निरक्षरों को पढ़ाने वाले लाखों प्रेरकों के भविष्य पर छाए काले बादल

निरक्षरों को पढ़ाने वाले लाखों प्रेरकों के भविष्य पर छाए काले बादलभारत के अधिकतर प्रदेशों में चल रही साक्षर भारत मिशन (योजना) सितम्बर 2017 में होगी खत्म।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

कन्नौज। पंद्रह साल से अधिक उम्र के निरक्षरों को साक्षर करने के लिए भारत के अधिकतर प्रदेशों में चल रही साक्षर भारत मिशन (योजना) सितम्बर 2017 में खत्म हो जाएगी। इसके साथ ही हजारों प्रेरक, ब्लॉक कोआर्डिनेटर और जिला समन्वयक बेरोजगार हो जाएंगे। फिलहाल ये लोग महीनों से मानदेय न मिलने की समस्या से भी जूझ रहे हैं।

जिला कन्नौज के उमर्दा (28 वर्ष) ब्लॉक समन्वयक सचिन कटियार बताते हैं, ‘‘केंद्र सरकार ने वर्ष 2012 में ‘साक्षर भारत मिशन’ शुरू किया था। इसके तहत 15 साल से अधिक के लोगों को शिक्षित किया जा रहा है। मार्च 2017 में योजना समाप्त हो गई थी, लेकिन छह महीने के लिए बढ़ा दिया गया। अभी तक कोई भी शासनादेश नहीं आया है, जिसमें हम लोगों को सितम्बर 17 से आगे काम करने का जिक्र हो।’’

पंद्रह साल से अधिक उम्र के निरक्षरों को साक्षर बनाने की योजना।

सचिन आगे बताते हैं, ‘‘बेरोजगारी की कगार पर खड़े हैं। ठोस आश्वासन भी नहीं मिला है। हम लोग लगातार मेहनत कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के 66 जिलों में योजना चल रही है। करीब 75 हजार से अधिक प्रेरक, ब्लॉक समन्वयक और जिला समन्वयक इसमें काम कर रहे हैं। देश में करीब 10 लाख लोग मिशन से जुड़े होंगे।’’

कन्नौज जनपद से करीब 20 किमी दूर उमर्दा ब्लॉक क्षेत्र के फिरोजपुर गाँव के प्रेरक नीरज (32 वर्ष) बताते हैं, ‘‘दिसम्बर 2016 से मानदेय नहीं मिला है। संगठित होंगे और चर्चा करेंगे कि हम लोगों को काम दिया जाए, नहीं तो बेरोजगार हो जाएंगे। कहां जाएंगे अभी तक सेवा की है।’’

30 वर्षीय जिला समन्वयक रमन कटियार कहती हैं, ‘‘हम लोग 2013 से काम करते आ रहे हैं। पांच साल बहुत होता है। कोई तैयारी भी नहीं कर पाए। या तो सरकार करार बढ़ाए या फिर हमको काम दे। बजट भी शासन से आता है। अलग-अलग ब्लॉकों में प्रेरकों व ब्लॉक कोआर्डिनेटरों को मानदेय भी नहीं मिला है।’’

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बीएसए अखंड प्रताप सिंह कहते हैं, ‘‘सितम्बर में ब्लॉक समन्वयक और सह समन्वयक का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा। हो सकता है कि रिन्यूवल हो जाए। फिलहाल प्रेरक का समाप्त नहीं होगा।’’

ब्लॉक कोआर्डिनेटर रजनीश कुमार (27 वर्ष) कहते हैं, ‘‘एक साल का मानदेय नहीं मिला है। हमारे कन्नौज सदर ब्लॉक में करीब सात महीने से नहीं मिला है। शासन से धनराशि नहीं आई है। लखनऊ में धरना-प्रदर्शन भी हो रहा है।’’ इस बाबत जब बीएसए अखंड प्रताप सिंह के सीयूजी नंबर पर दो बार बात करनी चाही, लेकिन बात नहीं हो सकी।

जिला कन्नौज के उमर्दा ब्लॉक में बैठे प्रेरक।

साल में होती हैं दो परीक्षाएं

साक्षर भारत मिशन के तहत एक वर्ष में दो बार परीक्षाएं आयोजित होती हैं। मार्च और सितम्बर में समय निर्धारित है। इस बार विधानसभा चुनाव की वजह से कन्नौज जिले में परीक्षाएं जून 2017 में संपन्न हुईं। अन्य जनपदों में भी निरक्षरों की परीक्षाएं देरी से हुईं। सितम्बर की परीक्षाएं फिर निकट आ गई हैं। कहा जा रहा है कि अगस्त में कराई जा सकती हैं, क्योंकि सितम्बर में योजना समाप्त हो जाएगी।

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एक ग्रामसभा में दो प्रेरक

योजना के तहत एक ग्राम सभा में दो प्रेरक होते हैं। करीब डेढ़ साल पहले हुए ग्राम पंचायत चुनाव में ग्राम सभाओं, वार्डों आदि की संख्या तो बढ़ा दी गई, लेकिन बढ़े ग्राम पंचायतों के हिसाब से प्रेरकों का चयन नहीं हुआ। कन्नौज में पुरानी ग्राम पंचायतें 441 थीं, वर्तमान में 504 हैं। लेकिन चयन पुराने आधार पर ही है। पुराने हिसाब से 882 प्रेरक होने चाहिए। करीब 800 प्रेरक काम कर रहे हैं। कई पद खाली भी हैं।

किसका कितना मानदेय

प्रेरकों का मानदेय दो हजार रूपए और ब्लॉक और जिला समन्वयक का मानदेय छह हजार रूपए महीना है। इनकी ड्यूटी बीएलओ और पल्स पोलियो अभियान में भी लग जाती है।

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