हीरापुरवा गाँव में अब तक नहीं बना एक भी शौचालय  

हीरापुरवा गाँव में अब तक नहीं बना एक भी शौचालय  प्रतीकात्मक फोटो।

कम्यूनिटी जर्नलिस्ट: मानसी पाल

कक्षा 11, श्री गोपाल मिश्र इण्टर कालेज कीरतपुर बिधूना

बिधूना औरैया। आजादी के 70 वर्ष बाद भी उत्तर प्रदेश के जिलों में सैकड़ों ऐसे गाँव हैं, जिनमे विकास के नाम पर आज भी कुछ नहीं हुआ है। इन गाँव में नेताओं का जाना पांच साल में सिर्फ एक बार होता है, वो भी तब जब उन्हें वोट चाहिए होते हैं। जीतने के बाद कोई भी प्रत्याशी पांच साल तक गाँव में मुड़कर नहीं देखता है।

एक भी शौचालय नहीं

जहाँ एक तरफ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी घर-घर में शौचालय बनवाने के लिये दिन रात एक किये हुये हैं, वहीं आजादी के लगभग 7 दशक बीतने के बाद भी हीरापुर्वा गाँव में आज तक एक भी शौचालय नहीं बना है। इस पूरे गांव में समस्याओं का अम्बार लगा हुआ है। गाँव में सफाईकर्मी के न आने से पूरा गाँव कूड़ेदान में परिवर्तित हो गया है। ऐसे में आधा गाँव बीमारियों की चपेट में है, लेकिन किसी भी अधिकारी को इस ओर देखने की फुर्सत नहीं है।

गाँव में लोग रहते हैं बीमार

विकासखण्ड बिधूना से 10 किलोमीटर की दूरी पर बसे ग्राम हीरापुरवा में अब तक विकास की किरण नहीं पहुंची। गाँव में आज तक किसी भी निधि से एक भी शौचालय का निर्माण नहीं हो सका। इस कारण गाँव के बुजुर्ग, बच्चे और महिलाओं सहित सभी ग्रामवासी खुले में शौच करने को मजबूर हैं। ऐसे मे गाँव में गंदगी बढ़ने पर कई बीमारियों को जन्म लेती हैं। यही कारण है इस गाँव की आधी आबादी हमेशा बीमार रहती है।

गाँव में लगे हैं सिर्फ तीन हैंडपंप

इस गाँव में रहने वाले रामेश्वर दयाल (85 वर्ष) बताते हैं कि कई पीढ़ियाँ गुजर गई, लेकिन अब तक गाँव में एक भी शौचालय नहीं बन सका है। वो आगे कहतें हैं कि मेरे रहते तो बना नहीं आगे का मुझे पता नहीं। शौचालय न होने से हम बुजुर्गों को बहुत परेशानी होती है। गाँव के बुजुर्गों का यह भी कहना है कि पूरे गाँव की प्यास बुझाने के लिये सिर्फ तीन हैण्डपम्प हैं, जिस कारण ग्रामवासियों को एक बाल्टी पानी के लिये घंटो लाइन में खडा होना पड़ता है।

चोक हो रही हैं नालियां

गाँव में हर जगह दिखता है गंदगी का आलम।

गाँव में गंदगी का साम्राज्य व्याप्त है। इसका कारण यह है कि इस गाँव की सफाई के लिये किसी भी सफाईकर्मी के लिये अब तक नहीं लगाया गया है। ऐसे में पूरा गाँव में गंदगी फैली नजर आती है। गंदगी के कारण एक ओर जहाँ नालियाँ चोक हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर नालियों से निकलने वाली दुर्गन्ध लोगों का जीना मुश्किल किये हुये हैं।

गाँव में बिजली भी नहीं

गाँव के राकेश पाल (50 वर्ष) का कहना है कि कई दशक बीत गये, लेकिन गाँव में न तो पीने की व्यवस्था हो सकी और न ही गाँव में अब तक बिजली का प्रबन्ध हो सका है। वो आगे बताते हैं कि गाँव में बारातघर नहीं बना जिस कारण लोग अपनी बेटियों की बारात अपने खेतों में रोकते हैं और वहीं उनके चाय नाश्ते से लेकर भोजन तक का इंतजाम करते हैं।

ग्राम प्रधान भी नहीं देते हैं ध्यान

गाँव के अवधेश (22 वर्ष) बताते हैं कि गाँव में बिजली न होने के कारण जहाँ एक ओर हम लोग ठीक से पढाई नहीं कर पाते, वहीं हमारे लिये टीवी, फ्रिज, पंखा बिजली के सामान स्वप्न सरीखे हैं। गर्मियों के मौसम में हम लोगों को कूलर की ठंडी हवा नसीब नहीं हो पाती। गाँव के युवाओं ने आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान भी गाँव की समस्याओं के निस्तारण में कोई रूचि नही दिखा रहे हैं। ऐसे में गाँव में समस्याओं का अम्बार लगा हुआ है। ग्राम वासियों ने अधिकारियों से इस ओर ध्यान दिये जाने और समस्याओं के निस्तारण की मांग की है।

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