पानी की जांच करा रही है कि कहीं आप फ्लोराइड युक्त पानी तो नहीं पी रहे हैं।

इस सर्वे को चार महीने का लम्बा समय हो चुका है लेकिन आज तक ग्रामीणों को कोई यह बताने नहीं आया कि आखिर पानी की जांच के बाद के निष्कर्ष क्या हैं? ताजपुर, खरगपुर, किन्दरापुर्वा, डोडापुर, पुसौली, सलेमपुर, रतनपुर, बंथरा, मढहामाछीझील, पुर्वा धन्ना, भानूपुर, अलीपुर, पलिया आदि गांव के निवासियों ने बताया कि चार महीने पहले हमारे गाँव में एक टीम आई थी। जिसने गाँव में लगे सभी नलों के पानी का सैम्पल भरा था। हमारे द्वारा यह पूछने पर कि इसका क्या होगा तो टीम के सदस्यों ने बताया कि सरकार आपके गाँव में लगे प्रत्येक हैण्डपम्प की जांच करानी चाहती है ताकि यह पता चल सके कि आप कैसा पानी पी रहे हैं? सरकार की मंशा यह थी कि गाँवो के लोग अधिक जागरूक नहीं हैं।

अखबार पढ़ने या फिर समाचार चैनलों पर डिबेट सुनने का समय किसानों के पास नहीं होता, जिस कारण वो कई महत्वपूर्ण जानकारियों को पाने से वंचित रह जाते हैं। यही कारण है कि सरकार ने हजारों रूपये खर्च कर कई टीमें गठित की और उन्हें प्रत्येक गाँवों में भेजा। टीम के सदस्यों ने हर नलों पर सर्वे किया था और प्रत्येक नल के ऊपर नल का नम्बर भी डाला गया था। सभी नलों के पानी के नमूने भी टीम के सदस्यों ने लिये थे और ग्रामीणों को आश्वासन दिया था कि जल्दी ही इसके परिणामों से आपको अवगत करा दिया जायेगा।

बृजमोहन सिंह, दीन मुहम्मद, सोनप्रताप सिंह, मनोज सिंह, अशर्फीलाल, शिवशंकर अवस्थी, रामेन्द्र सिंह, भूपेन्द्र सिंह, नसरूददीन, मुन्ना खां, दयाशंकर, जगदीश सिंह, रामपाल, रमेश, शिवेन्द्र सिंह, मु़. हमीद, मु़. नईम, मुकेश कुमार, दिलीप सिंह, राकेश सिंह सहित दर्जनों ग्रामीणों ने उच्चाधिकारियों से मांग की है कि चार माह पूर्व गाँव-गाँव जाकर सभी नलों के पानी का सैम्पल भरने और नलों पर नम्बर अंकित करने वाली टीम के निष्कर्षों से ग्रामीणों को अवगत कराया जाये ताकि सर्वे के नाम पर जनता की मेहनत की गाढ़ी कमाई बर्बाद होने से बच सके।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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