तीन बीघे बर्बाद फसल की राहत राशि सिर्फ 100 रुपए

तीन बीघे बर्बाद फसल की राहत राशि सिर्फ 100 रुपएgaonconnection

महोबा। जिले के किसान कालका प्रसाद की सूखे से इस रबी की पूरी गेहूं की फसल चौपट हो गई। कालका को सरकार से कुछ उम्मीद थी, लेकिन जब कालका अपने गाँव से 50 रुपए किराया खर्च कर बैंक पहुंचा तो पता चला कि उसके खाते में राहत के नाम पर केवल सौ रुपए आए हैं। यह देख उसके आंसू बह निकले।  

मामला महोबा तहसील के बबेड़ी गाँव का है जहां के कालका प्रसाद ने अपने तीन बीघा खेत में गेहूं की फसल बोयी थी, जो भयानक सूखे के कारण सूख गयी। कालका ने लेखपाल के चक्कर काटकर उसे अपने सूखे खेत दिखाए और राहत दिलवाने की गुज़ारिश की। कई महीनों के चक्कर लगाने के बाद कालका को पता चला कि उसके बैंक खातों में राहत राशि आ गई है।

कालका खुश था क्योंकि सूख चुके खेतों के बाद यह राशि उसके और परिवार के गुज़र-बसर का आखिरी सहारा थी। कालका तुरंत गाँव से काफी दूर कबरई के इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक में सूखा राहत का पैसा निकालने गया। लेकिन जब बैंक मैनेजर ने बताया कि उसके खाते में मात्र 100 रुपए 7 मई 2016 को आए हैं तो ये सुनते ही कालका बैंक में ही फूट-फूटकर रोने लगा।

वहां मौजूद लोगों द्वारा रोने का कारण पूछे जाने पर कलका ने कहा कि अपने गाँव बबेड़ी से वह 50 रुपए किराया लगाकर बैंक से सूखा राहत का पैसा निकालने आया था और उसकी जेब में अब वापसी का किराया भी नहीं है। उदास कालका को लोगों ने समझा-बुझाकर वापसी का किराया देकर घर भेज दिया। कालका बताते हैं “मैंने जब लेखपाल से यह पूछा कि सौ रुपए क्यों डाले तो वो बोला जाओ डीएम के पास वहीं से तुम्हें पैसा मिलेगा।” 

कालका अपनी बूढ़ी मां के साथ टूटे-फूटे झोपड़े में कैसे दिन गुज़ार रहा है इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। कालका अकेला नहीं उसकी तरह सरकारी महकमे द्वारा कई अन्य गरीब किसान परिवारों का भी मज़ाक बनाया गया। गाँव के ही प्रताप, देवरती जैसे कई किसानों को तो अभी तक राहत का एक रुपया भी नहीं मिला। इस सम्बन्ध में क्षेत्र के लेखपाल कालीदीन और उपजिलाधिकारी दोनों से उनके सरकारी नंबरों पर बात करनी की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।

 रिपोर्टर - पंकज परिहार

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