यूपी के 55 लाख किसानों को अब “अच्छे दिन” का इंतजार

Rishi MishraRishi Mishra   15 March 2017 10:16 AM GMT

यूपी के 55 लाख किसानों को अब “अच्छे दिन” का इंतजारलखनऊ में सरोजनी नगर के गांव माती में अपने खेत के पास खड़े किसान रामसुमेर यादव। फोटो : विनय गुप्ता

लखनऊ। करीब 55 लाख लघु और सीमांत किसानों को अपने अच्छे दिनों के लिए प्रदेश की भावी भाजपा सरकार की पहली कैबिनेट मीटिंग का इंतजार है। 92121 करोड़ रुपये का फसली ऋण जो किसानों के लिए दिन रात की चिंता का सबब है। कर्जदार किसानों की आत्महत्याएं उनके खेतों का जब्त होना। उनकी बेटियों की शादियों में अड़चन और दिन रात का तनाव ऐसे ही न जाने कितने प्रश्नों से वे घिरे हैं। इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों का वह वादा रह रह कर किसानों को खुशियां दे रहा है कि पहली ही कैबिनेट मीटिंग में लघु और सीमातं किसानों का फसली ऋण माफ कर दिया जाएगा। उप्र में चुनाव से पहले जारी भाजपा के लोकसंकल्प पत्र में पार्टी ने घोषणा की थी कि लघु और सीमांत किसानों का फसली ऋण माफ किया जाएगा। बाद में नरेंद्र मोदी ने तो यहां तक घोषणा कर दी थी कि पहली कैबिनेट मीटिंग में ही ऋण माफ करने की घोषणा होगी। इसको लेकर प्रदेश के लाखों किसान इंतजार कर रहे हैं।

करीब एक अरब रुपये का माफ करना होगा फसली ऋण

विभिन्न बैंकों के संयुक्त आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में सीमांत और लघु किसानों पर 92212 करोड़ रुपये का फसली ऋण है। ये आंकड़ा सितंबर 2016 तक का है। जिसके बाद में अधिक ऋण किसानों ने नहीं लिया है। मगर ये इतना अधिक ऋण चुकाने के लिए बीजेपी सरकार को वार्षिक बजट का एक तिहाई हिस्सा किसानों पर ही लगा देना होगा। मगर भाजपा इसको लेकर खुद को कटिबध्द बताती है। भाजपा के भदोही से सांसद और राष्ट्रीय किसान संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह मस्त बताते हैं कि “भाजपा के लिए इससे बड़ा वादा कोई नहीं है। हम बैंकों का कर्ज सरकार के बजट से उतारेंगे और किसानों को राहत देंगे। आगे से फसली ऋण बिना किसी ब्याज के लिए किसानों को देंगे।” दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने खासतौर पर पश्चिम उत्तर प्रदेश की अपनी रैलियों में जोर देकर कहा था कि “11 मार्च को हमारी सरकार बनेगी। कुछ दिन शपथग्रहण होने में लगेंगे। उसके बाद तत्काल पहली कैबिनेट मीटिंग में किसानों का कर्ज माफ करने की घोषणा कर दी जाएगी।”

कहीं आत्महत्याएं तो कहीं जमीन गिरवी गई

नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक देश में साल 2014 से 2016 के अंत तक करीब 2.50 लाख किसानों ने विभिन्न कारणों से आत्महत्या की है। जिनमें से उत्तर प्रदेश में भी संख्या करीब एक लाख की है। 2015 में जब साल भर मौसम खराब रहा था, तब किसानों पर सबसे अधिक तकलीफें झेली थीं। गेहूं और धान दोनों की फसलें खराब हुई थीं। राजधानी में ही नौबस्ता गांव के किसान शिवकुमार बताते हैं कि “1.10 लाख का कर्ज बैंक से लिया था। तीन बीघा जमीन गिरवी रख कर बैंक का कर्ज अभी एक लाख के करीब बाकी है।” इसी गांव के श्रवण कुमार बताते हैं कि, ”मैं भी कर्जदार हूं, अगर भाजपा सरकार किसानों का कर्ज माफ कर देगी तो समझ लीजिये किसानों का बहुत भला होगा। उनके सिर से बड़ा बोझ हट जाएगा।”

लघु और सीमांत किसान

एक से दो हेक्टेयर की जोत वाले किसान लघु और एक हेक्टेयर जमीन से कम वाले किसान सीमांत वर्ग के किसानों में आते हैं।

भाजपा ने अपने लोककल्याण संकल्प पत्र में जितने संकल्प किये हैं, उन सबको पूरा किया जाएगा। जिस समय पर वादा पूरा करने का जो लक्ष्य है, उस समय पर पूरा किया जाएगा। जिसमें किसानों की कर्ज माफी हमारे लिए सबसे बड़ा संकल्प है, इसको हम पूरा कर लिया है।
राकेश त्रिपाठी, भाजपा प्रदेश प्रवक्ता

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