महागठबंधन बनता तो बीजेपी को होती मुश्किल

महागठबंधन बनता तो बीजेपी को होती मुश्किलसपा, कांग्रेस और बसपा महागठबंधन बनाकर चुनाव लड़ती तो बीजेपी के लिए यूपी जीतना मुश्किल हो जाता।

अश्वनी कुमार निगम

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अपने दम पर 312 और सहयोगियों के साथ मिलकर 325 सीटें जीतकर रिकार्ड बनाने वाली बीजेपी की जीत में मोदी मैजिक बताया जा रहा है। लेकिन उत्तर प्रदेश की राजनीति पर नजर बनाए रखने वाले राजनीति समीक्षकों का कहना है कि पिछले साल हुए बिहार विधानसभा चुनाव की तर्ज पर सपा, कांग्रेस और बसपा महागठबंधन बनाकर चुनाव लड़ती तो बीजेपी के लिए यूपी जीतना मुश्किल हो जाता।

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राजनीतिक विश्लेषक अमित मिश्रा ने बताया, ‘’उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के परिणामों को विश्लेषण करने पर साफ दिखता है कि मोदी लहर के बाद भी बसपा और सपा को मिले वोटों में गिरावट कम है। आंकड़ों के अनुसार इस बार के चुनाव में बीजेपी को जहां अकेले 3 करोड़ 44 लाख 3 हजार 39 वोट मिले हैं, वहीं बसपा को 1 करोड़ 92 लाख, 81 हजार, 352 वोट मिले जबकि सपा को 1 करोड़ 89 लाख, 23 हजार 689 वोट मिले। इसके साथ ही कांग्रेस को भी 54 लाख, 16 हजार 324 वोट मिले।’’

रविवार को बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने भी बताया था कि अगर यूपी में बिहार की तरह गठबंधन होता तो मोदी लहर का असर नहीं पड़ता। चुनाव विश्लेषकों की बातों में दम है इसकी गवाही चुनाव परिणाम के आंकड़े भी दे रहे हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को 39.7 प्रतिशत वोट मिला है। बीजेपी का गठबंधन सहयोगी अपना दल को 1.0 प्रतिशत और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी को 0.7 प्रतिशत वोट मिला। ऐसे में बीजेपी गठबंधन कुल 41.4 प्रतिशत वोट मिला। जबकि बहुजन समाज पार्टी को 22.2, समाजवादी पार्टी को 21.8 प्रतिशत वोट मिला। कांग्रेस को 6.2 प्रतिशत वोट मिला। अगर इन तीनों दलों के मिले वोटों को जोड़ लें तो इनको कुल 50.2 प्रतिशत वोट मिले। ऐसे में अगर सपा, बसपा और कांग्रेस महागठबंधन बनाकर चुनाव में उतरती तो जो हाल अभी इन दलों को है वहीं हाल बीजेपी और उसके सहयोगी दलों का हो सकता था।

उन्होंने बताया, “उत्तर प्रदेश की तरह ही बिहार में भी जातीय समीकरण को साधने के लिए बीजेपी ने सोशल इंजीनियरिंग का सहारा लिया था।

कुशवाहा- मौर्य समाज में पकड़ रखने वाली राष्ट्रीय लोक समता पार्टी और रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी से गठबंधन करके साल 2014 का लोकसभा चुनाव लड़कर लालू यादव की पार्टी आरजेडी और नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू का सूपड़ा साफ किया।” उन्होंने आगे बताया, “लेकिन इस हार से सबक लेते हुए एक साल बाद हुए नवंबर 2015 के विधानसभा चुनाव में धुर विरोधी लालू यादव और नीतीश एक साथ आकर गठबंधन बनाया और इस गठबंधन का महारूप देने के लिए कांग्रेस को शामिल किया।”

बिहार चुनाव में खुली थी पोल

बिहार विधानसभा चुनाव में जहां अमित शाह अपने आजमाए और सफलता की सौ प्रतिशत गारंटी वाले सोशल इंजीनियरिंग के साथ चुनाव लड़ा वहीं महागठबंधन एक साथ। इस चुनाव में अकेले बीजेपी ने वोट 24 प्रतिशत लाकर मात्र 53 सीटों पर सिमट गई। वहीं राष्ट्रीय जनता दल, जेडीयू और कांग्रेस ने मिलकर 42 प्रतिशत मतों पर कब्जा जमाते हुए 178 सीटों पर जीत दर्ज की। बिहार की इस हार से जहां बीजेपी ने सबक लिया वहीं सपा और बसपा इसको भांपने में नाकाम रही। हालांकि सपा-कांग्रेस ने गठबंधन जरूर किया लेकिन एक तो यह गठबंधन बहुत लेट हुआ और दूसरे बसपा के अलग चुनाव लड़ने से इनके वोटों में बिखराव हुआ। नतीजे में बीजेपी ने सपा, कांग्रेस और बसपा को साफ कर दिया।

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