मदरसे में पढ़ाई के साथ बच्चों के हुनर को रहे निखार

मदरसे में पढ़ाई के साथ बच्चों के हुनर को रहे निखारमदरसे में लिफाफा बनाने सीखते बच्चे।

कम्यूनिटी जर्नलिस्ट: मुजिबुर रहमान

मदरसा अरबिया काशिफुल उलूम अहमदी टोला, कन्नौज

अहमदी (कन्नौज)। इन मदरसों में बच्चों को पढ़ाई के अलावा और भी कई तरह की गतिविधयों में शामिल कर तालीम दी जाती है। मदरसों में विभिन्न प्रकार की होने वाली गतिविधियों में भाग लेने से यहाँ के बच्चे बहुत खुश है। ये बच्चे किसी कान्वेंट या पब्लिक स्कूल में तो नहीं पढ़ते हैं, लेकिन इनको मिलने वाली शिक्षा किसी बड़े स्कूल से कम नहीं हैं।

बच्चों ने सीखा लिफाफा बनाना

कन्नौज जनपद में इस समय 200 मदरसे हैं, जहाँ पर पढ़ाई के अलावा समय-समय पर बच्चों को रोचक गतिविधियाँ में शामिल किया जाता है। मदरसा अरबिया काशिफुल उलूम अहमदी टोला में कक्षा 7 में पढ़ने वाली फलक (13 वर्ष) खुश होकर बताती हैं कि हमारे मदरसे में सर जी ने एक दिन पेपर से लिफाफा बनाना सिखाया। सातवीं कक्षा के 30 बच्चों ने पेपर से लिफाफे बनाना बहुत अच्छे से सीख लिया है। वो आगे बताती हैं कि हमारे द्वारा बनाये गये लिफाफे में स्कूल के जरूरी कागजात रखे जाते हैं।

हम नहीं करते पॉलिथीन का उपयोग

इसी मदरसे में सातवीं कक्षा में पढ़ने वाले रफीक बताते हैं कि हमारे गुरु जी कई तरह के खेल भी खिलवाते हैं। हम उन खेलों के माध्यम से हमें कई सारी चीजें सीखने को मिलती हैं। रफीक आगे बताते हैं कि पेपर से लिफाफे बनाने में हम दोस्तों को बहुत मजा आती है और इन लिफाफों के उपयोग से हम लोग पालीथिन का भी उपयोग नहीं करते हैं।

यह भी होती हैं गतिविधियां

कई मदरसों में कम्प्यूटर लैब से लेकर ज्यादातर सभी सुविधाएं मुहैया कराई गईं हैं। बदलते समय के साथ इन मदरसों की शिक्षा प्रणाली में बहुत सुधार हुआ है। बच्चों के अभिभावकों की सोच में परिवर्तन हुआ हैं। मदरसे के शिक्षक मुजिबुर रहमान का कहना है कि हमारे मदरसे में छात्र-छात्राओं को मुशायरा, मेहंदी प्रतियोगिता, खो-खो, कबड्डी, नात-दीनियात, नाटक, क्रिकेट जैसी तमाम तरह की गतिविधियाँ कराई जाती हैं, जिससे बच्चों का रुझान स्कूल आने की तरफ हमेशा बना रहता है। वो आगे बताते हैं कि शुरुआती दिनों में अभिभावक इस तरह गतिविधियों से नाराज होते थे, लेकिन अब पूरी तरह से सहयोग करते हैं।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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