फ़सल बीमा की हक़ीकत: जानकारी के अभाव और नोटबंदी के चलते हजारों किसान नहीं करा सके पंजीकरण

फ़सल बीमा की हक़ीकत:  जानकारी के अभाव और नोटबंदी के चलते हजारों किसान नहीं करा सके पंजीकरणफसल बीमा योजना में रबी के सीजन के लिए पंजीकरण की आखिरी तारीख 31 दिसंबर है। 

नीतू सिंह, स्वयं प्रोजेक्ट

लखनऊ। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में पंजीकरण की आखिरी तिथि 31 दिसंबर है, लेकिन देश के लाखों किसान इस योजना से ही बेखबर है। यूपी में हजारों किसान जानकारी के अभाव में योजना के लिए पंजीकरण नहीं करवा सके हैं।

ई योजना को बारे मां हम काउ से सुनौ नाहीं हैं, गांव में आईस कौनो आदमी नाही हैं जेखेर पंजीकरण भा होए।
मिथलेश शुक्ला (55 वर्ष), महिला किसान, कानपुर देहात, यूपी

संसद भवन से करीब 500 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश में कानपुर देहात जिले में रहने वाली महिला किसान मिथलेश शुक्ला (55 वर्ष) नहीं जानती की फसल बीमा योजना क्या है और वो कैसे इसका फायदा उठा सकती हैं। मक्का से लेकर धान तक की खेती अपने बूते पर करने वाली मिथिलेश बताती हैं, “ई योजना को बारे मां हम काउ से सुनौ नाहीं हैं, गांव में आईस कौनो आदमी नाही हैं जेखेर पंजीकरण भा होए।” सिर्फ मिथिलेश ही नहीं यूपी के हजारों ग्रामीणों को योजना के बारे में जानकारी नहीं है। 2-8 दिसंबर 2016 तक चले देश के सबसे बड़े ग्रामीण उत्सव स्वयं फेस्टिवल के दौरान गांव कनेक्शन ने करीब 4 लाख लोगों से बात की थी, जिसमें से अधिकांश किसान थे, जिन्हें योजना को लेकर कुछ को जानकारी नहीं थी तो तमाम किसान ये नहीं जानते थे कि उन्हें योजना का लाभ कैसे मिलेगा। खरीफ के सीजन में जानकारी न होने से चूके किसान रबी की सीजन में इसलिए भी बीमा नहीं करा पाए क्योंकि नोटबंदी के चलते बैंकों में इतनी भीड़ है कि बैंक से कोई मदद नहीं मिली।

31 दिसंबर इस योजना की आखिरी तारीख है जबकि सम्बंधित बीमा कम्पनी को अभी तक बैंकों ने कोई जानकारी नहीं भेजी है।
अजेन्द्र सिंह, कृषि विभाग रायबरेली

दैवीय आपदा या फिर कीटों से फसल के नुकसान होने पर किसानों को जोखिम कम करने के लिए एनडीए सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शुरु की थी। पीएम कार्यालय के अनुसार पीएमएफबीवाई के तहत 366.64 लाख किसान (26.50 प्रतिशत) आ चुके हैं और इस दर के आधार पर 2016-17 में खरीफ और रबी दोनों सीजन के लिए 30 प्रतिशत का निर्धारित लक्ष्य पार होने की संभावना है। इसके तहत कुल 388.62 लाख हेक्टेयर रकबा आया और 141339 करोड़ रुपए की राशि का बीमा हुआ।

पीएमओ के अनुसार गैर-ऋणी किसानों की कवरेज के रूप में 6 गुना से भी अधिक की भारी बढ़ोत्तरी हुई है, जहां खरीफ 2015 में यह संख्या 14.88 लाख थी, वहीं खरीफ 2016 में बढ़कर 102.6 लाख हो गई। जो यह दर्शाती है कि इस योजना को गैर-ऋणी किसानों ने भी अच्छी तरह से अपनाया है। हालांकि धरातल पर स्थितियां ये हैं कि प्रदेश के अधिकतर किसानों को इस योजना की जानकारी तक नहीं है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसान के खाते में सीधे पैसा आना था, ताकि किसानों को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ें लेकिन ऐसा भी नहीं है। फार्म भरने में ही किसानों को खासी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे किसानों की नोटबंदी ने और मुसीबत बढ़ा दी। उत्तर प्रदेश में ही रायबरेली जिले के हरचंदपुर गाँव के किसान रामदीन का कहना है, “बीमा कराने के लिए कई बार बैंक गया लेकिन वो लोग (बैंक के अधिकारी) कोई न कोई बहाना बना कर टाल रहे हैं।”
खुद बैंक और कृषि विभाग के अधिकारी भी दबे शब्दों में मानते हैं कि योजना का सही तरीके से प्रचार-प्रसार नहीं हुआ। रायबरेली जिले में फसल बीमा योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभालने वाले कृषि विभाग के अधिकारी अजेंद्र सिंह बताते हैं, योजना की आखिरी तारीख 31 दिसंबर है लेकिन हमारे जिले में बीमा कंपनी ने संबंधित बैंकों को इसकी जानकारी ही नहीं दी है। सुनने में आ रहा है कि पंजीकरण की तारीख 15 दिन बढ़ा दी गई, हालांकि अभी इसकी लिखित जानकारी नहीं आई है।”

नोटबंदी के कारण पूरे दिन बैंक में भीड़ लगी रहती है जिससे बैंक के कर्मचारी हमारे काम में सहयोग नहीं कर पा रहे हैं। इस योजना में चंद दिन ही शेष है जबकि बैंकों में अभी इसकी शुरुआत ही नहीं हुई है।
कृष्ण कुमार सिंह, फसल बीमा योजना, जिला समन्यवक, औरैया

औरैया में फसल बीमा योजना के जिला समन्यवक कृष्ण कुमार सिंह ने गांव कनेक्शऩ को बताया, “ बैंकों का सहयोग न मिलने से इस योजना की रफ़्तार बहुत धीमी चल रही है। नोटबंदी के कारण पूरे दिन बैंक में भीड़ लगी रहती है जिससे बैंक के कर्मचारी हमारे काम में सहयोग नहीं कर पा रहे हैं। बैंकों में अभी इसकी शुरुआत ही नहीं हुई है।

“साल में किसानों की फसलों का दो बार बीमा होता है एक तो खरीफ फसल में और दूसरा रवी की फसल में। इस वर्ष (2016 -17) की खरीफ फसल में कुल 59,905 किसानों की फसलों का बीमा किया गया था जबकि ये आंकड़ा वर्ष 2015-16 में 36,976 ही था।
एसपी सिंह, उपकृषि निदेशक, बाराबंकी

कृषि और संबंधित अधिकारियों का कहना है योजना से लाखों किसानों को अब तक जोड़ा जा चुका है। यूपी के कृषि प्रधान जिले बाराबंकी में कृषि उपनिदेशक डॉ. एसपी सिंह बताते हैं, “साल में किसानों की फसलों का दो बार बीमा होता है एक तो खरीफ फसल में और दूसरा रवी की फसल में। इस वर्ष (2016 -17) की खरीफ फसल में कुल 59,905 किसानों की फसलों का बीमा किया गया था जबकि ये आंकड़ा वर्ष 2015-16 में 36,976 ही था।”

पिछले वर्ष बारिश और ओले गिरने से हजारों एकड़ फसल हो गई थी चौपट।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए यूपी में जवाबदेह बीमा कंपनी एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया, लखनऊ का अपना तर्क है। कंपनी की उप प्रबंधक अनुमपा ठाकुर बतातीं हैं, “यूपी के 69 जिलों में इस योजना का काम चल रहा है। ये योजना क्षेत्रीय आधार पर अधिसूचित ग्राम पंचायत के हिसाब से होती है। अधिसूचना राज्य सरकार निर्धारित करती है। हमारी कोशिश है ज्यादा से ज्यादा किसान इसका लाभ लें सकें। ”

यूपी के 69 जिलों में इस योजना का काम चल रहा है। ये योजना क्षेत्रीय आधार पर अधिसूचित ग्राम पंचायत के हिसाब से होती है। अधिसूचना राज्य सरकार निर्धारित करती है। अगर इसकी पंजीकरण तिथि बढ़ती है तो किसानों को बहुत फायदा होगा।
उप प्रबंधक अनुमपा ठाकुर, एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया, लखनऊ

क्रेडिट कार्ड वाले किसानों को सीधा लाभ

फसल बीमा की राह में किसानों के आगे जानकारी न होने के साथ-साथ कई दूसरे रोडे भी हैं। जिन किसानों की जमीन उनके नाम नहीं है उनके लिए काफी समस्या है। सीतापुर के कटिया कृषि विज्ञान केंद्र के फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. दयाशंकर श्रीवास्तव भी मानते हैं कि योजना से संबंधित प्रारंभिक जानकारी लोगों तक नहीं पहुंचने से लाखों किसान इससे वंचित हैं। वो बताते हैं, “ जिन किसानों का किसान क्रेडिट कार्ड बना है उनका पंजीकरण सीधे हो जाता है, मुश्किल उन किसानों के लिए है जिनका अभी तक किसान क्रेडिट कार्ड नहीं बना है। जिन किसानो की खसरा-खतौनी उनके खुद के नाम नहीं है उनके पंजीकरण में बहुत मुश्किल आ रही है। जानकारी न होने से किसान इसका लाभ नहीं ले पा रहे हैं।”

क्या है योजना का लाभ

इस योजना की खास बात ये है कि किसान को अधिसूचित फसल के हिसाब से केवल दो प्रतिशत ही प्रीमियम राशि देनी होगी। योजना के अंतर्गत खरीफ में धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, उर्द, मूंग, मूंगफली, तिल, सोयाबीन, अरहर व गन्ना की फसलों पर लाभ मिलेगा। रबी में गेहूं, चना, मटर, मसूर, लाही, सरसों व आलू आदि फसलों पर इसका लाभ मिलेगा।

19 हजार करोड़ रुपये की है जरुरत

देश के 6 लाख से ज्यादा गांवों में रहने वाले करोड़ों किसानों के लिए प्रधानमंत्री ने 13 जनवरी 2016 को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की शुरुआत की थी। इस वित्तीय वर्ष में योजना के लिए बजट 5 हजार 500 करोड़ निर्धारित किया गया है जबकि 19 हजार करोड़ बजट की जरूरत है।

इनपुट-बाराबंकी से सतीष कश्यप, सीतापुर से दिवेंद्र सिंह, कन्नौज से अजय मिश्रा, रायबरेली से किशऩ कुमार।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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