जानें दशहरे पर लखनऊ क्यों आए मोदी

जानें दशहरे पर लखनऊ क्यों आए मोदीलखनऊ के ऐशबाग रामलीला मैदान में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

लखनऊ। दशहरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आखिर ऐशबाग रामलीला स्थल क्यों चुना? यह सवाल सियासी हल्कों को परेशान किए है। क्योंकि पहली बार किसी प्रधानमंत्री ने परंपरा तोड़ते हुए राष्ट्रीय राजधानी से बाहर जनता के बीच विजयादशमी मनाई।

बहरहाल मोदी ने ऐशबाग का चुनाव यूं ही या यूपी में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर किया, इसका जवाब राजनीतिक पंडित ढूंढ रहे हैं। ऐशबाग लखनऊ (पहले अवध) का एक पुराना औद्योगिक क्षेत्र है जिसे सोवियत संघ के माडल के तौर पर विकसित किया गया था। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को सोवियत संघ की तैयार अर्थव्यवस्था में काफी भरोसा था। इस लिहाज से भी ऐशबाग महत्वपूर्ण है। सरकार ने यहां दो कालोनी बनाई थीं ताकि कामगारों को रहने का ठिकाना मिल सके। हालांकि समय बीतने के साथ यहां चल रहे उद्योगों को चुनौतियों का सामना करना पड़ा और एक-एक करके वे बंद हो गए।

फिर भी ऐशबाग क्यों। इस पर कयास जारी है। हालांकि मुगल शासनकाल में ऐसे प्रमाण मिलते हैं जिसमें ऐशबाग सामाजिक सौहार्द्र और अवध के बीच गठजोड़ का केंद्र रहा है। मसलन यहां एक पुरानी झील है, जिसका नाम ‘मोतीझील’ है। रामलीला मैदान के पास ही ईदगाह है। कुछ दूरी पर एक गुरुद्वारा भी है। यानि इलाके की आबादी मिलीजुली है। इस लिहाज से मोदी का मिशन 2017 (यूपी में विधानसभा चुनाव) का आगाज करने का यह बेहतरीन मौका माना जा सकता है।

एक पुरानी कहावत भी है-जिसको न दे मौला उसे दे आसिफ-उ-दौला। 18वीं शताब्दी में नवाब आसिफ-उ-दौला का शासनकाल अवधवासियों के लिए यादगार रहा है। क्योंकि उन्होंने 1780 में क्षेत्र को कड़ी मशक्कत के बाद अकाल से उबारा था। यही नहीं अवध के नवाबों ने यहां रामलीला और ईद मनाने के लिए आवाम को जमीनें दीं। करबला भी इसी इलाके में है। चुनाव में आवाम के बीच संतुलित संदेश जाए, इस लिहाज से भी ऐशबाग का चुनाव बेहतर विकल्प था।

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