रायबरेली जिले के 50 फीसदी नलकूप खराब, कैसे पूरा होगा सिंचाई लक्ष्य?

रायबरेली जिले के 50 फीसदी नलकूप खराब, कैसे पूरा होगा सिंचाई लक्ष्य?सिंचाई व्यवस्था बेहतर तरीके से पहुंचाने के लिए रायबरेली जिला नलकूप विभाग द्वारा 380 नलकूप लगवाए गए हैं, लेकिन इनमें से 50 फीसदी नलकूप खराब पड़े हैं।

मोबीन अहमद - कम्यूनिटी जर्नलिस्ट

रायबरेली। मुड़ियाडीह गाँव के पंकज सिंह (52 वर्ष) आलू की खेती करते हैं। पिछले एक साल से गाँव में लगे सरकारी नलकूप के बिगड़ जाने से गाँव के किसान अपने खेत की सिंचाई करवाने के लिए किराए पर पंप लेने पर मजबूर हैं।

ख़राब पड़े नलकूप की ओर इशारा करते हुए पंकज बताते हैं, "ये सरकारी ट्यूबवेल पिछले साल खराब हो गया था और तब से अभी तक नहीं बन पाया है। हमने इसकी शिकायत कई बार नलकूप विभाग में की है लेकिन अफसरों पर इसका कोई भी फर्क नहीं पड़ता है।"

किसानों को खेती में सिंचाई व्यवस्था बेहतर तरीके से पहुंचाने के लिए रायबरेली जिला नलकूप विभाग द्वारा 380 नलकूप लगवाए गए हैं, लेकिन इनमें से 50 फीसदी नलकूप खराब पड़े हैं।

नलकूपों की ख़राब दशा पर जिला नलकूप विभाग, रायबरेली के अधिशासी अभियंता मनोज कुमार बताते हैं, "जिले में नलकूपों की बदहाली लगभग सभी ब्लॉकों में एक जैसी है। असल में एक नलकूप चलाने के लिए 380 वोल्ट बिजली की ज़रुरत होती है पर ग्रामीण क्षेत्रों में सिर्फ 200 से 250 वोल्ट बिजली ही मिलती है।"

जिले में इस वर्ष नलकूपों के ज़रिए लगभग 1800 हेक्टेयर क्षेत्रफल कृषि भूमि पर सिंचाई करने का लक्ष्य रखा गया है पर नलकूपों की मौजुदा स्थिति देखते हुए इस लक्ष्य तक पहुंचना मुश्किल लग रहा है।

रायबरेली जिले के खीरों ब्लॉक के सूर्य प्रकाश 45 वर्ष पांच बीघे में गेहूं की खेती करते हैं। सूर्य प्रकाश बताते हैं, "गाँव का सरकारी नलकूप पिछले तीन वर्षों से खराब पड़ा है। जब नलकूप चलता था तो इससे सीधे-सीधे गाँव के 30 लोगों के 80 बीघे खेत सींचे जाते थे।"

जिले में इस समय किसान गेंहू, चना,और अल्सी उगा रहे हैं। ऐसे में जब फसलों को सिंचाई की ज़रूरत है तो ख़राब पड़े नलकूप किसानो की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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