मंदिरों से निकले कचरे से कमाई करता है गुजरात का यह व्यापारी, आप भी कर सकते हैं

Mithilesh DubeyMithilesh Dubey   17 Aug 2019 9:52 AM GMT

रणविजय/मिथिलेश

हम अक्सर मंदिरों में नारियल चढ़ाने के बाद उसका छिलका वहीं छोड़ देते हैं। तरह-तरह के फूल, चुनरी आदि भी चढ़ाते जो बाद में कूड़े में फेंक दिया जाता है। लेकिन गुजरात का एक व्यापारी इन्हीं कूचरों से लाखों रुपए का व्यापार कर रहा है। और खास बात यह भी है कि कचरा उठवाने के लिए उसे मंदिर प्रशासन से पैसे भी मिलते हैं।

अहमदाबाद से लगभग 180 किमी दूर गुजरात का एक जिला है बनासकांठा। राजस्थान के माउंट आबू से सटे इस जिले में प्रसिद्ध अंबा जी का मंदिर है। यहां हर साल देशभर से लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं।

मंदिर से हर साल सैकड़ों टन कचरा निकलता है। जिसमें नारियल के छिलके, फूल और चुनरी आदि होते हैं। लेकिन जिन्हें हम कूड़ा कह रहे हैं इन्हीं कूड़ों से यहां के व्यापारी हितेंद्र रामी लाखों रुपए की कमाई भी कर रहे हैं और सैकड़ों लोगों को रोजगार भी दिया है।

नारियल से बनी आकर्षक वस्तुएं

मंदिर के पास ही हितेंद्र रामी की दुकान है जिसका नाम नंदनवन। दुकान में मिलने वाला हर सामान मंदिर से निकले वेस्टेज से बना होता है।

अपने इस कारोबार के बारे में हितेंद्र कहते हैं, " मैं बचपन से इस मंदिर को देखते आया हूं। मैं हर साल कई लाख श्रद्धालु आते हैं और प्रसाद को रूप में खूब चढ़ावा चढ़ाते हैं। कुछ चीजें जो मंदिर में ही छूट जाती हैं जैसे नारियल का छिलका, गुलाब, चमेली, गेंदा और बेला के फूल आदि। इससे मंदिर में कूड़े का ढेर बन जाता था।"

" तभी मैंने सोचा कि इस ओर कुछ करना पड़ेगा। मैंने मंदिर प्रशासन से बात की। वे मुझे कूड़ा उठाने के लिए पैसे भी देते हैं। मैंने पहले नारियल के छिलके से सामान बनाना शुरू किया। 20 रुपए के नारियल से निकले छिलके से हम 2000 रुपए तक की कमाई कर लेते हैं। नारियल के छिलके से हम गणेश जी प्रतिमा के अलावा चप्पल, जूते बना रहे हैं। महिलाओं के लिए पर्श भी बना रहे हैं।"

नारियल के छिलके से बनी भगवान गणेश की मूर्तियां

हितेंद्र रामी को इस काम के लिए नारियल विकास बोर्ड सम्मानित भी कर चुका है। नारियल के छिलके से शुरू हुआ यह कारोबार और सुगंधित साबुन और गुलाब जल और फेयरनेस क्रीम की ओर बढ़ चुका है।

हितेंद्र कहते हैं कि मंदिर से प्रतिदित सैकड़ो किलो फूल भी निकलते हैं। हम गुलाब के फूलों से गुलाब जल और गुलाब इत्र बना रहे हैं। गुलाब साबुन भी बना रहे हैं जो बिल्कुल केमिकल फ्री है। इसके अलावा हम बेला और चमेली के फूलों से साबुन और क्रीम बना रहे हैं जो आयुर्वेदिक है।

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इस पूरे कारोबार के लिए लगभग 300 लोग तो हितेंद्र से सीधे जुड़े हुए हैं। इसके अलावा देश के अलग-अलग हिस्से से जहां नारियल है या मंदिर है वहां के लोग भी इनके साथ काम कर रहे हैं। हितेंद्र कहते हैं, " मैंने ये काम सीख तो लिया लेकिन आगे मुझे परेशानी होने लगी। शुरू-शुरू में तो काम कम होता था तो मैं ही कर लेता था लेकिन जब काम बढ़ने लगा तब परेशानी हुई।

नारियल के छिलके से बने चप्पल

इसके बाद मैंने अपने साथ कई लोगों को जोड़ा और यह काम सीखाना शुरू किया। उन्हें ट्रेनिंग दिया और उनके सामान मैं ही खरीदने लगा। वर्कशॉप कराकर लोगों को ट्रेनिंग भी देता रहता हूं। कई प्रदेशों में जा चुका हैं। वहां लोगों को इससे जुड़ने के लिए प्रेरित करता हूं।

नंदनवन में पांच रुपए पांच हजार रुपए तक के सामान उपलब्ध हैं। हितेंद्र कहते हैं कि यह काम कोई भी कर सकता है। मैं खुद बहुत से लोगों से बना हुआ सामान खरीदता हूं। ऐसे में कोई व्यक्ति अगर यह व्यापार करना चाहता है तो मैं उसकी मदद कर सकता हूं।

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