गंगा को बचाने के लिए ओडियन और आबूनालों पर लगेंगे एसटीपी, एनजीटी का फैसला

Sundar ChandelSundar Chandel   20 Sep 2017 6:06 PM GMT

गंगा को बचाने के लिए ओडियन और आबूनालों पर लगेंगे एसटीपी, एनजीटी का फैसलामेरठ के एक नाले कि तस्वीर 

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

मेरठ। प्रदूषित हो रही गंगा और काली नदी को बचाने के लिए शहर के दो बड़े नालों पर एसटीपी प्लांट लगाया जाएगा, जिसका खाका तैयार कर लिया गया है। एनजीटी के निर्देश के बाद केन्द्रीय व क्षेत्रीय प्रदूषण बोर्ड व जल निगम ने इसका प्रस्ताव बनाकर भेज दिया है। इस काम में विभागों का काम आसान करने के लिए नेशनल मिशन क्लीन गंगा की टीम को भी लगाया गया है।

गाँव अंतवाड़ा से कन्नौज तक पहुंचती है काली नदी

प्रधानमंत्री के नमामि गंगे प्रोजेक्ट को देखते हुए गंगा में बढ़ रहे प्रदूषण की रोकथाम के लिए काम किया जा रहा है। मुजफ्फरनगर के अंतवाडा गाँव से निकली काली नदी कन्नौज के पास जाकर गंगा में मिल रही है। शहर के आबू और ओडियन नाले के माध्यम से निकल रहा प्रदूषित पानी काली नदी के माध्यम से गंगा तक पहुंच रहा है। पानी में प्रदूषण की मात्रा भी हर साल बढ़ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए एनजीटी ने गंगा को साफ करने के लिए प्रदूषण बोर्ड व जल निगम को नालों का निरीक्षण करने को कहा था।

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बड़ा एसटीपी प्लांट लगाने के निर्देश

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मिली जानकारी के अनुसार एनजीटी ने दोनों नालों के बीच में एक बड़ा एसटीपी प्लांट लगाने का फैंसला लिया है। ताकि पानी को साफ कर नदी में डाला जा सके। इसके लिए पूरा ब्लू प्रिंट तैयार कर लिया गया है। आने वाले कुछ ही दिनों में इस पर काम शुरू हो जाएगा।

“एनजीटी ने गंगा को प्रदूषण से बचाने के लिए काली नदी में जा रहे शहर के दो बड़े नालों पर एसटीपी लगाने के लिए निर्देश दिए हैं। इसके लिए टीम ने नालों के निरीक्षण का पूरा प्रोजेक्ट तैयार कर लिया है। एनजीटी को रिपोर्ट देकर इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा। एसटीपी के लगने से जहां एक ओर पानी में शुद्धता दिखाई देगी, वहीं आस-पास के गाँवों का पानी भी कहीं हद तक ठीक हो जाएगा।”
आरके त्यागी, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी

इस कारण बढ़ रही प्रदूषण की मात्रा

अपना अस्तित्व खो चुकी काली नदी खतौली क्षेत्र के गाँव अंतवाड़ा से निकलकर मेरठ, हापुड़, गाजियाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ़ से होती हुई कन्नौज में जाकर गंगा में विलय हो जाती है। काली नदी में इन दर्जनभर जनपदों के शहर का प्रदूषित पानी और औद्योगिक इकाईयों का प्रदूषित उत्प्रवाह काली नदी तक पहुंचता है। जिस कारण प्रदूषण की मात्रा दिन-प्रतिदिन बढ़ती जाती है।

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इन गाँवों का पानी हो चुका है जहरीला

इसी काली नदी के किनारे पड़ने वाले गोकलपुर, फफूंडा, सरायकाजी, शिव शक्तिनगर, सहित करीब सैकड़ों गाँवों का पानी जहरीला हो चुका है। नलों से निकलने वाले पानी में खाना बनाना तक मुश्किल रहता है। ग्रामीणों की शिकायत व अन्य समस्याओं को देखते हुए ही एनजीटी ने एसटीपी प्लांट लगाने की योजना तैयार की है।

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