यूपी मनाने जा रहा है सबसे बड़ा ग्रामीण उत्सव स्वयं फेस्टिवल, देखिए कैसे चल रही हैं तैयारियां 

यूपी मनाने जा रहा है सबसे बड़ा ग्रामीण उत्सव स्वयं फेस्टिवल, देखिए कैसे चल रही हैं तैयारियां स्वयं प्रोजेक्ट के जरिए प्रदेश की हजारों लड़कियां उठा रही हैं अपनी आवाज। 

लखनऊ। दो दिसंबर से आठ दिसंबर तक होने वाले उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े ग्रामीण उत्सव की तैयारियां जारी हैं। गाँव कनेक्शन फाउंडेशन की ओर से 25 जिलों में एक हजार जागरुकता कार्यक्रम किए जा रहे हैं, जिसके लिए जगहों के चयन को अंतिम रुप दिया जा रहा है।

गाँव कनेक्शन स्वयं फेस्टिवल में करीब 650 गैर सरकारी संगठन, उत्तर प्रदेश पुलिस और कृषि विभाग विशेष सहयोगी होंगे। समारोह में किसान, छात्र-छात्राओँ, महिलाओं और ग्रामीण मुद्दों को प्रमुखता दी गई है।

स्वयं फेस्टिवल के बारे में गाँव कनेक्शन फाउंडेशन की हेड ऑफ ऑपरेशंस और फेस्टिवल की डायरेक्टर यामिनी त्रिपाठी बताती हैं, “ये उत्तर प्रदेश का अब तक का सबसे बड़ा जागरुकता कार्यक्रम है। हमारी कोशिश है कैसे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक उनकी ही भाषा में जानकारी मुहैया कराई जाए। हमने इसमें 650 से ज्यादा स्वयं सेवी संस्थाओं, इस दौरान कृषि और पशुपालन जैसे विभाग हमारे अहम सहभागी बने हैं तो उत्तर प्रदेश पुलिस विशेष पार्टनर के रुप में काम करेगी।”

रायबरेली के बाल विद्यामंदिर इंटर कॉलेज में स्वयं फेस्टिवल की डायरेक्टर यामिनी त्रिपाठी। कॉलेज के छात्र-छात्राएं फेस्टिवल को लेकर काफी उत्साहित हैं। फोटो- देवांशुमणि तिवारी

वो आगे बताती हैं, “इन कार्यक्रमों के माध्यम से फाउंडेशन करीब सात लाख ग्रामीणों व युवाओं से सीधे संवाद करके उन तक नई कृषि तकनीक संबंधी व अन्य विकास की जानकारियां सीधे पहुंचाएंगा। जैसे सोनभद्र के आदिवासी इलाके में गरीबों को जीविका चलाने के लिए बकरियां वितरित की जाएंगी तो हर जिले में किसानों को खेती को लाभकारी बनाने के लिए जागरुक किसानों, कृषि अधिकारियों और वैज्ञानिकों के सेशन कराए जा रहे हैं।”

स्वयं फेस्टिवल जागरुकता पार्टनर के रुप में उत्तर प्रदेश पुलिस, इंटरनेट की दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी गूगल महिलाओं को गूगल सखी के माध्यम से महिलाओं को जागरुक करेगी। पेटीएम स्पांसर तो देश के टॉप टेन समाचार चैनल में शामिल एबीपी न्यूज चैनल पार्टनर जबकि रेडियो पार्टनर के रुप में रेड एफएम है।

कार्यक्रम के दौरान हर जिले में किसान चौपाल, स्वाइल टेस्टिंग, एनिमल वैक्सीनेशन, बीज वितरण, मथुरा से लेकर कन्नौज तक गंगा और यमुना जैसी नदियों की सफाई। शाहजहांपुर में जेल में हेल्थ कैंप लगेगा तो लखनऊ की जेल में कैदियों को स्टैसमैनेजमेंट की काउंसिलिंग कराई जाएगी। ग्रामीणों को आरटीआई और ई-गवर्नेंस, इंटरनेट के सदुपयोग की ट्रेनिंग दी जाएगी।

यामिनी त्रिपाठी आगे बताती हैं, हमारी कोशिश है इस दौरान हर वो मुद्दा उठाया जाए, जिससे आम आदमी का सरोकार है। लड़कियों के स्कूल-कॉलेज में हम महिला डॉक्टर ले जा रहे हैं, तो वहां सैनेटरी नैकपिन भी दिए जाएंगे। इतना ही नहीं हमने समाज के उन तबकों को भी मुख्यधारा में जोड़ने का काम किया है। इसके तहत किन्नर बिरादरी को भी इसमें शामिल किया जाएगा। सरकारी अधिकारियों की मदद से उनका आधार कार्ड का रजिस्ट्रेशन तो होगा ही साथ ही पुलिस के माध्यम से उन्हें कानूनी जानकारी और उनके अधिकार के बारे में बताएंगे।”

समारोह के दौरान हर जिले में सामाजिक सरोकार निभाने वाले 10 लोगों को सम्मानित भी किया जाएगा। जबकि अपने कार्यों से अलग राह बनाने वाले 10 लोगों को लखनऊ 14 दिसंबर को आयोजित स्वयं फेस्टिवल के मेगा शो में विशिष्ट लोगों को द्वारा सम्मानित कराया जाएगा।

गाँव कनेक्शऩ फाउंडेशन मुख्य रुप से ग्रामीण इलाके के छात्र-छात्राओं और किसानों के बीच काम करता है। स्वयं प्रोजेक्ट फाउंडेशन का फ्लैशशिप कार्यक्रम है, जिसके तहत ग्रामीण प्रतिभाओं और आम लोगों को कम्यूनिटी जर्नलिस्ट बनाना है। फाउंडेशन से ट्रेनिंग के बाद ये लोग न सिर्फ अपने गाँव की आवाज बनते हैं, उससे होने वाली कमाई के जरिए वो स्वावलंबी भी बन रहे हैं। यूपी के 25 से ज्यादा जिलों में अब तक 50 हजार से ज्यादा स्टूडेंट और 10 हजार से ज्यादा जागरुक किसान, आशा बहुएं, स्वयं सहायता समूह की महिलाएं स्वयं प्रोजेक्ट से जुड़ चुके हैं। गाँव कनेक्शऩ फाउंडेशन ऐसे लोगों को जागरुक करने के साथ उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए कार्यक्रमों का भी आयोजन करता है। विगत वर्ष फाउंडेशन ने लखनऊ में स्वयं फेस्टिवल के दौरान प्रदेश की 12 महिलाओं को उन्हें सराहनीय कार्य के लिए सम्मानित किया था, इनमें से 7 महिलाओं को बाद में प्रदेश सरकार ने रानी लक्ष्मीबाई सम्मान से पुरस्कृत किया।

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