नहीं मिली इंदिरा आवास की दूसरी किश्त, बिना छत वाले मकान में रहने को मजबूर ग्रामीण 

नहीं मिली इंदिरा आवास की दूसरी किश्त, बिना छत वाले मकान में रहने को मजबूर ग्रामीण मकानों का निर्माण अधर में ही रुक गया है।

रिपोर्टर- दीपिका मिश्रा, छात्र पत्रकार ( स्वयं कम्यूनिटी जर्नलिस्ट )

श्री गांधी विद्यालय इंटर कॉलेज

रामपुर (रायबरेली)। साठ वर्षीय राम दास पिछले आठ महीने से खुली छत के नीचे रहने को मजबूर हैं। सरकार से मिले इंदिरा आवास की पहली किश्त तो उन्हें समय पर मिल गई थी पर दूसरी किश्त आने में आठ महीने से ज्यादा का समय लग गया है, जिससे उनका पूरा परिवार बगैर छत वाले मकान में रहने को मजबूर है। मकानों का निर्माण अधर में ही रुक गया है।

रायबरेली जिला मुख्यालय से 30 किमी उत्तर दिशा में रामपुर गाँव के रहने वाले राम दास अपनी परेशानी बताते हुए कहते हैं, "गाँव में पांच लाभार्थियों को इंदिरा आवास बांटे गए थे। इसमें छत ढालने के लिए मिलने वाली दूसरी किश्त अभी तक नहीं मिली है। घर पर छत न होने से बहुत दिक्कतें हो रही हैं।"

भारतीय वित्त मंत्रालय की वर्ष 2012-13 की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2012 में इंदिरा आवास योजना के तहत 10 हजार 513 करोड़ रुपए का बजट पारित हुआ था। इसमें चार हजार 930 रुपए का फंड ही रिलीज़ हो पाया था। इससे निर्धारित किए गए लक्ष्य का सिर्फ एक चौथाई हिस्सा ही पूरा किया जा सका था।

खुली छत के नीचे सोने वाले रामदास अपने गाँव के अकेले व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि उन्हीं की तरह गाँव के चार अन्य लोगों को किश्त अभी तक नहीं मिली हैं। गाँव की रामवति देवी (56 वर्ष) बताती हैं, “कॉलोनी की क़िस्त न मिलने की शिकायत हमने कई बार प्रधान से की थी पर उससे कोई फायदा नहीं हुआ। इसके बाद अपनी समस्या को लेकर गाँव के सभी आवास पात्रों ने ब्लॉक जाकर बीडीओ के सामने धरना भी दिया।”

जिले में इंदिरा आवास योजना (आईएवाई) में लोगों को किश्त न मिलने की बात पर आईएवाई परियोजना अधिकारी भानुप्रताप बताते हैं, "जिले में इंदिरा आवास योजना में लोगों को किश्तें न मिल पाने की दिक्कत लगभग सभी ब्लॉकों में है। हमने भारत सरकार को एप्लीकेशन भेज दी है। जल्द ही लाभार्थियों को दूसरी किश्त उपलब्ध करा दी जाएगी।"

“This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).”


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