#स्वयंफेस्टिवल: बांदा में किसानों की समस्याओं का हुआ निदान, ग्रामीणों ने जानीं सरकारी योजनाएं

#स्वयंफेस्टिवल: बांदा में किसानों की समस्याओं का हुआ निदान, ग्रामीणों ने जानीं सरकारी योजनाएंबांदा के बेबरु कोतवाली क्षेत्र के अधांव गाँव में किसान गोष्ठी और जागरूकता कार्यक्रम में किसानों को जानकारी देते अधिकारी।

शहनवाज़ (कम्युनिटी जर्नलिस्ट) 27 वर्ष

बांदा। गाँव में ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं का लाभ उठाना चाहिए। सरकारी योजनाएं ग्रामीणों के लिए ही हैं। जैसे जिला कलेकट्रेट से ग्रामीण ऋण लेकर खुद का कारोबार भी कर सकते हैं और अपने आपको आत्मनिर्भर बन सकते हैं। यह बातें मुख्य विकास अधिकारी राम कुमार सिंह ने ग्रामीणों के सामने कहीं। वह बांदा के बेबरु कोतवाली क्षेत्र के अधांव गाँव में आयोजित किसान गोष्ठी में ग्रामीणों और किसानों से सरकारी योजनाओं के बारे में बता रहे थे। इस किसान गोष्ठी का आयोजन गाँव कनेक्शन की चौथी वर्षगांठ के अवसर पर 25 जिलों में 2 से 8 दिसंबर तक मनाए जा रहे स्वयं फेस्टिवल के तहत किया गया। बता दें कि स्वयं फेस्टिवल में 1000 कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं।

स्वच्छ भारत मिशन के बारे में किया जागरूक

कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी राम कुमार सिंह ने स्वच्छ भारत मिशन के बारे में भी ग्रामीणों को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि स्वच्छता संबंधी आदतों को अपनाकर ग्रामीणों के स्तर को बेहतर बनाया जा सकता है। वहीं, उन्होंने कई सरकारी योजनाओं के बारे में ग्रामीणों को विस्तार से जानकारी दी।

किसान गोष्ठी में किसानों की समस्याओं का किया निराकरण

“मैं आलू की खेती कर रहा हूं, मगर आलू में पाला पड़ने की वजह से फसल खराब हो रही है। इससे बचने के लिए क्या उपाय है? यह सवाल पूछा किसान रामजीवन ने। “आलू की खेती में इस समस्या से निपटने के लिए 10 से 15 दिनों में पोटाश का छिड़काव करना चाहिए। इससे काफी हद तक आलू में पाला पड़ने की समस्या को दूर किया जा सकता है।“ इसी कार्यक्रम में किसान गोष्ठी का भी आयोजन किया गया, जहां कृषि विशेषज्ञों ने किसानों की समस्याओं का समाधान किया। इस अवसर पर अधांव गाँव समेत आस-पास के कई गाँवों के किसानों ने हिस्सा लिया।

कचरे से बना सकते हैं प्राकृतिक खाद

किसान गोष्ठी में जिला कृषि अधिकारी बाल गोविंद यादव ने किसानों की समस्याओं का समाधान कर उनका मार्गदर्शन किया। इस अवसर पर उन्होंने बताया कि किस तरह बेकार कचरा किसानों के लिए कितने काम की चीज है। कचरे से किसान फसलों में लगने वाली खाद बना सकते हैं। ऐसा खाद जिसमें कोई लागत नहीं है और आसानी से बनाई जा सकती है। किसान कचरे से भी प्राकृतिक खाद तैयार कर सकते हैं। इसके अलावा किसानों को खेती के उपयुक्त उर्वरक और मिट्टी की जानकारी दी गई। वहीं, एक कैंप ज़िला उद्यान अधिकारी परवेज़ आलम की अध्यक्षता में भी चलाया गया। इस कैंप में ग्रामीणों को पर्यावरण, खेती के लिए सही मौसम संबंधित अन्य जानकारियां भी दी गई।

कार्यक्रम में एक सत्र पशु चिकित्सा जागरुकता के लिए भी हुआ। इसके लिए मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी लाखन सिंह ने मवेशियों में होने वाली आम बीमारियों, उनके लक्षण और रोकथाम के बारे में लोगों को बताया।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

First Published: 2016-12-29 18:43:41.0

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