मैनपुरी के देवेन्द्र की जैविक खेती के चर्चे विदेशों तक, जापान, इंडोनिशया, थाइलैंड से रिसर्च फेलोशिप पर आ चुके हैं लोग

मैनपुरी के देवेन्द्र की जैविक खेती के चर्चे विदेशों तक, जापान, इंडोनिशया, थाइलैंड से रिसर्च फेलोशिप पर आ चुके हैं लोगथाईलैंड से आए बौद्ध दल ले गए केंचुआ खाद का ज्ञान

क्षमा त्रिपाठी

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

मैनपुरी। आजकल एक ओर जहां किसान ज्यादा उत्पादन के लोभ में फसलों में अधिक से अधिक रसायनिक उर्वरकों का प्रयोग कर रहे हैं, वहीं कुछ ऐसे किसान हैं जो पूर्ण रूप से जैविक खेती को अपनाकर सफल हो रहे हैं।

मैनपुरी जिले में बेबर विकासखंड के बढ़ेपुर गाँव के किसान देवेन्द्र सिंह शाक्य (50 वर्ष) जैविक खेती करते हैं और दूसरे किसानों को भी इसके गुर सिखा रहे हैं। वह बताते हैं, ‘हम जैविक खेती करने पर जोर दे रहे हैं, क्योंकि कीटनाशक रसायनों के प्रयोग से उपज भी नुकसानदायक होती है।’

देवेन्द्र की खेती देखने के लिए जापान, इंडोनिशया, थाइलैंड, के लोग रिसर्च फेलोशिप पर आ चुके हैं। थाईलैंड से आए बौद्ध दल ने देवेन्द्र से जैविक उर्वरक खेती की जानकारी ली। दल ने वर्मी कंपोस्ट खाद का नमूना लिया और इसमें प्रयोग होने वाले केंचुओं को अपने साथ भी ले गए।

देवेन्द्र के खेत में आए बौद्ध दल ने कहा, ‘सभी देशों में अंधाधुध रासायनिक खेती को सीमित कर इसके दुष्प्रभाव पर चर्चा होनी चाहिए। फेफड़े, किडनी और दिल संबधी कई बीमारियों के लिए ये रासायनिक उर्वरक काफी हद तक जिम्मेदार है। जैविक खेती से न केवल मानव जाति के लिए फायदेमंद है वरना जमीन भी उपजाऊ बनी रहती है।’

हम जैविक खेती करने पर जोर दे रहे हैं, क्योंकि कीटनाशक रसायनों के प्रयोग से उपज भी नुकसानदायक होती है।
देवेन्द्र सिंह शाक्य, किसान

सरकार कर चुकी है देवेन्द्र को सम्मानित

दल ने रासायनिक उर्वरक रहित खेती, जैविक खादों के प्रयोग से तैयार विभिन्न शाक–सब्जी और फूलों की खेती को देखकर कहा कि केवल भारत में ही नहीं पूरे दुनिया में जैविक खेती को बढ़ावा मिलना चाहिए। देवेन्द्र को प्रदेश स्तर पर आधा किग्रा का आलू के उत्पादन पर लखनऊ में राजभवन में आयोजित प्रादेशिक शाक भाजी प्रदर्शनी में भी सम्मानित किया गया है।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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