गाँव में बिजली के खंभे और ट्रांसफार्मर भी लगे, फिर भी नहीं आई बिजली

गाँव में बिजली के खंभे और ट्रांसफार्मर भी लगे, फिर भी नहीं आई बिजलीगाँव में लगे बिजली के खंंभे।

कम्यूनिटी जनर्लिस्ट: विष्णु तिवारी

घोरावल (सोनभद्र)। आज के समय में बिजली लोगों की मूलभूत आवश्यकता है। ऐसे में आज भी सोनभद्र जिले में बहुत से ऐसे गाँव हैं, जहां के लोग इस मूलभूत आवश्यकताओं से वंचित हैं। घोरावल तहसील के भरकना ग्राम के चनवा, भगाही और कोनहर के अलावा पेड़ गाँव और उसके आस-पास के गाँवों के साथ-साथ मुगेहरी के कुछ गाँव में आज भी लोग ढीबरी और दिये के सहारे अपनी रात गुजारने को बेबस हैं।

तीन साल पहले लगे थे बिजली के खंभे

जिला मुख्यालस से 40 किमी दूर घोरावल ब्लॉक के ग्राम मुगेहरी गाँव में आज से लगभग दो से तीन साल पहले बिजली के खंभे लगाए गए थे, लेकिन बिजली सप्लाई न होने से आज भी बहुत से परिवार ढिबरी की लौ में अपनी जिन्दगी काटने पर विवश है। मुगेहरी ग्राम पंचायत के अंतर्गत केवलीमय देवली में एक गाँव की नई बस्ती है, जहां के निवासी आज भी विद्युत जैसी मूलभूत आवश्यकताओं से वंचित हैं।

मगर फिर भी नहीं आती है बिजली

आश्चर्य की बात यह है कि यह गाँव घोरावल बाजार से मात्र दो किलो मीटर की दूरी पर है, और तो और केवली ग्राम सभा में 32 केवीएस का विघुत उपकेन्द्र लगा है, जहां से आस-पास के क्षेत्रों में विद्युत सप्लाई होती है। बताते चलें कि लगभग 2003-04 के आस-पास नक्सल प्रभावित गाँव होने के नाते इस गाँव में विद्युतीकरण का कार्य किया गया। लगभग 25 बिजली के खंभे लगाए गये। साथ ही तीन ट्रांसफार्मर जिसमें दो 10 केवी का और एक 25 केवी का लगाया गया। विद्युतीकण के नाम पर लाखों रुपया खर्च होने के बावजूद गाँव वालों को विद्युत व्यवस्था नहीं मिल पा रही है।

क्या कहते हैं ग्रामीण

यहां के निवासी अजय कुमार तिवारी (45 वर्ष) बताते हैं, "आज की तारीख में विद्युत विभाग ने दो वर्ष पहले लगाए गए तीन ट्रांसफार्मर में दो ट्रांसफार्मर निकाल कर दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया। लाइट न आने के कारण कुछ खंभे जमींदोज हो गये हैं तो कुछ से तार गायब हो गये हैं।"

कई बार की गई शिकायत मगर...

इस समस्या से गाँव वालों ने वर्तमान विधायक और विद्युत विभाग के अधिकारियों को अवगत कराया, लेकिन इनके द्वारा हमेशा ही उचित कार्यवाही का बात करके गाँव वालों की समस्याओं को नकार दिया गया। इसी गाँव के सूरज जायसवाल (58 वर्ष) बताते हैं, "बिजली व्यवस्था न होने से बच्चों की पढ़ाई बाधित होती है और तो औैर चोरी की भी वारदात भी कई बार हो चुकी है। खेती के लिए विद्युत व्यवस्था न होने से जनरेटर के इस्तेमाल से पैसे की बर्बादी होती है।" वहीं, आनंद बताते हैं, "बिजली न होने से बारिश के दिनों में तमाम प्रकार के जानवरों द्वारा आये दिन लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जिसके कारण गाँव के लोगों मे भय का माहौल बना रहता है। इसकी शिकायत ग्राम प्रधान से भी करने पर कोई फायदा नहीं हुआ है। प्रधान को इससे कोई सरोकार नहीं है। हालांकि ग्रामीणों द्वारा इसकी शिकायत तहसील दिवस पर भी की जा चुकी है, लेकिन अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हो पायी है।"

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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