प्रकृति से प्रेम है तो बनाएं पर्यावरण विज्ञान में करियर

प्रकृति से प्रेम है तो बनाएं पर्यावरण विज्ञान में करियरफोटो प्रतीकात्मक।

कहते हैं कि दिन में कुछ समय प्रकृति के करीब रहकर गुजारना चाहिए। इंसान का प्रकृति से गहरा संबंध रहेगा तो पृथ्वी पर जीवन भी संतुलित रहेगा। अगर आपको प्रकृति से खास जुड़ाव है तो आप इस दिशा में अपना करियर भी बना सकते हैं। इसके लिए आप पर्यावरणवि के क्षेत्र में जा सकते हैं। इस वर्ग में पर्यावरण पर इंसानी गतिविधियों से होने वाले असर का अध्ययन किया जाता है।

पर्यावरण विज्ञान क्या है?

पर्यावरण विज्ञान में पर्यावरण पर अध्ययन किया जाता है। इसमें मानव का पर्यावरण से संबंध तथा उसके प्रभाव सहित विभिन्न घटक तथा पहलू शामिल है। इस क्षेत्र में व्यवसायी, प्राकृतिक पर्यावरण के संकट की चुनौतियों का सामना करने के प्रयत्न करते हैं।

कौन होते हैं पर्यावरणविद?

पर्यावरण विज्ञान मूल रूप से ऊर्जा संरक्षण, जैव विविधता, जलवायु परिवर्तन, भूजल, वायु व जल प्रदूषण, औद्योगिक प्रदूषण व प्लास्टिक के जोखिम को दूर करने के लिए विकसित की गई प्रौद्योगिकियों का अध्ययन है। यह कार्य जिनके द्वारा किया जाता है, उन्हें एनवायर्नमेंटलिस्ट (पर्यावरणविद) कहा जाता है। इनका पर्यावरण सुरक्षा संबंधी कार्य विज्ञान व इंजीनियिरग के विभिन्न सिद्धांतों के प्रयोग से आगे बढ़ता है। इसमें उसे प्रशासनिक, सलाहकार व सुरक्षा तीनों स्तरों पर काम करना पड़ता है।

रोजगार की संभावनाएं

कई सरकारी और गैर सरकारी एजेंसियां, एनजीओ, फर्म और कॉलेज हैं, जहां इन प्रोफेशनल्स को कई पदों पर काम मिलता है। वेस्ट ट्रीटमेंट इंडस्ट्री, रिफाइनरी, डिस्टिलरी, माइन्स फर्टिलाइजर प्लांट्स, फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री व टेक्सटाइल मिल्स में एनवायर्नमेंटल साइंटिस्ट के रूप में नौकरी मिलती है। रिसर्चर, एनवायर्नमेंटल जर्नलिस्ट व टीचर के रूप में भी कई कंपनियां जॉब देती हैं।

ये भी पढ़ें- जब डिस्कवरी और नेशनल जियोग्राफिक का दौर नहीं था, तब हम इनसे सरल भाषा में साइंस समझते थे

पर्यावरणविद के कार्य

एक पर्यावरण वैज्ञानिक पर्यावरण या जीवन को नुकसान पहुंचान वाले तत्वों पर रिसर्च करता है। वह उनके असर को खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ाता है। ये रिसर्च आमतौर पर डेटा आधारित होते हैं।

इसमें हवा, पानी, मिट्टी के नमूनों को एकत्र कर इसका पर्यावरण पर पड़ने वाले असर के बारे में जानकारी हासिल की जाती है। इनका सूक्ष्म स्तर पर विश्लेषण करना होता है। इसके बाद जर्नल्स और रिपोर्ट के जरिए प्रेजेंटेशन देना होता है, जिसमें अपने रिसर्च के बारे में विस्तार से जानकारी देनी होती है।

इसके साथ ही पर्यावरण वैज्ञानिक वायु प्रदूषण जैसी समस्याओं को रोकने के लिए पेड़ लगाने की दिशा में भी काम करता है। वह एक योजना बनाता है और इसके जरिए वह देश के वातावरण को ठीक रखने में निर्णायक भूमिका भी निभा सकता है।

वह सरकारी अधिकारियों को नियमों और नितियों के निर्धारण करने की सलाह देता है। वह पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले व्यापार व कंपनियों की ओर से फैलाए जाने वाले प्रदूषण को कम करने जैसे विषयों पर अपनी राय दे सकता है।

छात्र-छात्राओं के लिए संभावनाओं से भरा है ये क्षेत्र।

पर्यावरण विज्ञान में कई अवसर और भी हैं

  • साइंटिस्ट
  • रिसर्चर
  • इंजीनियर
  • कंजरवेशनिस्ट
  • कम्प्यूटर एनालिस्ट
  • लैब असिस्टेंट
  • जियो साइंटिस्ट
  • प्रोटेक्शन एजेंट
  • एनवायर्नमेंटल जर्नलिस्ट

जरूरी क्षमताएं

  • -जिन्हें एनवायर्नमेंटल साइंस में रुचि है, उन्हें प्रकृति की समझ होनी चाहिए।
  • -करियर में ऊपर तक पहुंचने के लिए उनकी कम्युनिकेशन स्किल अच्छी होनी चाहिए।
  • -टेक्नोलॉजी का भी अच्छा ज्ञान होना चाहिए।
  • -इसके साथ ही समस्या को समझ कर उसे डिफाइन करने की क्षमता, डेटा जमा करने और उसका विश्लेषण करने की क्षमता जैसे गुण भी जरूरी हैं।

प्रमुख संस्थान

  • जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली
  • जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली
  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एनवॉयर्नमेंटल मैनेजमेंट, मुंबई
  • राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, इंदौर
  • लखनऊ विश्वविद्यालय सहित उत्तर प्रदेश के कई दूसरे विश्वविद्यालय में पढ़ाया जाता है।

योग्यता

पर्यावरण वैज्ञानिक बनने के लिए आपको बीएससी और एमएससी की डिग्री हासिल करनी होती है। इसके बाद आप एमफिल या रिसर्च भी कर सकते हैं। देश में कई यूनिवर्सिटी और इंस्टीट्यूट में इसकी पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध है। यही नहीं आपको पढ़ाई के दौरान स्टैंडर्ड लैब की सुविधा भी मिलती है। कोर्स को पूरा करने के बाद आप बतौर साइंटिस्ट अपनी सेवाएं दे सकते हैं।

कई तरह के कोर्स उपलब्ध हैं

एनवायर्नमेंटल साइंस से संबंधित कई कोर्स हैं। वे न सिर्फ एनवायर्नमेंटल साइंस का गहरा ज्ञान देते हैं, बल्कि प्रोफेशनल्स को उस फील्ड में स्थापित करने के लिए कई तरह के कौशल भी प्रदान करते हैं। इसमें उन्हें थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल ज्ञान भी दिया जाता है, ताकि छात्र आगे चल कर हर तरह की जिम्मेदारी उठा सकें। कई कॉलेज पर्यावरण विज्ञान से डिप्लोमा कोर्स भी कराते हैं।

ये भी पढ़ें- हार्ट अटैक : दिल न खुश होता है न दुखी, दिनचर्या बदलकर इस तरह करें बचाव

More Stories


© 2019 All rights reserved.

Top