तम्बाकू से हर सवा छह सेंकेड में होती है एक की मौत

तम्बाकू से हर सवा छह सेंकेड में होती है एक की मौतgaonconnection

लखनऊ। “तम्बाकू के सेवन से सवा छह सेकेण्ड में एक मौत होती है। लगभग हर साल नौ लाख भारतीय तम्बाकू सेवन से मरते हैं, जो कि क्षय रोग, एड्स और मलेरिया से होने वाली मौतों से अधिक हैं। तम्बाकू में चार हजार किस्म के जहर होते हैं, जो जानलेवा होते हैं। तम्बाकू से रोकथाम के लिए बच्चों और युवाओं के लिए जागरूकता ही मुख्य बचाव है।” ये बातें सीएमओ कार्यालय में हुई प्रेस कांफ्रेंस में स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी बीबी यादव ने कहीं। 

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की 2015-2016 की रिपोर्ट के मुताबिक हमारे देश में प्रतिदिन 5500 से ज्यादा युवा तम्बाकू का सेवन शुरू करते हैं। देश में प्रतिदिन 3500 से ज्यादा लोगों की मौत होती हैं। भारत में कैंसर से मरने वाले 100 रोगियों में से 40 तम्बाकू के प्रयोग के कारण मरते हैं। लगभग 95% मुंह के कैंसर तम्बाकू सेवन करने वाले व्यक्तियों में होते हैं। 2015 में धूम्रपान से 65 लाख लोगों की मौत हुई है। तम्बाकू के सेवनकर्ता प्रतिवर्ष 22% बढ़ रहे हैं। सेकेण्ड हैण्ड स्मोक के कारण प्रतिवर्ष छह लाख प्रत्यक्ष व एक करोड़ लोग गंभीर बीमारियों के शिकार हो जाते हैं।

कानपुर से 30 किमी दूर शिवराजपुर ब्लॉक के रहने वाले सुरेंद्र सैनी का पुत्र दस माह के इलाज के बाद भी नहीं बच पाया क्योंकि उसे मुंह का कैंसर था। सुरेंद्र बताते हैं कि अजय अकेला लड़का था चार बेटियों में। उसकी परवरिश में कोई कमी नहीं रखी। मैं नहीं जानता था कि जिसको मैं अपने बुढ़ापे का सहारा मान रहा था उसकी मौत केवल 23 साल में तम्बाकू खाने से हो जाएगी। रोते हुए वो बताते हैं कि जोड़-तोड़ के पांच लाख रुपए लगाए पर उसे नहीं बचा सके।

वो बताते हैं कि मेरे बेटे अजय की शादी 2012 में हुई थी। अब उसी के सहारे अपनी जिन्दगी जियेंगे और मेरा पोता कभी तम्बाकू का सेवन न करे, मैं इस बात का मैं पूरा ध्यान रखूंगा। मेरा बेटा 14 साल से तम्बाकू खाता था पर इस बात की हमें जानकारी नहीं थी। 

मुझे छह साल बाद पता चला कि वो तम्बाकू बहुत ज्यादा खाने लगा है। मैंने उसकी इसी वजह से 20 साल की उम्र में उसकी शादी कर दी। शायद शादी के बाद वो सुधर जाए पर ऐसा हुआ नहीं। सवा महीने के बाद हमें पता चला तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक आंकड़े के अनुसार तम्बाकू के विभिन्न उत्पादों के प्रयोग से किशोर और युवाओं में मनोदैहिक रोग बढ़ रहे हैं जबकि भारत में प्रति तीन लाख आबादी पर एक मनोचिकित्सक है। देश में 16 लाख नए कैंसर रोगियों के मामले दर्ज होते हैं, जबकि देश में एक प्रतिशत ही डॉ. उपलब्ध हैं। वर्ष 2030 तक धूम्रपान से मरने वालों की संख्या 83 लाख होगी। अन्तर्राष्ट्रीय नशा मुक्ति अभियान के राष्ट्रीय निदेशक कानपुर के योग गुरु ज्योती बाबा का कहना है कि 1989 में 11 लोगों के सहयोग से कानपुर में नशा मुक्ति अभियान की शुरुआत की थी।

रिपोर्टर - नीतू सिंह

Tags:    India 
Share it
Top