डेंगू ने हेल्थ विभाग की बढ़ाई धड़कनें, मेरठ में मरीजों की संख्या 200 पार

डेंगू ने हेल्थ विभाग की बढ़ाई धड़कनें, मेरठ में मरीजों की संख्या 200 पारफोटो: इंटरनेट 

तरूण अग्रवाल

स्वयं कम्युनिटी जर्नलिस्ट

माछरा (मेरठ)। स्वाइन फ्लू तो रूक गया, लेकिन डेंगू के मच्छर लगातार हमलावर हो रहे हैं। मेडिकल कालेज की माइक्रोयोलॉजी लैब की रिपोर्ट के बाद हेल्थ विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। शुक्रवार को मेरठ में 22 नए मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है। इस सीजन में कुल 203 मरीज डेंगू के मिल चुके हैं। इनमें देहात क्षेत्र के 55 और शहरी क्षेत्र के 148 मरीज शमिल हैं।

कैसे और कब होता है डेंगू

जिला मलेरिया अधिकारी योगेश सारस्वत बताते हैं, "डेंगू मादा एडीज इजिप्टी मच्छर के काटने से होता है। इन मच्छरों के शरीर पर चीते जैसी धारियां होती हैं। ये मच्छर दिन में खासकर सुबह के समय काटते हैं। डेंगू बरसात के मौसम और उसके तत्काल बाद अगस्त से अक्टूबर तक अधिक फैलता है। क्योंकि इस मौसम में मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां होती हैं। साथ ही एडीज इजिप्टी मच्छर ज्यादा उंचाई तक नहीं उड़ पाता।"

कैसे फैलता है

उन्होंने विस्तार से बताया कि डेंगू बुखार से पीड़ित मरीज के खून में वायरस बहुत ज्यादा मात्रा में होता है। जब कोई एडीज मच्छर डेंगू के किसी मरीज को काटता है, तो वह उस मरीज का खून चूसता है। खून के साथ डेंगू वायरस भी मच्छर के शरीर में चला जाता है। जब डेंगू वायरस वाला मच्छर किसी और इंसान को काटता है, तो वह संबंधित के खून में चला जाता है। ऐसे ही डेंगू वायरस एक से दो, दो से चार को फैलता चला जाता है। मच्छर के काटने के तीन से पांच दिनों के बाद मरीज में डेंगू बुखार के लक्षण दिखने लगते हैं। शरीर में बीमारी पनपने की मियाद 3 से 10 दिनों की भी हो सकती है।

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कितने तरह के होते है डेंगू

डॉ योगेश बताते हैं कि डेंगू तीन तरह का होता है-

  • क्लासिकल, साधारण डेंगू बुखार
  • डेंगू हैमरेजिक बुखार
  • डेंगू शॉक सिंड्रोम

इन तीनों में दूसरे और तीसरे तरह का डेंगू सबसे ज्यादा खतरनाक होता है। साधारण डेंगू बुखार अपने आप ठीक हो जाता है। साथ ही इससे जान जाने का खतरा नहीं होता। अगर यदि किसी को हैमरेजिक या शॉक का वायरस है, तो इलाज में कोताई बरतने पर जान जा सकती है। इसलिए यह पहचान सबसे जरूरी है कि बुखार साधारण डेंगू है या दूसरे व तीसरे नंबर का।

ये हैं मुख्य लक्षण

क्लासिकल या साधारण डेंगू बूखार के लक्षण

  • ठंड लगने के बाद अचानक तेज बुखार चढ़ना
  • सर ,मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होना
  • आंखों के पिछले हिस्से में दर्द होना
  • बहुत ज्यादा कमजोरी लगना और भूख न लगना
  • गले में हल्का सा दर्द होना
  • शरीर खासकर चेहरे, गर्दन और छाती पर लाल ,गुलाबी रंग के रैशेज होना

हैमरेजिक बुखार के लक्षण

  • नाक और मसूढों से खून आना
  • शौच या उल्टी में खून आना
  • स्किन पर गहरे नीले और काले रंग के चक्कते पड़ जाना
  • अगर साधारण डेंगू बुखार के साथ ये लक्षण भी दिखाई दें तो तत्काल दोबारा ब्लड टेस्ट कराकर अच्छे डॉक्टर से उपचार शुरू कराएं

डेंगू शॉक सिंड्रोम

डॉ. अनिरूद्ध बताते हैं कि मरीज बहुत बेचैन हो जाता है, साथ ही तेज बुखार के बावजूद भी उसकी बॉडी ठंडी महसूस होती है। मरीज धीरे-धीरे होश खोने लगता है, मरीज की नाड़ी कभी धीमी और कभी तेज चलने लगती है। साथ ही ब्लड प्रेशर लो हो जाता है।

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“पिछले दिनों चार दिन की छुट्टी रही, जिस कारण फॉगिंग और एंटी लार्वा स्प्रे नहीं हो पाया। इससे डेंगू के मरीज बढ गए। डेंगू का प्रकोप खत्म करने के लिए मलेरिया विभाग ने कचहरी, फूल बाग कलोनी, रोहटा रोड़, सहित दर्जनभर स्थानों पर फॉगिंग और एंटी लार्वा का स्प्रे किया है। अभियान पूरे अक्टूबर चलेगा।
डॉ. राजकुमार चौधरी,सीएमओ

प्लेटलेट्स की भूमिका

आमतौर पर तंदरूस्त आदमी के शरीर में डेढ से दो लाख प्लेटलेट्स होते हैं। प्लेटलेट्स बॉडी की ब्लीडिंग रोकने का काम करती हैं। यदि प्लेटलेट्स एक लाख से कम रह जाएं तो इसकी वजह डेंगू हो सकता है। ये जरूरी नहीं है जिसकी प्लेटलेट्स कम हो उसे डेंगू ही हो, साथ ही यदि प्लेटलेट्स 20 हजार या उससे कम पहुंच जाएं तो चढाने की तत्काल आवश्यकता होती है।

बच्चों में ज्यादा खतरा

डॉक्टर बताते हैं कि बच्चों का इम्युन सिस्टम ज्यादा कमजोर होता है, साथ ही वे खुले में ज्यादा रहते हैं। इसलिए उनके प्रति सचेत रहने की ज्यादा जरूरत है। परेंट्स के साथ बच्चों को स्वयं भी ध्यान रखना चाहिए कि आजकल के मौसम में कुछ चीज़ों का ध्यान रखें|

  • पूरे कपड़े पहनकर जाएं, डॉ. वैभव ने बच्चों को दिए जरूरी टिप्स
  • घर से बाहर जाते समय पूरे कपड़े पहने
  • जहां खेलते हों वहां आस-पास गंदा पानी जमा न हो
  • स्कूल में यदि मच्छर पनप रहे हैं तो उसकी शिकायत करनी चहिए, साथ ही स्कूल प्रशासन को भी ध्यान रखना चाहिए
  • बहुत छोटे बच्चे बीमारी के बारे में बता नहीं पाते, इसके लिए यदि बच्चा ज्यादा देर तक रोए जा रहा हो, सोए जा रहा हो, बेचैन हो और उसको तेज बुखार हो, शरीर पर रैसेज हो, उल्टी हो तो फोरन डॉक्टर को दिखाएं।
  • गड्ढों में मिट्टी भर दें, अगर पानी रोकना मुमकिन नहीं हो तो उसमें पेट्रोल या कैरोसिन ऑयल डालें।
  • कूलरों, फूलदानों व पक्षियों के पानी को रोज बदलें।
  • डेंगू का मच्छर साफ पानी में पनपता है, इसलिए पानी की टंकी को पूरी तरह से बंद करके रखें।
  • घर के सभी कोनों में एक बार मच्छर नाशक दवा का छिड़काव जरूर करें।
  • हल्के गर्म पानी में नहाएं
  • तरल पदार्थ खूब खाएं, शरीर में पानी की कमी न होने दें
  • ये बरतें सावधानियां

साथ ही इस मौसम में ठंडा पानी न पीएं, मैदा और बासी खाना न खाएं, खाने में अजवाइन, अदरक, हींग, अदरक का इस्तेमाल करें। इस मौसम में पत्ते वाली सब्जियां अरबी फूल गोभी से परहेज करें। हल्का खाना खांए, पूरी नींद लें, खूब पानी पीएं, साथ ही पानी को उबालकर पीए, मिर्च मसाला और तले हुए खाने से परहेज करें। छाछ नारियल पानी आदि पीएं।

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