दुनिया पर गहराता जा रहा साइबर वॉर के खतरे का काला बादल

दुनिया पर गहराता जा रहा साइबर वॉर के खतरे का काला बादलदुनिया पर गहराता जा रहा है साइबर वॉर का काला बादल। (तस्वीर: गूगल से)

लखनऊ। दुनिया के लिए साइबर वॉर एक नई मुसीबत बनता जा रहा है। हालांकि, हैकर्स ने पहले भी कई बार अपना देशप्रेम दिखाने और बताने के लिए दूसरे देशों की सरकारी वेबसाइट्स को निशाना बनाया है। मगर अब हालात पहले जैसे नहीं रहे। दरअसल, कुछ देशों ने अपने दुश्मन देशों के खिलाफ साइबर वॉर करने के लिए सेना की तर्ज पर व्यवस्था करना शुरू कर दिया है।

http://www.gaonconnection.com/taja-khabar/2016/10/03/ngt-website-hacked-against-surgical-strike

युद्ध का यह नया स्वरूप बेहद खतरनाक

भारत और पाकिस्तान के बीच गहराए विवादों में तब एक नया रुख आ गया था, जब भारतीय सेना ने पाकिस्तान अधिग्रहित कश्मीर (पीओके) में सर्जिकल स्ट्राइक करके उरी में हुए हमले का बदला लिया था। इसके बाद जहां एक ओर दोनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया वहीं दोनों देशों के अलग-अलग विभागों ने अपने-अपने तरीके से दुश्मनी निकालने लगे। इस बीच बीते सोमवार को पाकिस्तान के एक हैकिंग ग्रुप ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की आधिकारिक वेबसाइट को हैक कर लिया था। साथ ही, वेबसाइट के होमपेज पर एक मैसेज भी पढ़ाने लगे कि यह कार्रवाई भारतीय सेना द्वारा किए गए सर्जिकल स्ट्राइक का बदला है। इसकी सूचना मिलते ही देश में इंटरनेट की सुरक्षा को बढ़ाने की कवायद शुरू कर दी गई। इससे पहले भी पाकिस्तान की ओर से दो बार भारत में साइबर हमला हो चुका है। इसके बाद एक बार फिर यह बात जोर पकड़ने लगी कि कहीं दोनों देशों के बीच साइबर वॉर का आगाज न हो जाए। इस बीच दोनों देशों में एक-दूजे के टीवी चैनल्स के प्रसारण के समय को भी लेकर विवाद गहराता जा रहा है। युद्ध के इन नए तरीकों में साइबर हमला बेहद खतरनाक माना जाता है।

एनजीटी की साइट को हैक कर दिया था ये संदेश।

अमेरिका साइबर वॉर बना चुनावी मुद्दा

हालांकि, भारत और पाकिस्तान ही नहीं वरन दुनिया के कई देशों के बीच साइबर युद्ध का खतरा अब बढ़ चला है। इंटरनेट के इस युग में इस बात से अब इंकार नहीं किया जा सकता कि दुनिया में अब जंग में खून-खराबा करने के बजाय साइबर हमला करके दुश्मन देशों को ज्यादा नुकसान पहुंचाया जा सकता है। इस खतरे को ही भांपते हुए अमेरिका ने यह बयान जारी था कि इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने अपने यहां बाकायदा एक ऐसी फौज का गठन किया है, जिसमें हैकर्स भर्ती किए गए हैं। रूस के खिलाफ भी अमेरिका ने आधिकारिक बयान देते हुए कहा है कि वह हैकर्स के जरिए उनके देश को नुकसान पहुंचाने की कोशिश में जुटा हुआ है। अपने बयान में अमेरिका ने सभी देशों को आगाह करते हुए साफ कहा है कि कई देश साइबर युद्ध की आधिकारिक तैयारियों में मशगूल हैं। यहां तक कि साइबर हमले का यह डर अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में भी एक मुद्दा बन चुका है। प्रत्याशी इस मसले पर अपने-अपने तरीके से मतदाताओं को रिझाने में लगे हुए हैं।

इस डर से न बनें अंजान

इस बीच वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के सुरक्षा प्रमुख और स्विट्जरलैंड फेडरल ऑफिस के पूर्व जनरल डायरेक्टर जीन ल्यूक वेज ने भी कहा है कि साइबर हमला अब एक गंभीर चु्नौती का रूप लेता जा रहा है। यह विश्व के लिए एक चिंता का विषय बन चुका है। उन्होंने दुनिया को आगाह करते हुए अपने बयान में कहा है, “दुनिया भले ही इंटरनेट की दुनिया में तरक्की करती जा रही हो। मगर वह इंटरनेट के अन्य दुष्परिणामों को लेकर अंजान नहीं बन सकती।”

इन देशों को भी सता रहा साइबर हमले का डर

यूनाइटेड स्टेट, चीन, रूस, इजरायल और यूनाइटेड किंगडम ने भी दुनिया को आगाह करते हुए समय-समय पर यह बयान दिया है कि साइबर हमले का डर अब गहराने लगा है। इस बात को जानकर तब डर और गहरा जाता है जबकि इन सभी देशों को साइबर की दुनिया में सुपरपावर की संज्ञा दी जाती है। वहीं, बीते वर्षों में झांक कर देखें तो साफ नजर आता है कि साइबर हमलों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। यही कारण है कि साल 2009 में जहां इनकी संख्या लाख में सीमित थी वहीं वर्ष 2015 में विश्व में साइबर हमलों की संख्या बढ़कर 60 लाख के करीब पहुंच चुकी है। यह आंकड़ा फाइनेंशियल टाइम्स ने जारी किए थे।

ययूएस ने बनाई अपनी अलग स्पेशल सााइबर फौज।

यूएस ने छह साल पहले शुरू की थी तैयारी

यूनाइटेड स्टेट ने साल 2010 में ही यूएस साइबर कमांड नाम की एक संस्या का गठन करते हुए आर्मी, एयरफोर्स, नेवी और मरीन विभाग को एक ही छत के नीचे लाकर अपनी साइबर शक्तियों को एकजुट करना शुरू कर दिया था। इस परियोजना में अरबों रुपए का खर्च किया गया था। आज आलम यह है कि वर्ष 2014 में यूएस साइबर कमांड में जहां 1800 साइबर वारियर्स को रखा गया था वहीं अब इस विभाग में इनकी संख्या करीब छह हजार का आंकड़ा पार चुका है।

रूस, चीन और लंदन भी कम नहीं

लंदन ने भी कर रखी है खास तैयारी।

इस साइबर युद्ध की तैयारी में चीन भी कहीं से कम नहीं है। यूं भी चीन साइबर वारफेयर के लिए पहले से ही काफी मजबूत है। वहीं, रूस को तो इस अनोखे युद्ध का महारथी कह सकते हैं क्योंकि वर्ष 2008 में ही रूस ने साइबर हमला करना शुरू कर दिया था, जिसके आधिकारिक आंकड़े भी जारी किए जा चुके हैं। यही नहीं यूक्रेन को भी इस बात पर पूरा विश्वास है कि साल 2014 में रूस ने साइबर हमले को उसके खिलाफ अंजाम दिया था। वहीं, इजरायल ने भी अपने यहां साइबर हमले की पूरी तैयारी कर रखी है। वहीं, यूरोप में देखा जाए तो कई मीडिया रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करते हैं कि लंदन में भी साइबर हमले से सुरक्षा के नाम पर कई बड़ी तैयारियां की जा चुकी हैं।

इरान भी इस जंग का बड़ा योद्धा

वहीं, इरान और दक्षिण कोरिया को भी इस जंग के लिए हैकर्स की एक मुफीद जगह में शुमार है। यूएस पर किए कई साइबर हमलों के तार दक्षिण कोरिया तक जाते भी पाए गए हैं। वहीं, इरान ने भी ऐसे कई हमलों को अंजाम दिया है। इरान के एक हैकर्स का ग्रुप जिनका नाम रॉकेट किट्टेन है, को वर्ष 2014 में कई साइबर हमलों का दोषी पाया गया था। इस ग्रुप ने सउदी अरब में 18, यूएस में 17, इरान में 16, नीदरलैंड्स में 8, इजरायल में 5, जॉर्जिया में 4, टर्की व यूके में तीन-तीन, जर्मनी व अफगानिस्तान में दो-दो और अन्य देशों में करीब चार हमले करना स्वीकार किया था।

http://www.gaonconnection.com/desh-duniya/2016/10/04/petition-against-pakistan

ऐसे में इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि दुनिया पर साइबर युद्ध का खतरा गहराता जा रहा है। भले ही इसमें खून-खराबा नहीं होता है मगर यह युद्ध किसी भी देश की आर्थिक रीढ़ को कमजोर कर सकने में सक्षम है। साथ ही, दुश्मन देशों को अपने प्रतिद्वंद्वियों की खूफियास सूचना मुहैया कराने का आसान रास्ता भी है।

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