गांधी परिवार के मतदाताओं को आज भी एम्स का इंतज़ार

गांधी परिवार के मतदाताओं को आज भी एम्स का इंतज़ारयहां एम्स बन रहा है मगर रफ्तार सुस्त है, स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है।

ऋषि मिश्र

लखनऊ। आजादी के कुछ समय बाद से ही रायबरेली और अमेठी क्षेत्र हमेशा से ही राजनीतिक पटल पर चमकता रहा। मगर इन जिलों में वास्तविकताएं इससे बहुत इतर हैं। आजादी के 70 साल बाद यहां एक मल्टीस्पेश्यिलटी अस्पताल की नींव रखी गई है। यहां एम्स बन रहा है मगर रफ्तार सुस्त है, स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है।

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जिला अस्पताल के अलावा कोई भी बेहतर स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। तहसीलों में यदि कोई गंभीर बीमार या घायल हुआ तो उसको जिला अस्पताल भेजा जाता है। जिला अस्पताल में इलाज नहीं मिलता है तो फिर सीधी दौड़ लखनऊ की होती है। रायबरेली में बेहतर, सस्ता और सुलभ इलाज अब भी एक सपना भर ही है।

हरचंदपुर के गांव कठवाड़ा के रहने वाले रामविलास राजपूत(38 वर्ष) बताते हैं कि,” गांव में अगर कोई भी बीमार हो जाए तो आसपास के स्वास्थ्य केंद्रों में इतनी व्यवस्था नहीं है कि बीमार को सही इलाज में मिल जाए। सामान्य प्रसव, सामान्य बुखार, उल्टी-दस्त और छोटी-मोटी बीमारियों के के अलावा हर तरह के गंभीर इलाज के लिए लोगों को जिला अस्पताल जाना होता है। लेकिन -रायबरेली पहुंचते-पहुंचते अगर बात और गंभीर हो गई तो फिर लखनऊ ले जाना पड़ता है।

तिलोई बाजार के दुकानदार मोहम्म्द इलियास(45वर्ष) कहते हैं कि “गांधी परिवार ने काफी काम काम किया है। मगर मैं भी मानता हूं कि और अधिक अस्पतालों का होना बहुत जरूरी है। एम्स बनेगा उससे लोगों को बहुत लाभ मिलेगा, मगर वह कब होगा, ये बहुत बड़ी बात है।”

मेरे प्रयास से केंद्र सरकार ने रायबरेली के लिए एम्स मंजूर किया है। राज्य सरकार से जमीन भी मिल गई है। बहुत जल्द ही इसका निर्माण भी शुरू किया जाएगा। जिससे क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।
अखिलेश सिंह, सदर विधायक , रायबरेली

एम्स निर्माण पर भेदभाव का आरोप

कांग्रेसी नेता रमेश शुक्ल ने बताया कि निर्माणाधीन एम्स के लिए आवंटित धन की अनुपलब्धता है। केंद्र पहले यहां का निर्माण कार्य पूरा कराए। मोदी सरकार द्वारा राजनैतिक द्वेष के चलते रायबरेली एम्स के समय से निर्माण व संचालन को लेकर लापरवाही बरती जा रही है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा लगातार एम्स की बात करना एक जुमला भर है।

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