तेज धूप से फीकी पड़ रही आम की मिठास

तेज धूप से फीकी पड़ रही आम की मिठासgaonconnection

मलिहाबाद (लखनऊ)। तेज धूप और गर्मी से इस बार आम उत्पादकों का नुकसान हो रहा हैं। बारिश में हो रही देरी से डालों मे पक रहा आम अपनी भरपूर मिठास नहीं दे पा रहा है। भरपूर मिठास व रंग न आने के कारण आम के भाव दिन हर दिन घटते जा रहे हैं।    

आम की अगेती किस्मों के साथ दशहरी पेड़ों मे पकने लगी है। मौसम अनुकूल न होने के कारण पक रहे आम में आकर्षण व भरपूर स्वाद नहीं आ पा रहा है। मलिहाबाद के बागवान अजयकान्त बताते हैं, “दशहरी और अन्य आमों मे लाजवाब स्वाद बरसात होने के बाद ही आता है। इस समय तेज धूप व गर्मी की मार झेल रहा आम डालों मे पक रहा है, जिसकी तादाद दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।”

आम उत्पादक संतोष द्विवेदी कहते हैं, “आम के बागों मे कच्चे आम की टूट तेजी से चल रही है। बिक्री के लिए आम से भरी पेटियां व प्लास्टिक के कैरेट मण्डियों मे भरे पड़े हैं। कई वर्षों से यहां बन रही फल मण्डी आज तक तैयार नहीं हो सकी, जिसके कारण आढ़ती लखनऊ, हरदोई राजमार्ग की पटरियों व फुटपाथों पर अपनी आढ़त सजाए हैं।”

मण्डी में सहारनपुर, झांसी व पंजाब सहित मुम्बई के व्यापारी आकर आम की खरीद कर रहे हैं। शुरूआत मे दशहरी आम का भाव 2200 रुपया प्रति कुन्तल की दर से रहा, जो गिरते हुए इस समय 1400 से 1500 रुपया प्रति कुन्तल आ गया है। इसका मुख्य कारण मण्डी मे बढ़ रही लगातार आम की आमद व निर्यात की कमी है।

इस मण्डी के अतिरिक्त फरहतपुर, कानपुर, सण्डीला, दुबग्गा, इटावा, आगरा, इलाहाबाद, सहारनपुर, गोरखपुर, झांसी, लुधियाना व दिल्ली की मण्डियों मे बिक्री के लिए आम का निर्यात बागवान कर रहे हैं। इन सभी मण्डियों मे आम के भाव लगभग एक समान हैं। 

आम उत्पादक पुष्पाल सिंह यादव बताते हैं, “मण्डियों मे बिक्री की अपेक्षा बागवानों को काफी मूल्य प्राप्त होता है क्योंकि आम को पेड़ से तुड़वाने से लेकर मण्डी तक पहुंचाने के अलावा आढ़तियों के कमीशन की मार भी बागवान को झेलनी पड़ती है।” उद्यान विभाग फल उत्पादन कराने के लिए जिम्मेदार है। 

लेकिन आम उत्पादकों को किसी प्रकार की सरकारी सहायता आम फलपट्टी क्षेत्र के बागवानों को नहीं दी जा रही है, जबकि इस आम फलपट्टी क्षेत्र से कई करोड़ रुपयों की वसूली सरकार द्वारा मण्डी शुल्क के नाम पर की जाती है। वर्षों से वसूले जा रहे इस शुल्क से होने वाले विकास कार्य सरकार कहां करा रही है इसकी जानकारी किसी बागवान को नहीं।                  

रिपोर्टर - सुरेन्द्र कुमार

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