देश की 275 नदियों के 302 नदी खंड प्रदूषित, 35 शहर बसे हैं प्रदूषित नदी खंडों के किनारे

देश की 275 नदियों के 302 नदी खंड प्रदूषित, 35 शहर बसे हैं प्रदूषित नदी खंडों के किनारेलखनऊ के चौक स्थित कुड़िया घाट के पास कूड़े कचड़े और कुंभी से पूरी तरह से भरी है गोमती नदी।                                                                                                     फोटो - विनय गुप्ता

नई दिल्ली (भाषा)। गंगा समेत दूसरी नदियों में बढ़ते प्रदूषण और इन्हें निर्मल बनाने की कवायद के बीच एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 275 नदियों पर 302 नदी खंडों की प्रदूषित खंडों के रुप में पहचान की गई है, साथ ही 35 शहर प्रदूषित नदी खंडों के किनारे स्थित हैं।

सरकार ने नदियों को निर्मल बनाने की पहल के तहत गंगा नदी के तट पर स्थित 10 शहरों में ‘स्मार्ट गंगा सिटी’ कार्यक्रम पेश किया है। इन शहरों में जलमल शोधन संयंत्र और जल निकासी नेटवर्क को बेहतर बनाने के लिए सार्वजनिक निजी भागीदारी के आधार पर पहल की जायेगी। जल संसाधन विकास मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि यह कार्यक्रम पहले चरण के तहत हरिद्वार, रिषीकेश, मथुरा, वाराणसी, कानपुर, इलाहाबाद, लखनऊ, पटना, साहिबगंज और बैरकपुर में लागू किया जायेगा। उमा भारती ने गंगा तटीय राज्यों में जिला स्तर पर निगरानी समिति गठित करने का जिक्र किया।

मंत्रालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, गंगा नदी के अलावा भी देश में कई नदी खंड है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा किये गए जल गुणवत्ता आकलन के आधार पर सीपीसीबी ने 2008 के दौरान देश में 121 नदियों में 150 नदी खंडों की प्रदूषित खंडों के रुप में पहचान की थी। वर्ष 2015 के दौरान स्थिति का पुन: आकलन किया गया था और गंगा नदी सहित देश की 275 नदियों में 302 नदी खंडों की प्रदूषित खंडों के रुप में पहचान की गई। इन नदी खंडों के पुनर्स्थापन के वास्ते कार्य योजना तैयार करने के लिए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सूचना भेज दी गई है।

सीपीसीबी की रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद सरकार ने गंगा नदी और सहायक नदियों के लिए जल संसाधन मंत्रालय के माध्यम से और अन्य सभी नदियों के लिए पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के माध्यम से नदियों की जल गुणवत्ता को पुनर्स्थापित करने के लिए नदी कार्रवाई योजनाएं तैयार की हैं। इस कार्य योजना के अनुसार नदी कार्रवाई योजना पर्याप्त रुप से पूर्ण जलमल शोधन करने में अक्षम शहरी क्षेत्रों से निकलने वाले अपशिष्ट जल को नदी में प्रवाहित होने से रोकने, उसकी दिशा परिवर्तित करने और फिर उसके शोधन के लिए शुरु की गई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 275 नदियों के 302 प्रदूषित नदी खंडों सहित विभिन्न शहरों की इस उद्देश्य के लिए पहचान की गई है। 2011 की जनगणना के अनुसार 35 शहर प्रदूषित नदी खंडों के किनारे स्थित हैं। 46 महानगरों में से जो 35 शहर प्रदूषित नदी खंड के किनारे स्थित हैं, उनमें विजयवाडा, पटना, रायपुर, दिल्ली, अहमदाबाद, सूरत, बडोदरा, श्रीनगर, धनबाद, रांची, बेंगलूर, भोपाल, इंदौर, जबलपुर, मुम्बई, पुणे, नागपुर, ठाणे, पिंपरी-चिंचवाड़, नासिक, कल्याण-डॉबिवली, वसई-विराड, लुधियाना, कोटा, हैदराबाद, लखनऊ, कानपुर, गाजियाबाद, आगरा, मेरठ, इलाहाबाद, कोलकाता, हावड़ा, फरीदाबाद शामिल हैं।

सीपीसीबी ने वर्ष 2008 के दौरान श्रेणी-1 और श्रेणी- 2 शहरों से निकलने वाले जलमल का अनुमान लगाया और यह आकलन किया गया कि इनके जलमल उत्सर्जन के बीच 27 हजार एमएलडी का अंतर था। रिपोर्ट के अनुसार, गंगा बेसिन के 11 राज्यों में आईआईटी कंसोर्टियम के आकलन में कहा गया है कि श्रेणी-1 और श्रेणी- 2 नगरों से 1250 एमएलडी जलमल उत्पन्न होता है। इसे प्रदूषण का एक प्रमुख कारण माना गया है।

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