स्वच्छता दूत कर रहे गाँवों को खुले में शौच से मुक्त

स्वच्छता दूत कर रहे गाँवों को खुले में शौच से मुक्तघर-घर जाकर करते हैं शौचालय निर्माण की अपील।

होरीलाल (कम्यूनिटी जर्नलिस्ट)

रायबरेली। जिले के दीनशाह गौरा ब्लॉक में सुबह होते ही पयागपुर पंचायत के मैदान पर लोगों की बैठक शुरू हुई। बैठक का मुख्य उद्देश्य था गाँव में लोगों को खुले में शौच जाने से रोकना। पयागपुर गाँव में यह बैठक हर हफ्ते लगती है और इस बैठक में मुख्य रूप से गाँव के स्वच्छता दूत और ब्लॉक के खंड शिक्षा अधिकारी राजीव रंजन शामील होते हैं, जो इस अभियान के नोडल अधिकारी बनाए गए हैं।

जिले को नए साल से पहले पूरी तरह से शौच मुक्त बनाने की पहल में लगे जिलाधिकारी अनुज कुमार झा के निर्देश से गाँवों को भी शौच मुक्त बनाने के लिए ग्राम पंचायतों में स्वच्छता दूत बनाए गए हैं। ये दूत गाँव में ही रहने वाले लोग हैं, जो घर-घर जाकर लोगों को शौचालय बनवाने के लिए प्रेरित करते हैं।

पयागपुर पंचायत के पयागपुर गाँव में रहने वाले जगजीवन (30 वर्ष) गाँव के स्वच्छता दूत हैं। वो बताते हैं,'' पूरी पंचायत में तड़के ही हमारी सात लोगों की टीम पंचायत के भ्रमण पर निकल जाती है और गाँव में खुले में शौच जाने वालों को रोकते हैं और उन्हें ऐसा ना करने की सलाह देते हैं। इसके अलावा हम लोगो को अपने घरों में नए शौचालय निर्माण के लिए प्रेरित करते हैं।''

हर हफ्ते लगती है स्वच्छता दूतों की बैठक।

जिलाधिकारी व्दारा पूरे जिले में चलाए जा रहे इस खास अभियान के अंर्तगत पयागपुर ग्राम पंचायत ही नहीं बल्कि पूरे जिले में 40 से अधिक ग्राम पंचायतों को जोड़ा जा चुका है और वहां पर स्वच्छता दूत तैनात किए गए हैं।

खंड शिक्षा अधिकारी (दीनशाह गौरा) राजीव रंजन बताते हैं, ''गाँवों में खुले में शौच जाने की आदत को काफी हद तक कम किया जा चुका है। हम हर हफ्ते ब्लॉक की सभी एसबीएम स्वच्छ भारत मिशन पंचायतों का ब्यौरा लेते हैं और पंचायत में घर-घर जाकर लोगों को शौचालय बनवाने की अपील करते हैं। इस पहल का नतीजा यह हुआ है कि पिछले दो महीने में ही पंचायत में 150 से ज़्यादा शौचालयों का निर्माण करवाया जा चुका है।''

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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