पिछले तीन वर्षों में सबसे ज्यादा पहुंचा बासमती चावल का भाव, किसानों के चेहरे खिले 

Sundar ChandelSundar Chandel   23 Oct 2017 2:26 PM GMT

पिछले तीन वर्षों में सबसे ज्यादा पहुंचा बासमती चावल का भाव, किसानों के चेहरे खिले प्रतीकात्मक फोटो 

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

मेरठ। तीन साल बाद बासमती चावल के दामों में ऐसा उछाल आया कि किसानों की बल्ले-बल्ले हो गई। बीते वर्षों में जहां बासमती के दाम 2300 रुपए प्रति कुंतल तक ही सीमित रहे, वहीं इस बार किसानों को 3300 रुपए प्रति कुंतल का भाव मिल रहा है। बासमती का अच्छा भाव मिलने से किसानों के मुरझाए चेहरे खिल उठे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अभी दामों में और उछाल आ सकता है।

मुख्य रूप से बासमती चावल की खेती करने वाले वेस्ट यूपी के किसानों को इस बार दिवाली पर तोहफा मिला है। तीन साल से कम दाम में बासमती बेच रहे किसानों को इस बार बंपर भाव मिला है। साथ ही बासमती की इस बार पैदावार भी अच्छी हुई है। किसानों के अनुसार पिछले तीन वर्षों से उन्हे लागत निकाल पाना भी मुश्किल हो रहा था। औने-पौने दामों में बासमती को बेचना पड रहा था। इस बार फसल तैयार होने के समय से ही दाम अच्छा रहा है।

दौराला ब्लॉक के मीठेपुर गाँव के किसान देवेन्द्र (37 वर्ष) बताते हैं, "तीन साल के मुकाबले इस बार बासमती का इस बार अच्छा दाम मिल रहा है। इस बार दिवाली अच्छी मनी तो सिर्फ बासमती की वजह से। दिवाली तक भी बासमती के भाव 3000 के पार थे।

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पिछले सालों की तुलना में बासमती के भाव में सबसे ज्यादा उछाल आया है। अभी बाजार में बासमती के दाम और बढ़ सकते हैं। यह किसानों के लिए अच्छे संकेत हैं।
डॉ. रितेश शर्मा, बीईडीएफ के प्रधान वैज्ञानिक

इन प्रजातियों से मिली अच्छी पैदावार

बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान के प्रधान वैज्ञानिक व प्रभारी डॉ. रितेश शर्मा बताते हैं, "बासमती की प्रजाति 1509, पूसा बासमती-1, पूसा बासमती-6, बासमती 1121, आदि प्रजातियों के दाम अच्छे मिल रहे हैं। साथ ही मार्केट में इन प्रजातियों की मांग लगातार बढ़ रही है। इसके अलावा इन प्रजातियों को एक्सपोर्टर भी अच्छे से खरीद रहे हैं।"

कम रहा बीमारी व कीटों का प्रकोप

डॉ. रितेश बताते हैं, "इस बार बासमती पर बीमारी और कीटों का प्रकोप कम रहा। जिसका असर फसल पर दिखाई दे रहा है। बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान के वैज्ञानिक भी बीमारी की रोकथाम के लिए समय-समय पर किसानों को जागरूक कर रहे थे। बारिश की स्थिति भी बासमती के अनुकूल रही है। जिसके चलते किसानों को इसका भरपूर लाभ मिला है।

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इन जिलों में होती है बासमती की खेती

मेरठ, आगरा, अलीगढ़, बदायू, बागपत, बरेली, बिजनौर, बुलंदषहर, ऐटा, इटावा, फरूखाबाद, फिरोजाबाद, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, हाथरस, जेपीनगर, कन्नौज, मैनपुरी, मथुरा, मुरादाबाद, मुज्जफरनगर, औरैया, पीलीभीत, रामपुर, शाहजहांपुर, सहारनपुर, शामली, हापुड़ संभल आदि।

बीते तीन वर्षों के आंकड़े

  • वर्ष दाम
  • 2015 1250 से 2330
  • 2016 1400 से 2350
  • 2017 1800 से 3300

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