बारिश के समय जलभराव से परेशान सूखड़ गाँव के किसान

बारिश के समय जलभराव से परेशान सूखड़ गाँव के किसानसूखड़ गाँव की महिलाएँ। 

राजा सिंह सीपाल

स्वयं कम्युनिटी जर्नलिस्ट

लखनऊ । सीतापुर रोड में चंद्रिका देवी मंदिर सड़क पर स्थित पानी की कमी से जूझता सूखड़ गाँव बारिश के मौसम में पानी से इतना भर जाता है कि सारे रास्ते कीचड़ बन जाते हैं। पानी के साथ साथ गाँव में शौंचालयों की कमी है। गाँव के बच्चों को पाँच किमी दूर स्कूल में जाकर पढ़ाई करनी पड़ती है।

भारतीय किसान यूनियन बीकेटी के उपाध्यक्ष नीरज यादव खुद भी एक किसान हैं। पानी की समस्या से बदहाल होकर वह कहते हैं, “सरकार ने जितने नल बनवाए थे, वो सभी खराब हो गए हैं। गाँव में केवल एक ही ट्यूबवैल है। पढ़ाई के मामले में तो हालत और खराब है। बच्चों को गाँव से पाँच किमी0 दूर स्कूल जाना पड़ता है।”

भारतीय किसान यूनियन के उपाध्यक्ष नीरज यादव।

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ऐसा नहीं है कि बारिश से किसान को बहुत खुश हैं। गाँव के किसान बारिश से भी परेशान हैं। बारिश का मौसम आते ही गाँव की कच्ची सड़कें पानी से भर जाती हैं। इतनी परेशानी में गाँव का अकेला ट्यूबवैल इतना ज़्यादा इस्तेमाल किया जाता है, कि वह भी खराब होने की कगार पर है।

गाँव के हैण्डपाइपों की हालात देखें, तो देख कर दंग रह जाएंगे। टेढ़ा हैण्डपाइप सालों से खराब होने की कहानी का गवाह बना है। न तो सरकार ने नए हैण्डपाइप लगवाए और न ही पुराने हैण्डपाइपों को ठीक कराने पर कोई ध्यान ही दिया।

सूखड़ गाँव के सूखे हुए हैण्डपाइप।

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आगे नीरज बताते हैं, “गाँव में मुख्य रूप से पानी की समस्या है, लेकिन सरकार ने एक भी सुलभ शौंचालय नहीं बनवाया गया। पूरे गाँव में सिर्फ़ एक या दो ही शौंचालय हैं, जो गाँव के लोगों ने खुद से बनवाए हैं।” शौंचालयों के न होने से गाँव की महिलाओं को दूर जाकर शौंच करना पड़ता है। गाँव की महिलाओं को सुबह सुबह खेतों में जाकर शौंच करने से बहुत परेशानी होती है। न नल, न हैण्डपाइप, केवल एक ट्यूबवैल के सहारे पानी की कमी से जूझता सूखड़ गाँव खेती करने में असमर्थ है।

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