तीन ज़िले बनेंगे एक्सपोर्ट के लिए टाउन ऑफ एक्सीलेंट

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वाराणसी। यूपी में उत्पादित हो रहा हर प्रकार का सामान सही समय व सही तरीके से ज्यादा से ज्यादा निर्यात हो सके इसके लिए प्रदेश सरकार विशेष ध्यान दे रही है। इतना ही नहीं प्रदेश से होने वाले निर्यात में आ रहीं समस्याओं को समझने और मुख्य सचिव आलोक रंजन सहित अन्य अधिकारियों के साथ चर्चा करने के बाद केंद्रीय वाणिज्य सचिव रीता तेवतिया ने कहा कि केंद्र और राज्य मिलकर काम करेंगे तो निर्यात के क्षेत्र में बेहतर परिणाम सामने आएंगे।

बजट सत्र में आएगी नई निर्यात नीति

मुख्य सचिव ने बताया कि प्रदेश के एक्सपोर्ट क्लस्टर में आधारभूत ढांचा मजबूत करने के लिए इस बार सप्लीमेंट्री बजट सत्र में नई निर्यात नीति लाई जाएगी। वैट का ऑनलाइन आवेदन लेकर एक महीने में ऑनलाइन रिफंड की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने बताया कि 81 हजार करोड़ रुपए के निर्यात के साथ प्रदेश का देश में पांचवां स्थान है। मुख्य सचिव ने बताया कि केंद्रीय वाणिज्य सचिव के साथ वार्ता में तय हुआ कि कृषि क्षेत्र में निर्यात की संभवानाएं हैं, लेकिन इसके लिए वैज्ञानिक प्रबंधन की जरूरत है।

सभी देशों में निर्यात पर मिलेगा इंसेंटिव

वाणिज्य सचिव ने बताया कि अब तक अफ्रीका और इस जैसे अविकसित देशों में निर्यात पर ही इंसेंटिव मिलता था, लेकिन अब कहीं भी निर्यात पर यह इंसेंटिव दिया जाएगा। सचिव ने बताया कि निर्यातकों ने उनके साथ बैठक में परिवहन में अधिक खर्च होने और कागजी प्रक्रिया पूरी करने में अधिक समय खर्च होने सहित कई समस्याएं बताई हैं। केंद्रीय सचिव ने बताया कि निर्यात में परिवहन के खर्च कम करने के लिए केंद्र में गठित समिति काम कर रही है,जबकि प्रक्रिया को आसानी से कम समय में पूरे करने के उपाय भी तलाशे जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश से निर्यात में सहायता के लिए भी व्यवस्था की जा रही है। सचिव ने बताया कि प्रदेश के एक्सपोर्ट क्लस्टर में फोकस्ड स्किल डेवलपमेंट के काम किए जा रहे हैं, जबकि बनारस में छह जियोग्राफिकल इंडीकेशन निर्धारित कर व्यापारियों के रजिस्ट्रेशन व एथॉराइजेशन का काम शुरू कर दिया गया है।

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