केन्द्र सरकार बोल रही झूठ, रामायण संग्रहालय के लिए कोई ज़मीन आवंटित नहीं

केन्द्र सरकार बोल रही  झूठ,  रामायण संग्रहालय के लिए कोई ज़मीन आवंटित नहींकेंद्र ने अयोध्या में एक रामायण संग्रहालय स्थापित करने की घोषणा की है।

अयोध्या (भाषा)। केंद्र ने यहां एक रामायण संग्रहालय स्थापित करने की घोषणा की है और 151 करोड़ रुपए भी मंजूर किए हैं, लेकिन इसके लिए मोदी सरकार ने अब तक न तो किसी जमीन की पहचान की है और न ही राज्य सरकार ने कोई जमीन आवंटित की है।

फैजाबाद के अतिरिक्त जिलाधिकारी विनोद कुमार ने कहा, ‘‘हमारे पास इस बारे में कोई सूचना नहीं है, मैं कल से ही इस बारे में (केंद्रीय पर्यटन मंत्री महेश शर्मा की ओर से प्रस्तावित संग्रहालय की जमीन के निरीक्षण के बारे में) सुन रहा हूं, मैं अभी इस मुद्दे पर कुछ नहीं कह सकता।''

फैजाबाद के जिलाधिकारी विवेक ने बताया कि जिले के अधिकारियों को जमीन के बाबत केंद्र की तरफ से कोई पत्र नहीं मिला है। जिलाधिकारी ने बताया, ‘‘जमीन के बारे में केंद्र सरकार की तरफ से हमें कोई औपचारिक संवाद प्राप्त नहीं हुआ है, जब भी हमें इस बारे में बताया जाएगा तो हम मामले को देखेंगे।'' प्रस्तावित संग्रहालय के लिए जमीन के ‘‘निरीक्षण'' के लिए यहां आए शर्मा ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सरयू नदी के किनारे जमीन मिल जाएगी।

केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा मंगलवार को रामायण संग्रहालय की स्थापना के लिए प्रस्तावित भूमि का निरीक्षण करने अयोध्या पहुंचे। प्रस्तावित संग्रहालय 25 एकड़ भूमि पर बनेगा, जो उत्तर प्रदेश सरकार ने मुहैया करायी है। ये जगह विवादित राम जन्मभूमि-बाबरी ढांचा परिसर से लगभग 15 किलोमीटर दूर है।

जिस जमीन की बात केन्द्रीय मंत्री महेश शर्मा कर रहे हैं वहीं फैजाबाद के जिलाधिकारी बता रहे हैं कि अभी तक केन्द्र सरकार से ऐसा कोई संवाद नहीं हुआ है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले लगता है कि भगवान राम राजनीति के केंद्र में आ गए हैं। हालांकि भाजपा का दावा है कि राम मंदिर उसके एजेंडा में नहीं है, लेकिन केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा ने कहा कि वे भाग्यशाली हैं, जिन्हें ‘राम का काम' करने को मिलता है।

रामायण संग्रहालय ने विनय कटियार जैसे भाजपा के कट्टरपंथी नेताओं की ये मांग तेज कर दी है कि जहां 1992 में बाबरी ढांचा ढहाया गया था, उसी जगह राम मंदिर बने।


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