पर्याप्त सप्लाई के बावजूद क्यों महंगी हो रही सरसों?

पर्याप्त सप्लाई के बावजूद क्यों महंगी हो रही सरसों?गाँव कनेक्शन

लखनऊ। सरसों की मजबूत सप्लाई के बावजूद देश में सरसों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी क्यों होती जा रही है? सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि बीते दो महीनों में ही सरसों की कीमतों में 700 रुपए प्रति क्विंटल का इज़ाफा हुआ है। इस बार सरकार का सरसों उत्पादन का लक्ष्य भी पिछले साल से करीब 10 फीसदी ज्यादा है। इसके बावजूद सरसों के भाव में तेजी नहीं थम रही है।

सरसों की बढ़ती कीमतों पर लगाम कसने के लिए देश का सबसे बड़ा सरसों उत्पादक राज्य राजस्थान लिमिट लगाने की योजना पर विचार कर रहा है। राजस्थान की मंडियों में सरसों की मौजूदा कीमत 3850-4213 रुपए प्रति क्विंटल के बीच है। जबकि, एनसीईडीएक्स सितंबर कॉन्ट्रैक्ट यानि वायदा बाज़ार में भी सरसों के दाम 4,600 रुपए प्रति क्विंटल के पार बने हुए हैं।

राजस्थान में लग सकती है स्टॉक लिमिट

सरसों का लगातार बढ़ता भाव राज्य सरकार के लिए चिंता का सबब बन गया है। राज्य सरकार ने कहा कि सरसों की कीमत अगर 4,600 रुपए प्रति क्विंटल के पार जाती हैं, तो स्टॉक लिमिट लगा दी जाएगी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक बीते हफ्ते राजस्थान में सरसों 4,100-4,200 रुपए प्रति क्विंटल बिकी है। पिछले दो महीने के दौरान सरसों की कीमतों में 10 फीसदी तक की बढ़त दर्ज की गई है। 

देश के कुल सरसों उत्पादन में राजस्थान की हिस्सेदारी 50 फीसदी है। नवंबर में राज्य सरकार ने सरसों की कीमतें 4,600 के पार जाने पर स्टॉक लिमिट लगाई थी। नवंबर में होलसेलर्स पर 100 टन सरसों बीज और 10 टन सरसों तेल रखने की स्टॉक लिमिट लगाई थी। जबकि रिटेलर्स 10 टन सरसों बीज और 1 टन से ज्यादा सरसों तेल नहीं रख सकते थे। स्टॉक लिमिट फरवरी में खत्म हो गई थी। राजस्थान में रोज 95,000 बोरे सरसों की आवक आ रही है। पिछले महीने तक राजस्थान में 2.5 लाख बैग सरसों के बीज की आवक थी। 

राजस्थान में 24 फीसदी बढ़ा उत्पादन

देश के सबसे बड़े उत्पादक राज्य राजस्थान में इस साल सरसों का कुल उत्पादन 35.77 लाख टन हुआ है। जबकि, पिछले साल 28.78 लाख टन सरसों का उत्पादन हुआ था। देश के कुल सरसों उत्पादन में राजस्थान की हिस्सेदारी 50 फीसदी से भी ज्यादा है। इस साल रबी सीजन में सरसों का उत्पादन बेहतर रहने का अनुमान था। 

इस बार सरसों में तेल की मात्रा भी ज्यादा है। जिससे इस साल सरसों तेल का प्रोडक्शन बढ़ने का अनुमान है। इस साल 24.62 लाख हेक्टेयर में सरसों की खेती हुई है, जबकि पिछले साल 24.34 लाख हेक्टेयर में सरसों की खेती हुई थी। अब जब सारे हालात सामान्य हैं तो कीमतों में तेज़ी की आख़िर वजह क्या है? गोरखपुर के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ संजीत कुमार बताते हैं, ’कीमतों में बढ़ोतरी की वजह त्योहारी सीज़न भी हो सकता है। इसके अलावा मांग में बढ़ोतरी के चलते भी कीमतों पर असर पड़ता है।’’ डॉ संजीत कुमार के मुताबिक़ सरसों के तेल की मांग साल के बारहों महीने बनी रहती है सप्लाई में ज़रा भी कमी आते ही कीमतों में तेज़ी से इज़ाफ़ा होता है।

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