सामुदायिक केंद्र पर ग्रामीणों का अवैध कब्ज़ा, पाथे जा रहे कंडे

सामुदायिक केंद्र पर ग्रामीणों का अवैध कब्ज़ा,  पाथे जा रहे कंडेबाराबंकी में फतेहपुर ब्लॉक के सफीपुर गाँव में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पाथे जा रहे कंडे।

अरुण मिश्रा- कम्यूनिटी रिपोर्टर

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नाम- अंकिता देवी

कक्षा-11, उम्र-16 वर्ष

स्कूल- सर्वोदय इंटर कॉलेज विशुनपुर, बाराबंकी

विशुनपुर (बाराबंकी)। गाँवों में सार्वजनिक समारोह के आयोजन, ग्राम्य विकास के लिए ग्रामीणों की बैठक के लिए बनवाए गए सामुदायिक केंद्र अवैध कब्जों के शिकार हो गए हैं। लोगों की सुविधा के लिए बनवाए गए यह भवन देखरेख में बरती जा रही उपेक्षा के चलते अपनी प्रासंगिकता खोते जा रहे हैं।

बाराबंकी जिला मुख्यालय से 23 किमी दूर फतेहपुर ब्लॉक के सफीपुर गाँव में लगभग चार वर्ष पूर्व सामुदायिक केंद्र का निर्माण हुआ था। सरकार की मंशा थी कि इस सामुदायिक केंद्र में सार्वजनिक समारोह का आयोजन होगा जिससे ग्रामीणों को सार्वजनिक समारोहों से सम्बंधित होने वाली दिक्कतों से निजात मिल सकेगी। इस प्रकार के सामुदायिक केन्द्रों में गाँव के सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं व गाँव के विकास से सम्बंधित बैठकों का भी आयोजन होता है, लेकिन लाखों रुपये खर्चकर बनवाए गए ये सामुदायिक केंद्र अपने उद्देश्य पर खरे नहीं उतर रहे हैं और ग्रामीण इन केन्द्रों पर अपना अवैध कब्ज़ा किए हुए हैं।

ग्रामीण फूलचंद्र यादव (38 वर्ष) बताते हैं, "चार साल पहले सफीपुर में सामुदायिक केंद्र का निर्माण कराया गया था जिसमें लाखों रुपये खर्च हुए थे, लेकिन जिस उद्देश्य के लिए इस सामुदायिक केंद्र का निर्माण हुआ। इससे हटकर इसमें कण्डे पाथे जा रहे हैं। सरकार ऐसे भवनों का निर्माण इसलिए करवाती है जिससे इन भवनों का प्रयोग ग्रामीण सार्वजनिक कार्य के लिए कर सके, लेकिन ग्रामीण सरकारी सम्पति का दुरुपयोग करते हैं। इससे कुछ ही बरसों के बाद ये भवन जर्जर हो जाते हैं और सरकार का लाखों रुपए बर्बाद हो जाता है।"

इसी गाँव के कृष्ण कुमार (45 वर्ष) बताते हैं कि सफीपुर गाँव में बना सामुदायिक केंद्र का गेट टूट गया है और ग्रामीण उसमें भूसा व कंडे रखते हैं। अभी तक इस केंद्र में एक भी बैठक नहीं हुई है। लाखों रुपये खर्चकर बनवाये गए सामुदायिक केंद्र ग्रामीणों के अवैध कब्जे का शिकार हैं। यदि प्रशासन ऐसे भवनों पर ध्यान दे दे तो इन्हें जर्जर होने से बचाया जा सकता है और सरकारी सम्पत्ति का सदुपयोग भी हो सकता है।"

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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