गंभीर होंगे छोटे दलों के तीखे तीर

गंभीर होंगे छोटे दलों के तीखे तीरप्रतीकात्मक फोटो

लखनऊ। सतसैया के दोहरे जो नाविक के तीर, देखन में छोटै लगैं घाव करैं गंभीर… कवि बिहारी के सोरठा को लेकर कही गई इस बात की उत्तर प्रदेश के सियासी माहौल में खास जगह होगी। दरअसल राष्ट्रीय लोकदल, अससुद्दीदन ओवैसी की ऑल इंडिया इत्तेहादुल मुसलमीन (एआईआईएम), आम आदमी पार्टी, शिवसेना, पीस पार्टी और कुछ अन्य छोटे दल चुनाव में अहम भूमिका निभाने जा रहे हैं।

कई बड़ी पार्टियों की नाक में करेंगे दम

ये दल कुछ कद्दावर प्रत्याशियों को लेकर कई बड़ी पार्टियों की नाक में दम कर देंगे। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते जाएंगे, वैसे-वैसे इनका प्रभाव सामने आने लगेगा। अभी से फिलहाल इन पार्टियों के नेताओं ने दंभ भरना शुरू कर दिया है। इनमें से केवल राष्ट्रीय लोकदल के चौधरी अजीत सिंह ही गठबंधन की बात कर रही हैं, बाकी सारे ही दल अकेले चुनाव मैदान में कूदने की तैयारी में हैं। ऐसे में भले ही खुद हार जायें, मगर दो से तीन फीसदी वोट लेकर ये बड़ों-बड़ों का खेल बिगाड़ने में जरूर सक्षम होंगे।

यह पहली बार लड़ेंगी विधानसभा चुनाव

फिलहाल वर्तमान विधानसभा में राष्ट्रीय लोकदल के चार विधायक हैं। सभी पश्चिमी यूपी की विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों से हैं। इनके अलावा पीस पार्टी के अध्यक्ष डॉ अय्यूब खान खलीलाबाद से विधायक हैं। शिवसेना का कोई विधायक नहीं है। जबकि आम आदमी पार्टी और अससुद्दीदन ओवैसी की ऑल इंडिया इत्तेहादुल मुसलमीन (एआईआईएम) पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ेंगी।

सेक्यूलर खेमे के लिए सबसे बड़ा खतरा छोटे दल

आम आदमी पार्टी, पीस पार्टी, एआईआईएम ये सभी पार्टियां सेक्यूलर खेमे के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुकी हैं। दरअसल इन सबकी राजनीति अब तक भाजपा विरोध की है। ऐसे में इनको वोट भी भाजपा के विरोध वाला ही मिलेगा। ऐसे में आमतौर से सपा, कांग्रेस और बसपा तीनों को ही ये दल नुकसान कर सकते हैं। इनके मजूबत प्रत्याशी कहीं-कहीं तो सेक्यूलर खेमे को हार की ओर भी धकेलने का दमखम रखते हैं।

भाजपा में खलबली मचाएंगे रालोद और शिवसेना

भाजपा के लिए सबसे बड़ी खलबली पश्चिम उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय लोकदल मचा सकता है। दरअसल 2014 के लोकसभा चुनाव में मुजफ्फरनगर में हुए दंगे के बाद रालोद भाजपा के सामने नतमस्तक हो गई। यहां तक की अध्यक्ष अजीत सिंह को अपने गढ़ बागपत और उनके बेटे जयंत को मथुरा से हार का सामना करना पड़ा था। मगर अब माहौल कुछ बदला है। चुनाव विधानसभा के हैं। ऐसे में जाट बाहुल्य पश्चिम उत्तर प्रदेश में बीजेपी को रालोद की कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा। दूसरी ओर शिवसेना की ओर से भी 200 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा की गई है। ये भी भाजपा के लिए खतरे की घंटी साबित होगा।

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