क्या सरोजनीनगर विधानसभा से इस बार निकल पायेगी भाजपा ?

क्या सरोजनीनगर विधानसभा से इस बार निकल पायेगी भाजपा ?सरोजनीनगर विधानसभा से प्रत्याशी स्वाति सिंह

बसंत कुमार

सरोजनीनगर (लखनऊ)। वर्ष 1967 से लेकर अब तक हुए विधानसभा चुनावों में सरोजनीनगर से भाजपा का कोई भी उम्मीदवार जीत दर्ज नहीं कर पाया है। इस बार भाजपा से मायावती को लेकर अभद्र बयान देने के आरोपी दयाशंकर सिंह की पत्नी स्वाति सिंह मैदान में हैं। क्या स्वाति सिंह यहां से भाजपा का खाता खोल पाएंगी। ये तो चुनाव के परिणाम आने के बाद ही पता चलेगा।

सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की स्थिति कभी अच्छी नहीं रही है। भाजपा के किसी भी उम्मीदवार ने यहां से अब तक जीत दर्ज नहीं की है, इसके अलावा दूसरे नम्बर पर भी सिर्फ एक बार 1993 में भाजपा के बनवारी लाल रहे हैं। 2012 के चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार वीरेंद्र कुमार तिवारी चौथे स्थान पर रहे थे।

बसपा प्रमुख पर टिकट बेचने का आरोप लगाते हुए अभद्र भाषा का प्रयोग करने वाले भाजपा नेता दयाशंकर सिंह पर पलटवार करते हुए बसपा नेताओं ने भी अभद्र भाषा का प्रयोग किया था। इसके बाद स्वाति सिंह ने आगे आकर मोर्चा संभाल लिया था। स्वाति सिंह के आगे आने के बाद बसपा का विरोध कमजोर पड़ गया। इस विवाद के बाद स्वाति सिंह को यूपी भाजपा महिला मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया और अब वो मैदान में हैं।

रसूलपुर गाँव के रहने वाले धनंजय चौधरी बताते हैं, “क्षेत्र में जनसंपर्क यात्रा के दौरान स्वाति सिंह महिला सुरक्षा की बात करती हैं। प्रदेश सरकार को महिला सुरक्षा के नाम पर घेरती हैं, लेकिन एक सम्मानित महिला के प्रति खराब शब्दों का प्रयोग करने वाले उनके पति ही हैं। इसी वजह से स्वाति सिंह को टिकट मिला है।”

सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र से अब तक कोई महिला भी विधायक नहीं बनी है। इसबार भी चुनाव मैदान में स्वाति सिंह को छोड़कर कोई भी महिला मैदान में नहीं है। जबकि क्षेत्र में से 2,26,832 महिला मतदाता हैं। स्वाति सिंह महिलाओं से वोट मांगते हुए इस बात को बार-बार दोहराती भी हैं, कि इस क्षेत्र में अकेली महिला उम्मीदवार मैं ही हूं।

हसनखेड़ा गाँव की रहने वाले रेखा गुप्ता कहती हैं, “हमारे यहां पार्टियां महिला उम्मीदवारों को बहुत कम ही मौका देती हैं। दूसरी बात यह है कि अब भी महिलाएं अपने मन से वोट नहीं करती हैं। उनके पति या बेटे जो कहते हैं महिलाएं उन्हें ही वोट करती हैं।”

इस क्षेत्र से समाजवादी पार्टी से अखिलेश यादव के चचेरे भाई अनुराग यादव मैदान में हैं। यहां पहले मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के लड़ने की अफवाह थी। पहले यहां से सपा के शारदा प्रसाद शुक्ल विधायक थे। शारदा प्रसाद शुक्ल अखिलेश यादव सरकार में उच्च शिक्षा विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) थे। अखिलेश यादव ने शारदा प्रसाद शुक्ल को टिकट नहीं दिया तो वो राष्ट्रीय लोकदल से चुनाव मैदान में हैं।

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