जिस पानी से आप कपड़े भी नहीं धुलना चाहेंगे, वही पानी इन्हें पीना पड़ता है

मनीष वैद्य

कम्युुनिटी जर्नलिस्ट

देवास (मध्य प्रदेश)। कारखानों से निकलने वाले अपशिष्ट रसायनिक पदार्थों ने यहां के भूजल को प्रदूषित कर दिया है, जिससे इस पानी को पीने से यहां के लोग बीमार हो रहे हैं।

मध्य प्रदेश के देवास जिले के औद्योगिक क्षेत्र के पास स्थित गाँव है बीराखेड़ी, करीब पाँच सौ परिवारों की यह बस्ती नगर निगम के क्षेत्राधिकार में आती है पर यहाँ के लोगों की मानें तो वोट देने के अलावा नगर निगम उनके लिये कुछ नहीं करती। गाँव के काफी लोग यहाँ तरह-तरह के चर्म रोगों से पीड़ित हैं तो करीब सौ से ज्यादा लोग पेट की बीमारियों से ग्रस्त हैं।

मुख्यमंत्री तक से बार-बार शिकायतों के बाद भी ग्रामीणों की माँग पर नगर निगम या जिला प्रशासन कोई भी फिलहाल गम्भीर नजर नहीं आ रहा है। यहाँ के जलस्रोतों से पीले रंग का बदबूदार पानी आ रहा है, जिसे पीना तो दूर मुंह के पास लाना भी सम्भव नहीं हो पा रहा है।

बीराखेड़ी के राम साहनी बताते हैं, "पूरी बस्ती के लोग पीने के पानी के लिये परेशान हैं, रोजमर्रा के लिये भी पानी की बहुत समस्या है। इस दूषित पानी से नहाने के बाद शरीर की चमड़ी पर बुरी तरह खुजली होती है। उन्हें खुद बीते दिनों डॉक्टर को दिखाना पड़ा। उनके हाथ-पैरों में घुटने के पास खुजली चल-चल कर अब सोरायसिस हो चुका है।"

वो आगे कहते हैं, "खुजली और जलन के साथ शरीर से छाल की तरह चमड़ी निकलती रहती है। डॉक्टर ने बताया कि पानी से दूर रहो पर साफ़ पानी कहाँ से लाएँ और रोज कहाँ भागदौड़ करें। यहाँ के ज्यादातर लोग सुबह से शाम तक मजदूरी और अन्य काम के लिये बाहर या शहर में जाते हैं। ऐसे में पानी की किल्लत किसी बड़ी परेशानी से कम नहीं है। देखो पूरे शरीर पर कैसे चकत्ते बन रहे हैं। पिछले तीन महीने से उसका इलाज चल रहा है और अब तक हजारों रुपए खर्च हो चुके हैं।"

कुछ दिनों पहले यहां विश्व बैंक की एक योजना में सीमेंट की सड़कें तो बना दी गई है, लेकिन पानी जैसे बुनियादी जरूरतों की ओर किसी का ध्यान नहीं है। इस बस्ती में पानी के लिये न तो कोई कुंआ है और न ही कोई अन्य साधन। बस्ती भर के लोग हैण्डपम्प और नल जल योजना का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।

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यहां तीन हैण्डपम्प भी हैं पर तीनों का ही पानी प्रदूषित है और इतना कड़वा है कि मुंह पर ही नहीं आता। नल जल योजना का पानी भी प्रदूषित है और यहां के लोग बीमार होते जा रहे हैं।

यहाँ के लोग बताते हैं कि इसके लिये कई बार उन्होंने नगर निगम के दफ्तर में जाकर भी बताया। शिकायतें भी की गई, जिला कलेक्टर को जन सुनवाई में आवेदन दिया और सीएम हेल्पलाइन में भी शिकायत की पर कभी कुछ नहीं हुआ। कभी इस पानी का सैम्पल तक नहीं किया गया कि जो पानी यह बस्ती पी रही है, वह पीने लायक भी है या नहीं।

यही हाल 55 वर्षीय सुरेश भाट का है, उनके बेटे को पीलिया हो रहा है। डॉक्टर ने इस पानी से दूर रहने को कहा है पर हम कहाँ जाएँ। पास में रहने वाली गायत्री मालवीय भी यही बातें दोहराती हैं। वे बताती हैं कि पानी का स्वाद पानी जैसा नहीं होकर खारा-खारा है। जया साहनी कहती हैं कि लोग घर घर बीमार हैं, हम बीते 10 सालों से यह नरक झेल रहे हैं।

गोवर्धन लाल परमार बताते हैं कि हमारी बस्ती के पास से गुजरने वाले नाले में आसपास के रासायनिक उद्योगों का गन्दा पानी और हानिकारक रसायन बहाए जाते हैं और यही वजह है कि हमारे यहाँ का पानी इतनी बुरी तरह से प्रदूषित हो रहा है। नाले में रासायनिक खाद बनाने वाली कम्पनी गणेश फ़र्टिलाइज़र, दवाईयाँ बनाने वाली कम्पनी सॉफ्ट मेडिकेयर और सोयाबीन का तेल निकालने वाले प्लांट प्रीमियर सोया से निकलने वाले हानिकारक रसायन के कारण नाले का पानी रंग-बिरंगा हो जाता है।

मंजू बाई के घर के पास ही एक हैण्डपम्प भी लगा है, लेकिन इससे भी उसी तरह का पीला पानी आ रहा है। राधा बाई ने बताया कि हैण्ड पम्प का पानी बहुत गन्दा आ रहा है।न चाय बन पाती है और न ही दाल।

बाबूलाल पथरोड़ बताते हैं कि इस बस्ती के 80 फीसदी लोगों को पेट और चमड़ी की बीमारियाँ हो रही हैं. हमने कई बार महापौर और बड़े अधिकारियों को इसके बारे में बताया लेकिन कभी किसी ने ध्यान नहीं दिया। यहाँ तक कि हमने सीएम हेल्पलाइन में भी शिकायत की पर अब तक कुछ नहीं हुआ। दरअसल इन फ़ैक्टरियों के पानी और अपशिष्ट पदार्थों की निकासी इस नाले के जरिए ही होती है और इसी वजह से यहाँ स्थिति ऐसी हुई है। पानी का कोई वैकल्पिक स्रोत नहीं होने से लोगों को यही प्रदूषित पानी पीना पड़ रहा है और यही पानी रोजमर्रा के काम भी लेना पड़ता है। इससे लोग बीमार होते जा रहे हैं।

क्षेत्रीय पार्षद राजेश डांगी भी मानते हैं कि पूरे गाँव में दूषित पानी आ रहा है. फेक्टरियों में निकलने वाले दूषित पदार्थों को ज़मीन में छोड़ दिया जाता है या आस-पास के नालों में बहा दिया जाता है, इसके नजदीक होने से ज़मीन का पानी भी प्रदूषित हो चुका है। उन्होंने प्रयास कर गाँव को नर्मदा पाइप लाइन की नल जल योजना से जुड़वाया लेकिन कहीं सीवेज का गंदा पानी मिल जाने से यह भी साफ़ पानी उपलब्ध नहीं करा पा रहा है. इसकी शिकायत निगम अधिकारियों सहित जिला कलेक्टर को भी की गई है लेकिन कहीं से कुछ नहीं बदला। यही हालात रहे तो हम ग्रामीणों के साथ अधिकारीयों का घेराव करेंगे।

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