पशुपालन से मिली खेती में मदद 

पशुपालन से मिली खेती में मदद अपनी डेयरी में रणविजय सिंह उर्फ रन्नू सिंह।

कम्यूनिटी जर्नलिस्ट: मोबिन अहमद

रायबरेली। आज कल ज़्यादातर युवा काम की तालाश में महानगरों का रूख कर रहे हैं, वहीं कुछ ऐसे युवा भी हैं, जो अपने गाँव में रहकर ग्रामीण संसाधनों के उचित इस्तेमाल और अपनी नई सोच के ज़रिए नए-नए आयाम गढ़ रहे हैं। इन्ही में से एक हैं रणबहादुर सिंह (40 वर्ष) उर्फ रन्नू सिंह, जिन्होंने खेती के साथ-साथ पशुपालन करके अपनी खेती को तो परवान चढ़ाया ही, साथ ही ऐसी गौशाला बनाई, जहां से वो डेढ़ से दो क्विंटल दूध बेचकर मुनाफा कमा रहे हैं।

तब गौ पालन शुरू किया

रन्नू सिंह बताते हैं,'' हमारे घर में आठ-दस जानवर तो शुरू से ही थे। घर में खेती काफी है, जब मैंने खेती के काम में रूचि लेना शुरू किया, तो मुझे लगा कि अगर जानवर और बढ़ा लिए जाएं, तो उनके गोबर से हमारे खेतों को अच्छी खाद भी मिल जाएगी और दूध बेचकर आमदनी भी बढ़ेगी तो मैंने गौ पालन पर ध्यान देना शुरू किया।'' रणबहादुर सिंह रायबरेली जनपद के बछरावां ब्लॉक से 12 किलोमीटर पश्चिम में स्थित नींवा ग्रामसभा के निवासी हैं। रन्नू सिंह गाँव में ही रहकर खेती किसानी करते हैं और साथ-साथ पशुपालन भी करते हैं। आज रन्नू सिंह के पास 103 गाय और 5 भैंस हैं, जिनके ज़रिए दो क्विंटल से ज़्यादा दूध की बिक्री की जाती है। रन्नू सिंह के इस कार्य से ही गाँव के ही 15 लोगों का रोजगार मिला है।

नहीं ली कोई सरकारी मदद

रन्नू सिंह आगे बताते हैं कि इस काम में हमने किसी सरकारी योजना की मदद नहीं ली, बल्कि दूध की बिक्री का पैसा ही लगाना शुरू किया। आज हमारे पास 100 से अधिक गाय हैं। हम अपनी डेयरी का दूध पराग डेयरी को देते हैं। इतनी बड़ी संख्या में पशुओं के रखरखाव के संदर्भ में रन्नू सिंह ने बताया कि हम जानवरों के लिए दाना, हरा चारा, सुडान चरी, बाजरा, जई और बरसीन अपने खेतों में ही उगाते हैं, जो इन्हें खिलाते हैं और इनके गोबर से बनी खाद हमारी उपज बढ़ाती है।

पशुओं की बीमारियों पर रखा जाता है खास ध्यान

रन्नू सिंह की मानें तो पशुओं को सबसे ज़्यादा थनैला रोग से बचाना पड़ता है। इस रोग में जानवर के थन सूझ जाते हैं और यह पक्की ज़मीन पर रगड़ खाने से होता है। अतः इन्हें कच्ची ज़मीन पर ही बांधना पड़ता है।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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