सियासत की जंग में उड़ेगा चेहरे का रंग

सियासत की जंग में उड़ेगा चेहरे का रंगउत्तर प्रदेश का विधान भवन।

सुजीत अग्रहरि, स्वयं कम्युनिटी जर्नलिस्ट

शेहरतगढ़। विधानसभा चुनाव में सिद्धार्थनगर के सबसे रोचक मुकाबले में रही शोहरतगढ़ सीट पर चुनावी परिणाम के बाद विजयी प्रत्याशी के सिर सेहरा बंधेगा तो हारने वाले प्रत्याशी के चेहरे की रंगत उड़ेगी। रोचक मुकाबले में साइलेंट मतदान निर्णायक साबित होता दिख रहा है। इस सीट पर मतदान के बाद से जीत-हार की कयास लगाने का दौर शुरू हो गया है। बहुकोणीय मुकाबलों से शुरू हुई लड़ाई चुनाव का दिन आते-आते त्रिकोणीय मुकाबले में तब्दील हो गई, लेकिन अंतिम दिन वोटों के ध्रुवीकरण ने पूरा समीकरण बदल कर रख दिया।

शोहरतगढ़ विधानसभा सीट पर होने वाला चुनाव हर बार रोचक रहा है। इस बार भी भाजपा द्वारा इस सीट पर अंत तक टिकट की घोषणा न करना, सपा में पिता-पुत्र की कलह, आखिरी में सपा- कांग्रेस गठबंधन, फिर इस सीट पर गठबंधन टूटना और बसपा प्रत्याशी को एआईएमआईएम व पीस पार्टी से मिली चुनौतियों ने समर्थकों व वोटरों को खासा बेचैन किया। इसके चलते पूरा चुनाव रोचक बना रहा। शोहरतगढ़ से जीत की हैट्रिक लगा चुकी भाजपा यह सीट छोड़ प्रदेश की अन्य सीटों पर टिकटों की घोषणा करती रही। अंतिम लिस्ट आने के बाद भी प्रत्याशी की घोषणा न होने से टिकट की दौड़ में लगे प्रत्याशियों में ऊहापोह की स्थिति बनी रही। अंत में यह सीट भाजपा गठबंधन अपना दल के खाते में गयी और संगठन ने तीन बार प्रधान रहे भाजपा के ही अमर सिंह चौधरी पर दांव खेल वैतरणी पार लगाने की सोची है।

वहीं सपा-कांग्रेस गठबंधन में टिकट को लेकर परेशान विधायक लालमुन्नी सिंह के पुत्र उग्रेसन प्रताप सिंह (पूर्व ब्लाक प्रमुख) को सपा ने मैदान में उतारा, लेकिन पर्चा दाखिला के अंतिम दिन कांग्रेस से पूर्व विधायक अनिल सिंह के मैदान में आ जाने से गठबंधन टूट गया। पर्चा वापसी के दिन तक एक-दूसरे पर संगठन के आदेशों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए प्रत्याशी पर्चा वापसी करने की अफवाह भी उड़ाते रहे। लेकिन, दोनों को चिन्ह मिलते ही अफवाहों पर विराम लगा और मुकाबला रोचक हो गया। पूरे चुनाव दोनों पार्टियों के झंडे दिखे और प्रत्याशी आमने-सामने मजबूती से डटे रहे।

गठबंधन के बाद भी दोनों की लड़ाई ने वोटरों को खासा बेचैन किया। जबकि कांग्रेस के टिकट के प्रमुख दावेदारों में शुमार तीन बार विधायक रहे रविंद्र प्रताप चौधरी क्षेत्रीय दल रालोदा से मैदान में रहे। रविंद्र प्रताप वोटों की सेंधमारी कर क्षेत्रीय दल से झंडा बुलंद करना चाह रहे थे, लेकिन रालोद का क्षेत्र न होने से ज्यादा लाभ होता नहीं दिख रहा है। दल बदल कर बसपा में आए नौगढ़ नगर पालिका चेयरमैन जमील सिद्दीकी भी तेजी से मैदान में सक्रिय रहे लेकिन मुस्लिम वोटरों में मजबूत पकड़ बना चुकी एआईएमआईएम व पीस पार्टी से इन्हें जूझना पड़ा। जिन वोटों के दम पर जमील आसानी से लीड करना चाह रहे थे उसमें एआईएमआईएम प्रत्याशी हाजी अली अहमद व पीस पार्टी के राधारमण त्रिपाठी (भाजपा के बगावती) ने सेंधमारी कर बसपा प्रत्याशी को बढ़ने से रोक रखा है।

इस सीट पर पांचवें चरण में सम्पन्न हुए चुनाव में 15 प्रत्याशियों ने भाग्य आजमाया है। यहां 54.63 फीसदी मतदान हुआ। इन सभी प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला 11 मार्च को होगा।

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