शाहजहांपुर के 25 गाँव वर्षों से विकास से दूर 

शाहजहांपुर के 25 गाँव वर्षों से विकास से दूर जुमका गाँव की सड़कों का है बुरा हाल।

कम्यूनिटी जर्नलिस्ट: ऋषभ मिश्रा

जमुका (शाहजहांपुर)। जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर भावलखेड़ा ब्लाक के जमुका गाँव में लगभग चार हज़ार की आबादी है। गाँव में न तो पक्की सड़क बनी है और न ही किसी क घर में शौचालय बने हुए हैं। गाँव में किसी भी प्रकार का कोई भी विकास कार्य नहीं हुआ है। गाँव में कोई भी कार्य न होने की वजह जानने के लिए जमुका गाँव की ग्राम प्रधान शांति देवी से जब बात की तो उन्होंने बताया,"अभी तक कोई भी पैसा नहीं मिला है इसके लिए कई बार सूचना भी दी पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।"

केवल एक गाँव का नहीं, 25 गाँवों का यही हाल

यह स्थिति जमुका गाँव की नहीं बल्कि भावलखेड़ा ब्लाक के 25 गाँव की है। जहाँ ग्राम प्रधानों को पैसा न मिल पाने के कारण कोई भी विकास कार्य नहीं हो पाया है। इस सम्बन्ध में भावलखेड़ा ब्लाक के ग्राम प्रधानों ने प्रदर्शन भी किया, साथ ही डीएम को सामूहिक त्याग पत्र भी सौंप दिया है। हालांकि डीएम ने ग्राम प्रधानों के त्याग पत्र इस आश्वासन के साथ अस्वीकार कर दिए कि ग्राम निधि की धनराशि सम्बन्धित खातों में भेजने की कार्यवाही जल्द अमल में लाई जाएगी।

बोले, विकास के लिए पैसा ही नहीं

राज्य वित्त का पैसा नहीं भेजे जाने से मानदेय भुगतान, हैंडपंपों की मरम्मत, सड़कों की मरम्मत और बरसात के पानी के निकास की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। इससे ग्राम पंचायतों में विकास कार्य बाधित हो रहे है। ऐसे में उन सभी प्रधान की छवि धूमिल ही रही है। जमुका गाँव में रहने वाले अनुज कुमार बताते हैं,"गाँव में पक्की सड़क न होने की वजह से काफी दिक्कत होती है। प्रधान को कई बार बोला पर पैसा ना होने के कारण हर बार टाल देते है।"

क्यों दिया ग्राम प्रधानों ने त्याग पत्र

पहले रह चुके सीडीओ ने ग्राम निधि के खातों में धनराशि जल्दी भिजवाने का आश्वासन देकर उन्हें मना लिया गया था, लेकिन बाद में उनका तबादला होने पर लंबे समय तक सीडीओ पद रिक्त रहने से मामला ठंडा चल रहा था। प्रधानों की इस समस्या पर ध्यान न देने पर ही ग्राम प्रधानों ने सामूहिक त्यागपत्र तैयार दिये और विकास भवन में प्रदर्शन कर के डीएम को दे दिया।

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