तुलसी और कालमेघ की खेती का सही समय

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अहमदपुर (रायबरेली)। किसान वीरेंद्र चौधरी (50 वर्ष) िपछले आठ वर्षों से औषधीय पौधों की खेती कर रहे हैं। उनका कहना है कि मानसून की शुरूआत में तुलसी की खेती फायदेमंद साबित होती है। तुलसी और कालमेघ की खेती करके वीरेन्द्र अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।

वीरेंद्र बताते हैं, “ मैने दो एकड़ में तुलसी, कालमेघ बोया है। इन फसलों की बुवाई जुलाई महीने से शुरू की जाती है। फसल तैयार होने में 90 दिन लग जाते हैं।”

वो आगे बताते हैं, “बीज बुवाई के बाद जब पौधे तैयार होने लगें तब उनकी 45x45 सेमी की दूरी पर रोपाई करनी चाहिए। रोपाई का सर्वोंत्तम समय अगस्त महीने का पहला सप्ताह है। रोपाई के उपरान्त हल्की सिंचाई करनी चाहिए। नवंबर और दिसंबर में इसकी कटाई पूरी कर ली जाती है।”

                                               

राष्ट्रीय औषधीय बोर्ड के अनुसार उत्तर प्रदेश में 2,50,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में औषधीय खेती की जाती है। प्रदेश के गाजीपुर, कन्नौज, अलीगढ़, सोनभद्र और मिर्जापुर जिलों में तुलसी की बड़े पैमाने में की जाती है।

“कम समय में अच्छी कमाई करने के लिए किसान तुलसी की खेती कर सकते हैं। कालमेघ का बाजार भाव 30 से 35 रुपए प्रति किलो है और तुलसी के तेल का रेट 400 से 500 रुपए प्रति लीटर है। मैं कालमेघ, तुलसी का तेल लखनऊ और बरेली के व्यापारियों को बेचता हूं।” वो आगे बताते हैं। 

राष्ट्रीय औषधीय बोर्ड के मुताबिक उत्तर प्रदेश में औषधीय पौधों का व्यापार प्रतिवर्ष पांच हज़ार करोड़ रुपए होता है। भारत में 6,000 से ज्यादा किस्मों के औषधीय पौधे पाए जाते हैं।

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