#स्वयंफेस्टिवल: स्वयं अवॉर्ड से सम्मानित हुए बाराबंकी के सितारे

Arvind ShukklaArvind Shukkla   30 Dec 2016 6:06 PM GMT

#स्वयंफेस्टिवल: स्वयं अवॉर्ड से सम्मानित हुए बाराबंकी के सितारेसामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप सारंग को सम्मानित करते कृषि उपनिदेशक एसपी सिंह और गाँव कनेक्शन के अरविंद शुक्ला, साथ में हैं फूल उत्पादक मोइनुद्दीन।

स्वयं डेस्क/वीरेंद्र शुक्ला (27 वर्ष)

बेलहरा (बाराबंकी)। गांव कनेक्शन फाउंडेशन के स्वयं फेस्टिवल के दौरान मंगलवार को जिले का नाम रोशन कर दूसरों के लिए प्रेरणा बनने वाले लोगों को जिलास्तरीय स्वयं अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। इस सम्मान समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में सराहनीय कार्य के जरिए विशेष पहचान बनाने के लिए 10 लोगों को सम्मानित किया गया। समारोह में कृषि और बागवानी विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे। यह क्षेत्र सब्जी उत्पादन के लिए पूरे प्रदेश में प्रसिद्ध है। बता दें कि गाँव कनेक्शन की चौथी वर्षगांठ के अवसर पर 2 से 8 दिसंबर तक 25 जिलों में मनाए जा रहे देश के सबसे बड़े ग्रामीण उत्सव स्वयं फेस्टिवल में 1000 कार्यक्रम किये जा रहे हैं।

इन्हें मिला सम्मान

डॉ. ऊषा चौधरी (शिक्षाविद): ऊषा चौधरी बाराबंकी के सबसे बड़े महिला कॉलेज सरकार पटेल महाविद्यालय की प्राचार्या हैँ। उनकी अगुवाई में कॉलेज तो निरंतर आगे बढ़ ही रहा है, साथ ही वह कई छात्राओं की फीस भी अपनी जेब भरती हैं।

सरमैल सिंह गांधी (किसान नेता): पिछले कई वर्षों से सुरमैल सिंह इलाके के किसानों के हक के लिए आवाज़ उठाते रहे हैं। वो बात करते हैं खेती और किसानों की बेहतरी की, ऐसे लोगों को आज के दौर में किसानों को बहुत जरुरत है।

बृजनाथ दिद्वेदी (पुलिसकर्मी): आमतौर पर पुलिस की छवि बहुत निगेटिव मानी जाती है, लेकिन बृजनाथ जैसे लोग उस छवि को तोड़ते हैं। बाराबंकी के एक गहरे नाले में गिरे बुजुर्ग को बचाने के लिए वो अपनी जान की परवाह किए बिना नाले में कूद पड़े। ये घटना सुनने में भले ही छोटी है, लेकिन ऐसे प्रयासों से पुलिस के प्रति लोगों में भरोसा बढ़ता है।

मोइनुद्दीन (फूल उत्पादक): इनके खेतों और पॉली हाउस में उगे विदेशी फूल विधानसभा से लेकर संसद भवन तक की शोभा बढ़ा चुके हैं। मोइऩुद्दीन की बदौलत बाराबंकी को प्रदेश के प्रमुख फूल उत्पादक जिलों में शामिल किया जाने लगा है।

शिल्पी गुप्ता (शिक्षिका): बाराबंकी के हरख ब्लॉक के एक प्राथमिक स्कूल में शिक्षिका शिल्पी गुप्ता का स्कूल तमाम दूसरे सरकारी स्कूलों से अलग है। उन्होंने अपने दम पर स्कूल का न सिर्फ हुलिया बदला है, बल्कि पढ़ाई में भी कई उदाहरण पेश किए हैं। शिल्पी तमाम शिक्षकों के लिए उदाहरण है जो संसाधनों की दुहाई देते रहते हैं।

रमेश चंद्र मौर्या (किसान प्रशिक्षक): इस इलाके के लोग उन्हें खेती का डॉक्टर भी कहते हैं। पिछले कई वर्षों से न सिर्फ वो प्रगतिशील खेती करते हैं, बल्कि दूसरे सैकड़ों किसानों को बेहतर खेती की सलाह भी देते हैं। उनकी बदौलत इलाके के तमाम किसानों को फायदा पहुंचा है।

हरीश वर्मा (प्रगतिशील किसान): हरीश वर्मा फतेहपुर के पास रमपुरवा में रहते हैं। केला और टमाटर जैसे फसलें उगाकर उन्होंने खेती को फायदे का सौदा बनाया है। इनके पदचिन्हों पर चलते हुए तमाम किसान केले की खेती से फायदा कमा रहे हैं।

नरेंद्र त्रिपाठी (सामाजिक कार्यकर्ता): लीगल लिस्ट्रेसी यानी कानूनी शिक्षा के लिए नरेंद्र त्रिपाठी पिछले कई वर्षों से कार्य कर रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर के ट्रेनर नरेंद्र त्रिपाठी यूपी के साथ उत्तराखंड में भी सक्रिय रहे हैं। आजकल वो महिलाओं को रोजगार के लिए भी ट्रेनिंग दे रहे हैं।

बॉबी सिंह (शिक्षिका): पिछले दिनों बरसात के सीजन में जब बाढ़ आई थी तब घाघरा की तराई में बसे लोग घरों से निकलने से पहले 10 बार सोचते थे, उसी बीच बाराबंकी से कई बार 70-80 किलोमीटर का सफर करके नदी-नालों को पार करते हुए वो रोज स्कूल पहुंचती थीं। कई बार स्कूल में रुक जाती थीं, ऐसे शिक्षकों की बदौलत ही लोगों का गुरुओं पर भरोसा कायम है। ये भले ही उनकी ड्यूटी का हिस्सा हो, लेकिन वह इसे एक जिम्मेदारी की तरह निभाती हैं।

सौम्या तिवारी (प्रशिक्षक): इनके उम्र भले कम है, लेकिन इस वो अपने कई वर्ष बड़ी महिलाओं को हुनरमंद बना चुकी हैं। सौम्या अब तक 200 से ज्यादा महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई और ब्यूटीपार्लर की ट्रेनिंग देकर उन्हें स्वालंबी बना चुकी हैं।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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