मध्य प्रदेश: गांव और खेत खलिहानों के बीच बनी रेलवे लाइन किसानों के लिए मुसीबत

सरकार अक्सर जनता की बेहतरी के लिए विकास के कार्य कराती है, लेकिन अगर वही विकास मुसीबत बन जाए तो? देवास जिले की अजीत खेड़ी गांव के बीचो-बीच बनी रेलवे लाइन पिछले दस सालों से गांव वालों के लिए बड़ी मुसीबत बनी हुई है।

मनीष वैद्य, कम्युनिटी जर्नलिस्ट

देवास(मध्य प्रदेश) सरकार अक्सर जनता की बेहतरी के लिए विकास के कार्य कराती है, लेकिन अगर वही विकास मुसीबत बन जाए तो? देवास जिले की अजीत खेड़ी गांव के बीचो-बीच बनी रेलवे लाइन पिछले दस सालों से गांव वालों के लिए बड़ी मुसीबत बनी हुई है।

दस साल पहले रेलवे ने बिछाई थी लाइन

दरअसल 10 साल पहले किसानों के खेत खलिहानों और गांव के बीच रेलवे ने रेल लाइन बिछा दी थी। रेल लाईन की वजह से किसान अपने खेतों तक ट्रैक्टर भी नहीं ले जा पाते। उन्हें अपने मवेशियों को भी गांव में कैद कर रखना पड़ता है। यहां तक की फसल पकने के बाद उसे खेतों से घर तक लाने में भी उन्हें हजार मुसीबत का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने रेलवे से इस मामले का हल निकालने की मांग भी की थी लेकिन अभी तक रेलवे ने इस मामले पर कोई जवाब नहीं दी।

किसानों को लड़नी पड़ती है दो मोर्चों पर लड़ाई

गांव के किसान शंकर गिरी बताते हैं कि अपना जीवन चलाने और खेती के लिए यहां के ग्रामीणों को दो मोर्चों पर लड़ाई लड़नी पड़ती है। गर्मी के मौसम में तो वह खेतों में पहुंच जाते हैं, लेकिन बारिश के मौसम में घर से निकलना उनके लिए मुश्किल हो जाता है। रेलवे लाइन की वजह से पूरे गांव में पानी भर जाता है। इसलिए वह बारिश का मौसम आने से पहले खेतों में जाकर फसल लगा देते हैं, फिर सबकुछ भगवान भरोसे छोड़ देते हैं।

दरअसल 10-12 सालों पहले देवास से मक्सी के बीच रेल लाइन डाली गई थी। अजीतखेडी के किसानों के खेतों से निकली इस रेल लाइन के लिए महज 6 हजार रुपए बीघा मुआवजा बीघा दिया गया था। इस रेल लाइन के नीचे पानी निकासी के लिए एक पुल बनाया गया था। यहां से गुजरने पर रेलवे ने रोक लगा रखी है। किसान या तो रेल की पटरी पार कर खेतों की तरफ जाते हैं या फिर गांव में ही बैठे रहते हैं।

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बारिश के मौसम में गांव से निकलना हो जाता है और मुश्किल

करीब एक हजार की आबादी वाले अजीत खेड़ी गांव के ज्यादातर किसानों की जमीन रेलवे लाइन के उस पार ही है। कुछ किसानों ने पानी निकासी वाले रेलवे के पुल को अपना रास्ता बना लिया है। ट्रेक्टर्स उस पुल से निकल जाए इसलिए छते कटवा रखी है। लेकिन बारिश के मौसम में पानी भरे होने की वजह से यहां से गुजरना मुश्किल हो जाता है।रेलवे की जमीन होने की वजह से पंचायत भी कुछ न करने को मजबूर है।

अक्सर सरकार लोगों के भले के लिए विकास कराती है, लेकिन रेलवे पटरी अजीत खेडी गांव के लिए अभिशाप बन गई है। जब से यह पटरी गांवो के बीच डाली गई है, तबसे किसानों की माली हालत बेहद खराब हो गई है। रेलवे भी गांव वालो की इस समस्या ध्यान नहीं दे रहा है।

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