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तबला वादक पं. लच्छू महाराज का निधन, सूना हो गया बनारस घराना

तबला वादक पं. लच्छू महाराज का निधन, सूना हो गया बनारस घरानाgaonconnection

मस्तमौला स्वभाव के लोकप्रिय तबला वादक पंडित लच्छू महाराज अब हमारे बीच नहीं हैं। उन्होंने बनारस घराने की तबला बजाने की परंपरा को आगे बढ़ाया था। उनके जाने के बाद उनका संगीत का घराना बनारस भी सूना हो गया। 

उनके निधन के शोक में बनारस घराने की गायिका गिरजा देवी ने कहा, ''ऐसा कलाकार बार-बार नहीं पैदा होता। उनके पास तबले की जो बारीकियां थीं, वो उन्हीं के साथ चली गईं। मेरे पास कहने के लिए शब्द नहीं है।'' बहुत कम लोग जानते होंगे कि लच्छू महाराज अभिनेता गोविंदा के रिश्ते में मामा थे।

गोविंदा ने बचपन में ही बना लिया था गुरु

बताया जा रहा है कि लच्छू महाराज के निधन से आहत गोविंदा अपनी शूटिंग कैंसल कर बनारस पहुंच रहे हैं। अभिनेता गोविंदा को तबला बजाना लच्छू महाराज ने ही सिखाया था। वह जब बनारस आते थे, साथ मिलकर ही तबला बजाया करते थे। लच्छू महाराज को गोविंदा ने बचपन में ही अपना गुरु मान लिया था। जब लच्छू महाराज मुंबई जाते तो वे गोविंदा के घर में ही रुकते थे।

कुमार विश्वास ने जताया दुख

उनकी शिष्य परंपरा के सैकड़ों कलाकार देश-दुनिया भर में हुनर का परचम लहरा रहे हैं। पं. लच्छू महाराज के बचपन का नाम लक्ष्मीनारायण सिंह था। अपने पिता वासुदेव नारायण सिंह से ही उन्होंने तबला वादन की शिक्षा ली थी। लच्छू महाराज बेहद सादगी पसंद शख्स थे। इसी कारण उन्होंने कोई सम्मान नहीं लिया। उनके निधन की ख़बर पर मशहूर कवि और आप नेता डॉ. कुमार विश्वास ने श्रद्धांजलि देते हुए फेसबुक पर लिखा, ''लय और ताल के लास्यमय विग्रह विश्वप्रसिद्ध तबला वादक लक्ष्मी नारायण सिंह 'लच्छू महाराज' जी ने बीती अर्धरात्रि को अंतिम सांस ली। ईश्वर उनकी आत्मा को शान्ति दें! ॐ शांतिः!''

पद्मश्री लेने से कर दिया था इंकार

लच्छू महाराज ने टीना नाम की फ्रांसीसी महिला से विवाह किया था। जिससे उन्हें एक बेटी चंद्रा नारायणी हैं, जो अपनी मां के साथ स्विट्जरलैंड में ही रहती है। बेटी नारायणी और पत्नी टीना सूचना मिलते ही भारत के लिए रवाना हो गए हैं। लच्छू महाराज का जन्म 16 अक्टूबर 1944 को संकटमोचन इलाके में हुआ था। तबला वादन में उनके अमूल्य योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने साल 1972 में उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा था लेकिन उन्होंने पद्मश्री लेने से इनकार कर दिया था। बाद में ये सम्मान उनके शिष्य पंडित छन्नू लाल मिश्र को मिला।

जब आठ साल की उम्र में वे मुंबई में एक प्रोग्राम के दौरान तबला बजा रहे थे तो जाने-माने तबला वादक अहमद जान ने कहा था कि काश लच्छू मेरा बेटा होता।

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