अब ग्रामीणों की सहमति के बाद ही प्रधान करा सकेंगे विकास कार्य

अब ग्रामीणों की सहमति के बाद ही प्रधान करा सकेंगे विकास कार्यरायबरेली जिले के बछरावां ब्लॉक के मदाखेड़ा गाँव में खुली बैठक में चर्चा करते लोग।

किशन कुमार - कम्यूनिटी जर्नलिस्ट

रायबरेली। जिले के बछरावां ब्लॉक के मदाखेड़ा गाँव में रहने वाले हरिचरण सिंह (50 वर्ष) ने हाल ही में GPDP योजना की मदद से अपने गाँव में कच्चा खड़ंजा हटवाकर सीसी सड़क बनवाई है। हरिचरण ने सीसी सड़क की बात पंचायत की खुली बैठक में रखी थी, जिसके बाद प्रधान के आदेश गाँवों वालों की रज़ामंदी के बाद सड़क बनवाई गई है।

हरिचरण सिंह बताते हैं, ''गाँव में प्रधान और पंचायती विभाग के अधिकारियों की मदद से एक बैठक बुलाई गई थी, जिसमें ग्रामीण भी शामिल हुए। बैठक में जर्जर पंचायत भवन और सीसी रोड की मांग रखी गई, जिसपर काम करवाने के लिए अधिकारियों ने प्रधान को तुरंत आदेश दे दिए।''

जिले में पंचायती राज विभाग ने ग्राम पंचायतों में वित्तीय वर्ष 2016-17 की वार्षिक और पंचवर्षीय योजना को नए तरीके से तैयार करने की पहल शुरू कर दी है। इसका नाम ग्राम पंचायत डेवलपमेंट प्लान GPDP रखा गया है। GPDP योजना में जिले में प्रत्येक 10 ग्राम पंचायतों को मिलाकर एक क्लस्टर बनाया गया है। हर क्लस्टर स्तर पर चार्ज प्रभारी की नियुक्ति की गई है, जो BDO, ADO और अन्य विभागों के अधिकारी हैं। इनका प्रशिक्षण कराया जा चुका है अब ये चार्जप्रभारी पंचायत स्तर पर ग्रामीणों को विकास योजनाएं बनाने का प्रशिक्षण दे रहे हैं।

इस पहल के बारे में जिला पंचायत राज अधिकारी संजय यादव बताते हैं, "ग्राम पंचायत डेवलपमेंट प्लान GPDP में ग्रामसभा की खुली बैठक में गाँव की आवश्यकताओं के हिसाब से प्रथमिकताएं तय करके योजनाएं बनाई जाती हैं, जिसमें ग्रामीणों की राय शामिल होती है और उनकी सहमति के बाद ही कोई काम पास होता है।''

जिला पंचायतीराज विभाग की मदद से मिले आंकड़ों के मुताबिक वर्तमान में जीपीडीपी योजना जिले में 18 ब्लॉकों में 100 से ज़्यादा गाँवों में संचालित की जा चुकी है। बछरावां ब्लॉक में अभी तक अकेले 17 गाँवों में यह बैठकें आयोजित हो चुकी हैं।

''GPDP में सिंचाई, ग्रामविकास, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, जल और बिजली जैसे 17 विभागों का समन्वय किया गया है। इसमें आबादी, जातिगत बसाहट, मूलभूत जरूरतों जैसे शौचालय, जल निकासी, शिक्षा बिजली, पानी जैसे कामों को शामिल किया गया है। GPDP से पंचायतों के विकास कार्यों में पारदर्शिताएं, सहभागिता और कुशलता आएगी।'' पंचायत राज अधिकारी संजय यादव आगे बताते हैं।

अभी तक सरकारी योजना, अक्सर शासन से बनकर आती थी और कई बार गाँव की जरूरत के हिसाब से वह ग्रामीणों के लिए लाभदायक नहीं बन पाती थी। ग्रामप्रधान और ग्राम सचिव अपने आपसी समझ से काम शुरू करवा देते थे और योजना निर्माण का काम कागजी तौर पर ही रह जाता था पर अब 'मेरा गाँव मेरी योजना' का उद्देश्य लिए GPDP योजना की मदद से गाँव वाले अपनी जरूरत के हिसाब से अपनी राय देकर योजना में प्रतिभाग कर सकेंगे।


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