आपका मन मोह लेंगी बिहार की लोक कलाओं को समेटे मधुबनी चित्रकला

आपका मन मोह लेंगी बिहार की लोक कलाओं को समेटे मधुबनी चित्रकलामधुबनी चित्रकला की एक कृति।

स्वयं प्रोजेक्ट

लखनऊ। मधुबनी चित्रकला मिथिलांचल क्षेत्र जैसे बिहार के दरभंगा, मधुबनी और नेपाल के कुछ क्षेत्रों की प्रमुख चित्रकला है। प्रारम्भ में रंगोली के रूप में रहने के बाद यह कला धीरे-धीरे आधुनिक रूप में कपड़ों, दीवारों एवं काग़ज़ पर उतर आई है। मिथिला की औरतों द्वारा शुरू की गई इस घरेलू चित्रकला को पुरुषों ने भी अपना लिया है।

चटकीले और विषम रंगों की आंकृतियां

मधुबनी चित्रकारी, जिसे मिथिला की कला (क्योंकि यह बिहार के मिथिला क्षेत्र में पनपी थी) भी कहा जाता है। इसकी विशेषता चटकीले और विषम रंगों से भरे गए रेखा-चित्र या आकृतियां हैं। इस तरह की चित्रकारी पारम्परिक रूप से इस प्रदेश की महिलाएं ही करती आ रही हैं, लेकिन आज इसकी बढ़ती हुई मांग को पूरा करने के लिए पुरूष भी इस कला से जुड़ गए हैं। ये चित्र अपने आदिवासी रूप और चटकीले और मटियाले रंगों के प्रयोग के कारण लोकप्रिय हैं।

प्रयोग होते हैं प्राकृतिक रंग

इस चित्रकारी में शिल्पकारों द्वारा तैयार किए गए खनिज रंजकों का प्रयोग किया जाता है। यह कार्य ताजी पुताई की गई अथवा कच्ची मिट्टी पर किया जाता है। काला रंग काजल और गोबर को मिश्रण से तैयार किया जाता है। वहीं, पीला रंग हल्दी अथवा पराग अथवा नींबू और बरगद की पत्तियों के दूध से, लाल रंग कुसुम के फूल के रस अथवा लाल चंदन की लकड़ी से, हरा रंग कठबेल (वुडसैल) वृक्ष की पत्तियों से, सफेद रंग चावल के चूर्ण से, संतरी रंग पलाश के फूलों से तैयार किया जाता है। रंगों का प्रयोग सपाट रूप से किया जाता है, जिन्हें न तो रंगत (शेड) दी जाती है और न ही कोई स्थान खाली छोड़ा जाता है।

प्रकृति और पौराणिक चित्रों का होता है समावेश

प्रकृति और पौराणिक गाथाओं के वही चित्र उभारे जाते हैं, जो इनकी शैली से मेल खाते हों। इन चित्रों में जिन प्रसंगों और डिजाइन का भरपूर चित्रण किया गया है, वे हिन्दू देवी-देवताओं से संबंधित हैं जैसे कि श्रीकृष्ण, श्रीराम, शिव, दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती, सूर्य और चन्द्रमा, तुलसी के पौधे, राजदरबारों के दृश्य, सामाजिक समारोह आदि। इसमें खाली स्थानों को भरने के लिए फूल-पत्तियों, पशुओं और पक्षियों के चित्रों, ज्यामितीय डिजाइनों का प्रयोग किया जाता है। यह हस्तकौशल एक पीढ़ी को सौंपती आई है, इसलिए इनके पारम्परिक डिजाइनों और नमूना का पूरी तरह से सुरक्षित रखा जाता है।

आमदनी का बेहतर साधन

कृषि के अलावा आमदनी का एक साधन बनाए रखने की दृष्टि से अखिल भारतीय हस्तशिल्प बोर्ड और भारत सरकार महिलाओं को हाथ से बने कागज़ पर अपनी पारम्परिक चित्रकारी करके उसे बाज़ार में बेचने के लिए प्रोत्साहित करते रहे हैं। मधुबनी चित्रकारी अनेक परिवारों की आमदनी का एक मुख्य साधन बन गया है। पूरे विश्व में इस कला के चलते बाजार मिथिला की महिलाओं की उपाय कुशलता के लिए एक प्रशस्ति है, जिन्होंने भित्तिचित्र की अपनी तकनीकियों का कागज़ पर चित्रकारी के लिए सफल प्रयोग किया है।

(स्रोत: राष्ट्रीय पोर्टल विषयवस्तु प्रबंधन दल)

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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