पीलीभीत में बाघ से सुरक्षा के लिए खुद कसी कमर

पीलीभीत में बाघ से सुरक्षा के लिए खुद कसी कमरखेत के चारों ओर लगा सोलर तार।

अनिल चौधरी, स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

पीलीभीत। जनपद के जंगल को जबसे टाइगर रिजर्व घोषित किया गया है, जंगल के आसपास बसे गाँवों में अक्सर बाघ और तेंदुए घुस आते हैं और ग्रामीणों-मवेशियों को अपना निवाला बना लेते हैं। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के आसपास के गाँवों में जंगली जानवरों के हमले में बीते एक साल में 15 लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन जब प्रशासन ने ग्रामीणों की सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया तो इन्होंने खुद ही कमर कस ली।

जंगल से सटे क्षेत्रों में सिखों के तमाम फार्म हैं, जिनमें से अधिकतर संपन्न किसान हैं। इन किसानों ने अपने खेतों के चारों ओर सोलर तार फैंसिंग का काम अपने पैसों से कराना शुरू कर दिया है। जंगल किनारे बसे गजरौला, मुस्तफ़ाबाद, हल्दीठेंगा, मथना, बनकटी, रम्पुरा आदि गाँवों में किसानों ने तार फैंसिंग के काम मे रुचि दिखाई और सहयोग किया। इसके अलावा कम सुविधा संपन्न गाँवों के लोग मचान बनाकर खुद ही अपने गाँव की रखवाली कर रहे हैं।

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हल्दीठेंगा स्थित आठ एकड़ खेत में सोलर फैंसिंग कराने वाले अनिल सिंह ने बताया, “खेत के चारों ओर 870 मीटर लम्बाई में तार लगाने पर 80 हजार रुपए का खर्च आया है। इस क्षेत्र में बाघ की दहशत के चलते खेतों में काम करने वाले मजदूर काम करने से पहले पटाखे छोड़ते हैं और पीपे, कनस्तर, ड्रम आदि बजाकर शोर मचाते हैं, ताकि बाघ खेतों में कहीं छुपा बैठा हो तो निकलकर भाग जाए।” अनिल सिंह ने आगे बताया, “अधिकतर जंगलों के किनारे खेती करने वाले किसान अपने खेतों में फ़सल की रखवाली करने के लिए ऊंचे-ऊंचे मचान बनाकर अपने खेतों की रखवाली करते हैं। बाघ और तेंदुए आदि से सुरक्षा के लिए हम लोग शाम के समय ही मचानों पर चढ़ जाते हैं और अगले दिन सुबह दिन निकलने पर ही नीचे उतरते हैँ।”

इस बारे में टाइगर रिजर्व के डीएफओ कैलाश प्रकाश बताते हैं, “टाइगर रिजर्व की सीमा पर तार फैंसिंग के लिए शासन को प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। शासन से बजट उपलब्ध होते ही टाइगर रिजर्व के जंगलों में तार फैंसिंग का कार्य पूरा कराया जाएगा।”

इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया कि “जनपद के चारों विधायकों ने तार जंगल किनारे तार फैंसिंग कराने के लिए अपनी विधायक निधि से धनराशि देने का वादा किया है, जिसके मिलते ही कार्य शुरू करा दिया जाएगा।”

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