प्रसूताओं को नहीं मिल पाता जननी सुरक्षा योजना का लाभ

प्रसूताओं को नहीं मिल पाता जननी सुरक्षा योजना का लाभप्रतीकात्मक फोटो (साभार: गूगल)।

स्वयं प्रोजेक्ट

शाहजहांपुर। आशा कार्यकत्री रीता सिंह (39 वर्ष) को सरकारी नियम के अनुसार प्रत्येक प्रसव पर निर्धारित धनराशि (600 रुपए) मिलने चाहिए, लेकिन प्रसूता महिलाओं का बैंक खाता न होने के कारण न तो महिलाओं को सरकारी योजना के तहत आर्थिक लाभ मिल सका और न ही रीता को उसकी मेहनत की कमाई।

खुद जाकर खुलवाया बैंक खाता

“इस साल मैंने अस्पताल में 25 प्रसव कराए हैं, लेकिन उसमें से केवल 21 प्रसव का ही पैसा मिला पाया है। जिनका पैसा मिला है, उनका भी मैंने खुद जाकर खाता खुलवाया है। गर्भवती की शुरुआत से जांच से लेकर उसके प्रसव तक देखभाल करनी होती है, जिसके लिए 600 रुपए मिलते हैं, वो भी बहुत मुश्किल से।” रीता शाहजहांपुर जिले से लगभग 25 किलोमीटर दूर ददरौल ब्लॉक के किरयाहीर गाँव में रहती हैं।

पहले दिया जाता था चेक

भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के द्वारा वर्ष 2005 में जननी सुरक्षा योजना की शुरुआत की गई थी। इस योजना के तहत महिलाओं को संस्थागत प्रसूति कराने के लिए 1400 रुपए की आर्थिक सहायता की जाती है। इसके साथ-साथ आशा कार्यकत्री को एक सुरक्षित प्रसव कराने के लिए 600 रुपए मिलते हैं। पहले यह राशि चेक के माध्यम से दी जाती दी थी, लेकिन अब प्रसूताओं के बैंक खाते में ये सहायता राशि दी जाती है। जब से बैंक खाते में सहायता राशि दी जाने लगी है, लोगों की परेशानियां बढ़ गयी हैं।

नहीं मिलता योजना का लाभ

प्रतापगढ़ जिला मुख्यालय से लगभग 23 किमी दूर उत्तर दिशा में संडवा चंद्रिका ब्लॉक के कोल बझान गांव की रमा के प्रसव के एक महीने से ज्यादा हो गए, मगर अब तक उन्हें जननी सुरक्षा योजना का लाभ नहीं मिला। संडवा गद्रिका ब्लॉक के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, किशुनगंज में 200 से ज्यादा महिलाओं को अभी योजना का लाभ नहीं मिल पाया। साथ ही यहां की आशा कार्यकत्रियों का आरोप है कि उनसे पैसे मांगे जाते हैं, तब जाकर उन्हें जननी सुरक्षा योजना के साथ ही दूसरी योजनाओं से मिलने वाला पैसा दिया जाता है।

हमें नहीं मिलते पैसे

प्रतापगढ़ जिले के मानधाता ब्लॉक के बाबापट्टी गांव की आशा बहु माधुरी सिंह बताती हैं, हम लोग इतनी मेहनत करते हैं, फिर भी हमें समय पर पैसे नहीं मिलते। गर्भवर्ती महिलाओं का सुरक्षित प्रसव करवाया, उनका भी पैसा नहीं मिल रहा है। वो हमसे कहती हैं कि आप की वजह से हमको पैसे नहीं मिल रहे हैं।

मात्र 46 प्रतिशत ने ही उठाया लाभ

भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2010 से 2015 के दौरान जननी सुरक्षा योजना के लिए 2380.11 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया। लेकिन जानकारी के अभाव में सरकार इस योजना में केवल 2196.56 करोड़ रुपए ही खर्च पायी। वर्ष 2010 से 2015 की अवधि में उत्तर प्रदेश में संस्थागत प्रसव के लिए करीब 266.01 लाख पंजीकृत गर्भवती महिलाओं में से मात्र 123.52 लगभग 46 प्रतिशत महिलाओं ने इसका लाभ उठाया है।

हमें खुद जाना पड़ता है

खाता खुलवाने में आने वाली समस्याओं के बारे में रीता बताती हैं, “बैंक में खाता खोलने के लिए पहचान की भी जरूरत पड़ती है। कुछ का तो पहचान पत्र आसानी से मिल जाता है पर कुछ का हमें खुद बनवाने के लिए जाना होता है।”

बैंक खाता न होना बड़ी वजह

शाहजहांपुर जिले के कम्यूनिटी प्रोसेस प्रबंधक पुष्पराज गौतम ने बताया, जिले में 2150 आशा बहू हैं, जिनमें कुछ की यही समस्या है कि प्रसूता महिलाओं के बैंक खाता न होने से पैसा नहीं मिला है। गाँवों में कई ऐसे पिछड़े वर्ग हैं, जिनका बैंक में खाता नहीं होता और न उनको जरुरत पड़ती है। जानकारी का अभाव भी रहता है। बैंक को खाता खोलने के लिए दो पहचान पत्र चाहिए होते हैं, जिसके लिए भी आशा कार्यकत्री को दौड़ना पड़ता है। अभी भी 14 प्रतिशत भुगतान प्रसूता का बैंक खाता न होने के कारण रुका हुआ है। पुष्पराज आगे बताते हैं, यह भी नियम है कि पति के खाते में पैसा चला जाए, लेकिन इससे प्रसूता को कोई लाभ नहीं मिलता है क्योंकि कई महिलाओं को उनके पति पैसा देते ही नहीं हैं।

समस्याएं आशा कार्यकत्रियों की जुबानी

जब से खाते में पैसे मिलने लगे हैं, जल्दी पैसा ही नहीं मिलता। कितनी ऐसी नयी बहुएं होती हैं, जिनका अपना खुद का बैंक खाता ही नहीं होता है। पहले जाकर पहचान पत्र बनवाओ, तब खाता खुलता है और पैसा मिलता है।
माधुरी सिंह, आशा कार्यकत्री, प्रतापगढ़ संडवा चंद्रिका ब्लॉक।

नंवबर में एक प्रसूता का प्रसव कराया था। पहले पहचान पत्र बनवाया और फिर बैंक में खाता खुलवाया। अब जनवरी में उसके खाते में पैसा आएगा, तब मुझे मिलेगा।
किरन बाला, आशा कार्यकत्री, शाहजहांपुर ददरौल ब्लॉक

आठ नौ महीने पहले एक नियम आया था कि महिलाओं का खाता नहीं है तो उसके पति के खाते में पैसा चला जाता है। ऐसे में गाँव में कुछ प्रसूता के पति ऐसे भी हैं, जिनका खाता नहीं है। इनकी संख्या ज्यादा नहीं है।
नैनतारा, आशा कार्यकत्री, कानपुर देहात मैंथा ब्लॉक

प्रसूताओं को अब दोगुनी प्रोत्साहन राशि

परिवार कल्याण, मातृ एवं शिशु कैबिनेट मंत्री रविदास मेहरोत्रा ने घोषणा की थी कि संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए जननी सुरक्षा योजना के तहत प्रसूताओं को अब दोगुनी प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। शहरी प्रसूताओं को दो हजार और ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को तीन हजार रुपये दिए जाएंगे।

अस्पताल में विशेष काउंटर की मांग

15 दिन पहले रानी अवंती बाई महिला चिकित्सालय (डफरिन अस्पताल) में हुए कार्यक्रम में परिवार कल्याण की डीजी हेल्थ नीना गुप्ता ने कैबिनेट मंत्री से महिला अस्पतालों में ही बैंक खाता खुलवाने के लिए एक विशेष काउंटर बनवाने की मांग की। उन्होंने कहा कि सैकड़ों प्रसूताओं का बैंक में खाता नहीं होने से जेएसवाई का रुपया उन्हें नहीं मिल पाता है। अस्पताल से ही जीरो बैलेंस से खाता खुल जाएगा तो हर प्रसूता को जेएसवाई की योजना का आसानी से लाभ मिल सकेगा।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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