सुलह में थोड़े इमोशनल और थोड़े प्रोफेशनल रहे मुलायम-अखिलेश

सुलह में थोड़े इमोशनल और थोड़े प्रोफेशनल रहे मुलायम-अखिलेश(फोटो साभार: गूगल)

लखनऊ। समाजवादी परिवार की रार में सबसे पहले भावुक बयान देने वाले नगर विकास मंत्री आजम खान ही मसले को सुलझाने में सूत्रधार बने। समझौते की नियम और शर्त उन्होंने तय करवाईं। मुलायम सिंह यादव के पैर उनके कहने पर अखिलेश यादव ने छुए और उसके बाद नेता जी ने अखिलेश को गले से लगा लिया। इस भावुकता के परे तय हुआ कि टिकटों की पुरानी दोनों सूची रद्द कर के एक नई संयुक्त सूची जारी होगी। निष्कासन रद्द होंगे और अखिलेश ही आगामी चुनाव में सीएम का चेहरा बनेंगे।

तब शिवपाल यादव की हुई एंट्री

एक घंटे की इस बैठक में मध्यांतर के बाद शिवपाल यादव की भी एंट्री हो गई। उनकी बातों को भी तवज्जो दी गई। जिसके साथ यादव परिवार की रार पर अल्पविराम लगा। मगर इसके बाद 5-कालीदास मार्ग पर चल रही बैठक में जो विधायकों को निर्देश मिले, वे जरूर थोड़े चौकाने वाले रहे। जिस राष्ट्रीय अधिवेशन को लेकर मुलायम सिंह यादव सबसे अधिक नाराज थे, वह अब भी होगा। विधायकों ने कहा कि सबकुछ इसी अधिवेशन में तय होगा।

लोग पार्टी पर सवाल खड़े कर रहे

समाजवादी के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि मुलायम और अखिलेश में सुलह कराने के लिए आजम खान अखिलेश को मुलायम से मिलवाने के लिए 5 केडी की बैठक से ले गए। इसके बाद मुलायम सिंह के विक्रमादित्य मार्ग स्थित बंगले में एक घंटे लंबी बैठक चली। बैठक की शुरूआत में सिर्फ अखिलेश यादव, आजम खान और मुलायम सिंह यादव ही मौजूद थे। बताया जाता है कि बैठक शुरू होते ही आजम खान ने अखिलेश यादव को समझाया कि प्रदेश में पिता-पुत्र का रिश्ता मजाक का पात्र बन गया है। ऐसे में लोग पार्टी पर सवाल खडे करने लगे हैं। आजम खान ने अखिलेश से कहा कि साल 2012 में आपके पिता मुलायम सिंह यादव ने ही आपको सीएम बनाया था, ऐसे में इस तरह से विवाद खड़ा कर देने से पार्टी को बहुत नुकसान हो सकता है। आजम खान ने इतनी बात समझा कर अखिलेश से कहा कि वह अपने पिता मुलायम सिंह यादव के पैर छुएं।

तब अखिलेश को गले लगा लिया

अखिलेश के पैर छूने के बाद मुलायम ने बेटे अखिलेश को गले लगाया और दोनों के बीच सुलह हो गई, लेकिन सुलह सिर्फ इतने पर ही नहीं हुई। इस बैठक में पहली बात यह तय हुई कि अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव का निष्कासन तुंरत प्रभाव से रद्द होगा। बैठक में यह भी तय हुआ कि भविष्य में पार्टी के हित में कोई भी फैसला मुलायम और अखिलेश दोनों मिलकर करेंगे। इसमें शिवपाल और रामगोपाल यादव की कोई भूमिका नहीं होगी। बैठक में यह बात भी तय हुई कि मुलायम खेमे और अखिलेश खेमे की दोनों लिस्ट रद्द कर दी जाएंगी। जिसके बाद आपसी सहमति के बाद उम्मीदवारों की नई लिस्ट जारी की जाएगी।

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