तीन हाईस्कूल पर एक शिक्षक : बदहाल शिक्षा व्यवस्था की कहानी

तीन हाईस्कूल पर एक शिक्षक : बदहाल शिक्षा व्यवस्था की कहानी

प्रतापगढ़। ग्रामीण इलाकों के छात्र-छात्राओं को बेहतर शिक्षा देने के सरकार भले ही कितने दावे करें लेकिन जमीन पर हकीकत कुछ और ही है। प्रतापगढ़ में राजकीय विद्यालयों की हालत दयनीय है। शिक्षकों के अभाव में कई दो विद्यालय महीनों से बंद पड़े हैं।

प्रतापगढ़ में जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर बाबा बेलखरनाथ ब्लॉक के मोलनापुर ग्राम पंचायत में बना राजकीय विद्यालय पिछले कई महीनों से बंद हैं। स्कूल में कक्षा नौ और 10 में कुल 30 छात्र पंजीकृत हैं। इन्होंने 500 रुपये की फीस भी दी थी। लेकिन, एक दिन भी कक्षाएं न चलने से कई छात्र-छात्राओं की पढ़ाई छूट गई है जबकि कुछ ने दूसरे विद्यालयों में अपना नाम लिखवा लिया है।

मोलनापुर विद्यालय में कक्षा 10 में प्रवेश लेने वाले अशोक कुमार गौड़ बताते हैं, ''मेरी पढ़ाई बंद हो गई है। घर में इतने पैसे नहीं है कि किसी प्राइवेट स्कूल में दाखिला करवा सकूं। इस स्कूल में तो एक दिन कक्षा ही नहीं चली।" अशोक की बहन मनीता भी इसी विद्यालय में छात्रा हैं उसकी भी पढ़ाई बंद हो गई है।

विद्यालय में ताला लगने की वजह यहां स्टॉफ  का न होना है। स्कूल में प्रधानाचार्य से लेकर अध्यापक और चपरासी तक मात्र एक ही कर्मचारी सब रामअवध हैं। रामअवध मूल रूप से राजकीय विद्यालय आसपुर देवसरा में तैनात हैं उन्हें इस विद्यालय का अतिरिक्त प्रभार मिला है। राजकीय विद्यालय मोलनापुर के साथ ही राम अवध पर ईमलीडाड विद्यालय की भी अतिरिक्त जिम्मेदारी हैं। शिक्षिकों के अभाव में मोलनापुर और ईमलीडाड के विद्यालय महीनों से बंद पड़े हैं।

विद्यालय के प्रभारी प्रधानाचार्य रामअवध बताते हैं, ''तीन-तीन स्कूल हैं और अकेला मैं। चुनाव में भी ड्यूटी लगती है इसलिए दो विद्यालय बंद पड़े हैं। एक चपरासी तक नहीं है जो ताला खोल सके। ये सिलसिला आज का नहीं है 2011 में इन स्कूलों के निर्माण के साथ ही चल रहा है।"

रामअवध आगे बताते हैं, ''दरअसल इन स्कूलों में उच्चीकृत कर 10वीं तक चलाया जा रहा है। राजकीय विद्यालय मोलनापुर में 2011 में इंटरकॉलेज के हिसाब से बिल्डिंग बनी थी। लेकिन शिक्षकों समेत दूसरे स्टॉफ  की तैनाती नहीं हुई। इस वर्ष सिर्फ तीन नए दाखिए हुए थे। बाकी पिछले सत्र के छात्र थे।"

मोलनापुर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता नितिन मिश्रा बताते हैं, ''जब राजकीय स्कूल का निर्माण शुरू हुआ था इलाके को लोगों को लगा था अब उनके बच्चे भी आसानी से स्कूल जा सकेंगे लेकिन हुआ इसका उलटा। विद्यालय में पढ़ाई शुरू न होने का सबसे ज्यादा नुकसान इलाके में बेटियों को हुआ है।"

मोलकापुर गांव की कोमल और शिवानी इसी विद्यालय की छात्रा थीं लेकिन अब उन्होंने अपना दूसरे स्कूल में लिखा लिया है। कोमल बताती हैं, ''ये विद्यालय नजदीक था लेकिन कभी खुला नहीं तो मजबूरी में कई किलोमीटर दूर सुंदर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जाते हैं। जंगल का रास्ता है डर लगता है लेकिन क्या करें।"

शिक्षा विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में कुल 35 राजकीय विद्यालय हैं। दो-चार को छोड़ कर सभी की स्थिति एक जैसी है। इस बारे में बात करने पर जिला विद्यालय निरीक्षक शिवकांत ओझा ने राजकीय विद्यालयों में स्टॉफ  की कमी की बात मानते हुए कहा, ''नए विद्यालयों में स्टॉफ की भारी कमी है। इसलिए रेगुलर विद्यालय के शिक्षकों को ही अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन इलाहाबाद मंडल में अब सहायक अध्यापकों की नियुक्ति हो गई है। आचार संहिता हटते ही सब ठीक हो जाएगा।"

रिपोर्टर - मो. सलीम खान

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