कमीशन के लालच में मरीजों का हो रहा शोषण

कमीशन के लालच में मरीजों का हो रहा शोषणसामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों की मिलीभगत से मरीजों को भारी चपत लग रही है।

स्वयं कम्युनिटी जर्नलिस्ट

शोहरतगढ़। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शोहरतगढ़ में डॉक्टरों की मिलीभगत से मरीजों को भारी चपत लग रही है, जबकि दवा विक्रेताओं का धंधा खूब फल-फूल रहा है। दरअसल, कमीशन के फेर में डॉक्टर यहां आने वाले मरीजों को बाहरी दवाएं लिख रहे हैं। मरीजों की शिकायत है कि डॉक्टर दवा लिखने के बाद पर्ची वहीं केबिन में खड़े केमिस्टों को थमा देते हैं।

इस तरह जो दवा उन्हें मुफ्त मिलनी चाहिए, मजबूरी में उसके बदले पैसा खर्च करना पड़ रहा है। सीएचसी के डॉक्टरों की इस हरकत पर जनप्रतिनिधि चुप्पी साधे हैं तो अधिकारी शिकायतों के बाद भी इस पर संज्ञान लेने को तैयार नहीं हैं, जबकि मरीजों को कमीशनखोरी के जाल में फंसाने का गोरखधंधा लंबे समय से चल रहा है। अस्पताल में दवाएं उपलब्ध होने के बाद भी अलग-अलग कंपनियों की बाहरी दवाएं लिखी जा रही हैं।

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स्थानीय रवींद्र कुमार (26 वर्ष) ने बताया, “ज्वाइंट पेन और सूजन होने पर मैं सीएचसी पहुंचा तो वहां एसीलॉक रहने के बाद भी पेन्टाप डीएसआर लिखा गया।”

एक चिकित्सक द्वारा लिखे बीते जनवरी, फरवरी और मार्च माह के पर्चे पर गौर किया गया तो पता चला कि अस्पताल में एसीलॉक जैसी दवा रहने के बावजूद कमीशन के चक्कर में बाहरी दवा लिखी गई। दवा लेने आए हयातुल्लाह (60) कहते हैं, “पेट दर्द होने पर मुझे पूरी दवा बाहर से लेनी पड़ी।”

प्राइवेट केमिस्टों की चांदी

सीएचसी में दवाएं उपलब्ध होने के बाद भी डॉक्टरों की सेटिंग-गेटिंग से चल रहे कारोबार में प्राइवेट केमिस्टों की चांदी है। केमिस्ट डॉक्टर को दिए गए कमीशन की भरपाई मरीजों से मनमाफिक पैसे लेकर कर लेते हैं। स्थानीय ग्राम प्रधान श्यामसुंदर चौधरी (40 वर्ष) ने बताया, ‘‘निःशुल्क दवाएं उपलब्ध कराना शासन की मंशा है, लेकिन डॉक्टर कमीशन के चक्कर में मरीजों से धोखाधड़ी कर रहे हैं।”

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सीएमओ डॉ. राजेंद्र कपूर ने बताया, सीएचसी पर बाहरी दवा लिखना गलत है। सरकार का सख्त आदेश है कि जेनरिक दवाएं लिखी जाएं। अगर केंद्र से दवा नहीं दी जा रही है तो वह नियम के खिलाफ है। किसी मरीज ने शिकायत की तो जांच होगी और दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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