इनके हौसले को सलाम कहिए

इनके हौसले को सलाम कहिएचलने में असमर्थ फिर भी डालने पहुंचे वोट।

उन्नाव। उम्र अस्सी साल, चलने में असमर्थ लेकिन बेटे का सहारा लेकर भगवानदीन ने लोकतंत्र के महापर्व में हिस्सा लिया और अपना वोट डाला। भगवानदीन ही नहीं प्रदेश के 12 जिलों में दिव्यांग और बुजुर्ग वोट देने पहुंच रहे हैं।

उन्नाव जिले के भगवानदीन का कहते हैं, "अब तक वह दस विधानसभा चुनाव में वोट डाल चुका हूं। जब भी चुनाव आता है वह मतदान जरूर करता हूं।"

भगवानदीन की तरह ही कई ऐसे लोग थे जो बिना सहारे के चल नहीं सकते। बुढ़ापे में हाथ पांव ने साथ देना बंद कर दिया लेकिन लोकतंत्र में अटूट विश्वास का ही नतीजा था जो वह अपनों का सहारा लेकर बूथ तक पहुंचे और मतदान किया। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में दिव्यांग व वृद्ध लोग मतदान में किसी से पीछे नहीं रहे। कई लोग तो खुद ही बैसाखी या फिर लाठी के सहारे बूथ तक पहुंच गए और अपना वोट डाला।

नवाबगंज के मद़्दूखेड़ा में रहने वाले छोटेलाल माली की उम्र 102 वर्ष है। वह अब खड़े होकर चल नहीं पाते। घर से पोलिंग बूथ की दूरी एक किलोमीटर की है। फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और किसी तरह पोलिंग बूथ तक पहुंच ही गए। बूथ पर पहुंचने के बाद उन्होंने पहले थोड़ा आराम किया और फिर बूथ मित्र की मदद से अपना वोट डाला। छोटेलाल यह तो नहीं बता पाए कि वह कब से मतदान कर रहे हैं पर उन्होंने यह जरूर बताया कि वह हर चुनाव में अपना वोट जरूर डालते हैं।

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